जनवरी 2002 में 2 मैक इनफैंटरी में भर्ती हुआ था बलजीत सिंह


घरौंडा, 12 फरवरी (पांचाल/आर्य) : जनवरी 2002 में हवलदार बलजीत सिंह 2 मैक इनफैंटरी में भर्ती हुआ था व महाराष्ट्र के अहमदनगर में ट्रेनिंग की थी। इसके बाद अपनी अच्छी फिटनैस के चलते हवलदार बलजीत ने एन.एस.जी.कमांडो की ट्रेनिंग पूरी की थी व वर्ष 2015 से वर्ष 2017 तक नई दिल्ली में एन.एस.जी.में वी.वी.आई.पी.डयूटी में तैनात रहा। इससे पहले भी तीन साल तक हवलदार बलजीत राष्ट्रीय राईफल में पोस्टिंग रह चुका था व अब दोबारा से लगभग पिछले तीन वर्षों से 50 राष्ट्रीय राईफल में श्रीनगर क्षेत्र में पोस्टिंग था। 
हवलदार का एक तीन वर्षीय बेटा व सात वर्षीय बेटी है : देश के लिए शहादत देने वाले हवलदार बलजीत की पत्नी अरूणा, एक तीन वर्षीय बेटा अरनव, सात वर्षीय बेटी जन्नत, 75 वर्षीय किसान पिता किशनचंद, बड़ी बहन नीलम जो कि करनाल के नेवल गांव में शदीशुदा है, बड़ा भाई कुलदीप जो कि कृषि व एक गाड़ी चलाकर अपना जीवन निर्वाह कर रहा है। शहीद की माता मूर्ति का पहले ही देहांत हो चुका है। इसके अलावा किसान परिवार है व ताऊ का लडका भी श्रीनगर में ही राष्ट्रीय राईफल में इस समय तैनात है।
एक दिन पहले ही की थी घरवालों से फोन पर बात : जैसे ही शहीद के शहादत की सूचना गांव पहुंची तो पूरा गांव बलजीत के घर एकत्रित हो गया। इस दौरान पिता किशनचंद खेत में पशुओं का चारा लेने गए हुए थे, पत्नी घर पर ही घर का कार्य कर रही थी। पिता ने सूचना मिलने पर कहा कि वह तो फोन पर छुट्टी मिलने की बात कह रहा था। पत्नी अरूणा ने कहा कि एक दिन पहले ही मुझसे व बच्चों से बात हुई थी, दिपावली पर एक महीने की छुट्टी गांव में परिवार के साथ बिताकर गया था। शहीद की शहादत पर बड़े भाई कुलदीप लाठर, ताऊ के बेटे जसमेर लाठर, बलकार लाठर, दिलबाग आर्य, अमित लाठर, संदीप ने बताया कि बलजीत वास्तव में सच्चा देशभक्त था। जब उससे श्रीनगर डयूटी पर बातचीत होती तो हमेशा कहता था कि देश के लिए जीना व देश के लिए मरना है।