अदालत ने दी 29 हफ्ते की गर्भवती महिला को गर्भपात की इजाज़त


कोलकाता, 18 फरवरी (भाषा) : कोलकता उच्च न्यायालय ने 42 वर्षीय एक महिला को 29 हफ्ते के भ्रूण के गर्भपात की सोमवार को इजाजत दे दी। भ्रूण के डाउन सिंड्रोम से ग्रसित होने का पता चलने के बाद महिला के मानसिक, शारीरिक एवं वित्तीय तनाव बढ़ जाने के दावे पर विचार करते हुए अदालत ने यह फैसला सुनाया। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बी.एस. सोमाद्दर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस बात पर गौर किया कि राज्य आर्थिक एवं चिकित्सीय मदद की पेशकश कर उसकी समस्याओं को दूर करने के लिए आगे नहीं आया। इसने कहा कि अजन्मे बच्चे के साथ ही मां को भी गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार है। पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से गठित मैडीकल बोर्ड की रिपोर्ट में कहा गया कि भ्रूण डाउन सिंड्रोम से ग्रसित है और उसके दिल, पेट एवं भोजन नली की विकृति से प्रभावित होने की आशंका है। महिला के वकीलों ने अदालत को बताया कि सरकार गठित पैनल की रिपोर्ट में बताया गया कि अगर बच्चा जन्म लेता है तो उसे विशेष देखभाल एवं दीर्घकालिक इलाज की जरूरत होगी और फिर भी वह ठीक हो जाएगा, यह पूरी तरह नहीं कहा जा सकता। पीठ ने महसूस किया कि ऐसी स्थिति में बच्चे के जन्म से मां को अत्यधिक शारीरिक एवं मानसिक पीड़ा से गुजरना होगा। अदालत ने महिला को पंजीकृत निजी अस्पताल में गर्भपात कराने की इजाजत दे दी। वह फिलहाल 29 हफ्ते की गर्भवती है। एकल पीठ द्वारा गर्भपात की इजाजत नहीं दिए जाने के बाद महिला के वकीलों कलोल बसु और अपलक बसु ने खंडपीठ का रुख किया था।