कितनी मज़बूत है आपके रिश्तों की डोर


शक ईर्ष्या में से पैदा हुई एक ऐसी आदत है जो न कभी खुशी देती है साथ ही वह दूसरों की खुशी को भी बर्बाद कर देती है। जो दूसरों की नींद को खराब करते हैं खुद कभी भी चैन की नींद नहीं सो सकते। शकी व्यक्ति अक्सर ही बेचैन रहता है, उसकी सोच का दरवाज़ा इतना तंग होता है कि वह ज़िंदगी की विशालता को नहीं देख पाता। हर ठगी और स्वार्थ के पीछे लालच होता है। उसी के साथ ही ईर्ष्या और लड़ाई-झगड़ा पैदा होता है। अपने अवगुणों को छुपा कर आप बुरे परिणामों से बच नहीं सकते। शक और ईर्ष्या ज़हर की तरह है, जोकि ज़िंदगी के सुख को खत्म कर देता है। यह ज़िंदगी में से प्यार को खत्म कर देते हैं। प्यार लेने के लिए प्यार देना भी सीखो। हर समय दुश्मन ही नहीं पालते रहना चाहिए। जितना अधिक भरोसा मजबूत होता है, रिश्तों की डोर भी उतनी ही मजबूत होती है। नासमझी में पैदा हुई जिद्द जोड़ती नहीं तोड़ती है। गलत इरादे वाले लोग अक्सर ज़िंदगी के कमज़ोर पक्ष का लाभ उठाते हैं। ईर्ष्या ज़िंदगी में मेल-मिलाप की भावना खत्म करती है।जो लोग दूसरों की सफलता और खुशी के प्रशंसक होते हैं, वह लोग खुद ही सफल, खुशहाल और प्रशंसा के योग्य होते हैं। मौका आने पर और उसी मौके पर या अवसर पर काम आने वाले लोग दिल में जगह बना लेते हैं। अपनी सोच के आधार पर किसी की कही बात का अंदाज़ा नहीं लगना चाहिए। लेकिन हर छोटी-छोटी बात पर शक करते रहना अपने अनुसार अंदाज़ा लगाते रहना गलत है। यह रिश्तों को कमज़ोर करता है।किसी भी रिश्ते में जल्दबाज़ी में किए गए फैसले हमें भरोसे को कमज़ोर करते हैं, जिससे आपका सही गलत के फैसले लेने का संतुलन बिगाड़ जाता है। किसी भी इरादे को सही तरीके से समझने का एक ढंग है वह है सब कर लेना। हद से ज्यादा किया यकीन और हद से ज्यादा की उम्मीदें आपको कमज़ोर करती हैं। जब किसी से नफरत करते हैं तो उस जलन की बदबू से एक रिश्ता नहीं कई रिश्ते बर्बाद होते हैं। रिश्ते मोतियों की माला की तरह होते हैं, जिनको सहेज कर रखना ज़रूरी है। कई लोग ऐसे होते हैं, जो मुकाबला नहीं कर सकते, इसलिए वह ईर्ष्या करते हैं। अपने इर्द-गिर्द के माहौल की शिकायत करने से पहले अपने अंदर की कमियों को देखें। रिश्तों में अपनी हार को मान लेना कई बार जीतने से ज्यादा फायदेमंद होता है। आंकड़े हमारे कद को छोटा करते हैं और अहंकार रिश्तों से दूर करते हैं। हमें अपने रिश्तों की डोर को मजबूत रखना चाहिए। ये रिश्ते ही हैं जिनकी वजह से समाज है। हमें अपने आसपास भरोसेमंद वातावरण पैदा करना चाहिए। 

—अमरजीत बराड़