विदेश में रहते पंजाबियों का चुनावों से हुआ मोहभंग-मेजर सिंह-



जालन्धर, 20 मार्च : गत करीब अढ़ाई दशक से पंजाब में होते लोकसभा व विधानसभा चुनाव ही नहीं, बल्कि पंचायत चुनावों तक विदेशों में जाकर बसे पंजाबी बेहद उत्साह दिखाते रहे हैं। कई बार बड़ी संख्या में पंजाब आकर भी अपनी-अपनी पसंद की राजनीतिक पार्टियों व उम्मीदवारों के समर्थन में भी कूदते रहे हैं। विदेशों में विशेष रूप से कनाडा, अमरीका व इंग्लैंड जैसे अधिक पंजाबी आबादी वाले देशों में चुनावों के समय वहां भी राजनीतिक चुनावी गतिविधियां दिखाई देती रही हैं। हर चुनाव से कुछ समय पहले डालर एकत्रित करने के लिए पंजाब से राजनीतिक नेता योजनाएं बनाकर विदेशों में जाते रहे हैं और फिर उन देशों में बैठकें कर इधर से (भारत) गए नेताओं का स्वागत भी खूब किया जाता रहा है। 2014 में ‘आप’ को बाहर से ज्यादा ही समर्थन मिला था व अकाली दल तथा कांग्रेस भी पीछे नहीं रही। लेकिन इस बार राजनेता डालरों से वंचित रह गए हैं।
कैप्टन अमरेन्द्र सिंह कनाडा की पंजाबी लीडरशिप के साथ व्यर्थ के मतभेदों के कारण उनका विश्वास खो चुके हैं। विभिन्न देशों में अनेकों गणमान्यों व राजनीतिक लोगों के साथ हुई बातचीत से पता चलता है कि विदेश में बसे पंजाबी लोकसभा चुनावों को बेसब्री से देख रहे हैं परंतु किसी राजनीतिक पार्टी के प्रति समर्थन या उत्साह वाली कोई बात नज़र नहीं आ रही। किसी भी देश में किसी राजनीतिक पार्टी के पक्ष में प्रवासी पंजाबियों के जत्थे बन कर पहुंचने वाली बात तो कहीं भी नहीं है। अब अमरीका, कनाडा व इंग्लैंड में पहले की तरह किसी भी राजनीतिक पार्टी के पक्ष में बैठकें आदि नहीं हो रहीं। कांग्रेस व अकाली नेताओं के लिए तो विगत कई वर्षों से ही बड़ी संख्या में प्रवासी पंजाबियों ने दरवाजे बंद कर लिए थे और गुरुद्वारों में बोलने की भी पाबंदी है, परंतु अब ‘आप’ या अन्य वैकल्पिक राजनीति करने वाली पार्टियाें के नेता भी विदेशों का रुख नहीं कर रहे। पंजाब की चुनाव गतिविधियों से प्रवासी पंजाबियों का मोह भंग होना राजनीतिक लोगों के लिए जितना हानिकारक है, इस बारे तो वह खुद अनुमान लगा सकते हैं, पंजाब वासियों व प्रवासी पंजाबियों के लिए यह मोहभंग होना, उनके बीच सांझ की डोर ढीली होना खतरनाक संकेत है।