न्यायालय ने पूर्व सीजेआई को'बचानेके लिए एक करोड़ रु का शुल्क मांगने संबंधी याचिका खारिज की
नयी दिल्ली, 12 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को एक अधिवक्ता की ओर से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें केंद्र को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि उन्हें 2018 में तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा को कथित तौर पर''बचाने' के लिए दायर किए गए छह मामलों के लिए शुल्क और खर्च के रूप में एक करोड़ रुपये का भुगतान किया जाये। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि याचिका''पूरी तरह से गलत धारणा पर आधारित' थी। उच्चतम न्यायालय, लखनऊ के अधिवक्ता अशोक पांडे द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें उन्होंने पिछले साल मार्च में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के एक आदेश को चुनौती दी थी।
उच्च न्यायालय ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने केंद्र को उनके द्वारा दायर किए गए छह मामलों के लिए शुल्क और खर्च के रूप में एक करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था। पांडे ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि उन्होंने तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश मिश्रा का''बचाव'करने के लिए छह मामले दायर किए थे।
याचिकाकर्ता ने कहा कि उन मामलों में मुकदमेबाजी के लिए दो लाख रुपये का खर्च आया था और उन्होंने इसके लिए अपनी बेटी से पैसे लिए थे। प्रधान न्यायाधीश ने पूछा,''न्यायाधीशों के खिलाफ तरह-तरह के आरोप लगाने के बाद, अब आप'माननीय शब्द का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं?' याचिकाकर्ता ने जनवरी 2018 में उच्चतम न्यायालय के तत्कालीन चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों द्वारा आयोजित संवाददाता सम्मेलन का हवाला दिया। उन्होंने कहा,''न्यायाधीश, प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ संवाददाता सम्मेलन नहीं कर सकते और यह नियमों के खिलाफ था।' प्रधान न्यायाधीश ने कहा,''आपने संस्था को समाज सेवा प्रदान की। समाज सेवा हमेशा अमूल्य होती है। इसका मूल्यांकन एक करोड़ या दो करोड़ रुपये में कैसे किया जा सकता है?' पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा,''आपने समाज सेवा की है और यदि आप सराहना चाहते हैं, तो हम इसके लिए आपकी सराहना करते हैं।' पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। उच्च न्यायालय में याचिकाकर्ता ने कानून और न्याय मंत्रालय के जुलाई 2024 के एक आदेश को भी चुनौती दी थी जिसके •ारिए उस समय के प्रधान न्यायाधीश को बचाने के लिए कथित तौर पर छह मामले दाखिल करने की फीस और खर्च के तौर पर एक करोड़ रुपये के भुगतान का उनका दावा खारिज कर दिया गया था।

