तीन दिवसीय आलमी पंजाबी कांफ्रैंस की शुरुआत


चंडीगढ़, 15 फरवरी (अजायब सिंह औजला) : पंजाब कला भवन चंडीगढ़ में केन्द्रीय पंजाबी लेखक सभा द्वारा पंजाब कला परिषद्, पंजाबी अकादमी दिल्ली तथा पंजाब संगीत नाटक अकादमी के सहयोग से की जा रही दूसरी आलमी पंजाबी कांफ्रैंस का शानो-शौकत से आगाज़ हुआ। इसकी अध्यक्षता प्रो. हरीश पुरी द्वारा गईं। स्वागती कमेटी के चेयरमैन रजिन्द्र सिंह चीमा ने लेखकों, चिंतकों तथा शायरों के इस संवेदना संवाद का स्वागत किया। इस संकट भरे समय में अलग न रहकर लेखकों को अपनी ज़िम्मेदारी निभाने का निमंत्रण किया। कांफ्रैंस के उद्घाटनी समारोह में ‘राष्ट्र, सांप्रदायिकता तथा मानवीय अधिकार’ विषय पर कुंजीवत भाषण देते दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रो. अपूर्वा नंद ने कहा कि राष्ट्र लोगों द्वारा रिश्ता बनाने की चाहत के साथ बनता है। उन्होंने कहा कि हालात कितने भी भयानक हों, उसको बदलना नामुमकिन नहीं होता, इसके लिए संघर्ष ज़रूरी होता है।कांफ्रैंस की शुरुआत में ही पुलवामा में आतंकवादियों द्वारा हमले में मारे गए 40 से ज्यादा सुरक्षा कर्मियों को दो मिनट का मौन धारण करके श्रद्धांजलि दी गई तथा साथ ही इस हमले की कड़ी निंदा करता प्रस्ताव पास किया गया। डा. सुरजीत पातर ने सत्र के विषय पर विचार प्रकट करते कहा कि चुप रहना खतरनाक होता है तथा खास तौर पर बोलना मना हो तो बोलना और भी ज़रूरी बन जाता है। दूसरा सत्र प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डा. सुच्चा सिंह गिल की अध्यक्षता में पंजाब की आर्थिकता तथा सेवा क्षेत्र के विषय पर हुआ। मुख्य पर्चा पेश करते हुए डा. सुखपाल सिंह ने कहा कि हरित क्रांति से पैदावार बढ़ी, परन्तु पंजाब की कृषि अब वैश्वीकरण के दौर में गंभीर संकट का शिकार है तथा किसान आत्महत्याओं के रास्ते पर चल पड़े हैं।