विमान दुर्घटनाओं को रोकने हेतु ठोस कदम उठाए जाएं

हवाई यात्रा को लम्बे समय तक सुरक्षित माना जाता रहा है। आंकड़े भी यही गवाही देते हैं कि सड़क, रेल की तुलना में विमान दुर्घटनाएं कहीं कम होती हैं। आधुनिक तकनीक, कड़े सुरक्षा मानक, प्रशिक्षित पायलट और अत्याधुनिक एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम ने हवाई यात्रा को भरोसेमंद बनाया है। इसके बावजूद, पिछले कुछ वर्षों से एविएशन सेक्टर पर लगातार सवाल उठने लगे हैं। रह-रहकर सामने आ रही हवाई दुर्घटनाएं इस भरोसे को झकझोर रही हैं।
इन दुर्घटनाओं के पीछे कई कारण छिपे हैं। कहीं तकनीकी खामियां जिम्मेदार होती हैं, तो कहीं मानवीय चूक। कई बार विमान का रखरखाव तय मानकों के अनुसार नहीं होता, तो कभी पायलटों पर बढ़ता कार्य दबाव और लम्बी ड्यूटी भी दुर्घटनाओं का कारण बन जाती है। मौसम की अनदेखी, एयर ट्रैफिक प्रबंधन में लापरवाही और सुरक्षा नियमों में ढील भी खतरे को बढ़ा देती है। निजीकरण और मुनाफे की होड़ ने कई बार सुरक्षा को दूसरे पायदान पर खड़ा कर दिया है और यही सबसे बड़ा खतरा है।
हमारे देश में सड़क दुर्घटनाएं पहले से ही एक गंभीर समस्या बनी हुई हैं, जहां हर साल हज़ारों लोग अपनी जान गंवाते हैं। रेल और जल दुर्घटनाएं भी कम नहीं हैं, लेकिन जब विमान दुर्घटनाएं होती हैं तो वे समाज को ज्यादा झकझोरती हैं, क्योंकि आसमान में दुर्घटना से बचने के सम्भावनाएं कम हो जाती हैं।
इसी क्रम में हाल ही में महाराष्ट्र के बारामती में हुए एक दुखद विमान हादसे में महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजित पवार के निधन की खबर ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह हादसा विमान की लैंडिंग के दौरान हुआ। जानकारी के अनुसार अजित पवार एक पंचायत चुनाव के प्रचार के लिए निजी विमान से यात्रा कर रहे थे। वास्तव में यह पहला अवसर नहीं है जब किसी बड़े राजनीतिक नेता की मृत्यु विमान दुर्घटना में हुई हो। विगत वर्षों में भारत ने कई प्रमुख नेताओं और सार्वजनिक हस्तियों को ऐसे हादसों में खोया है। पाठक जानते होंगे कि गुजरात के अहमदाबाद में 12 जून, 2025 को एयर इंडिया का एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी का निधन हो गया था। इस विमान में 242 लोग सवार थे, जिनमें से केवल एक व्यक्ति के बचने की खबर सामने आई थी। 8 दिसम्बर, 2021 को तमिलनाडु के कुन्नूर के पास हुए एक हेलीकॉप्टर हादसे में भारत के पहले प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत की मृत्यु हो गई थी। वह अपनी पत्नी और 11 अन्य लोगों के साथ सुलूर से वेलिंगटन जा रहे थे। इसी तरह 30 अप्रैल, 2011 को अरुणाचल प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री दोरजी खांडू और चार अन्य लोगों की मृत्यु उस समय हो गई थी, जब उन्हें तवांग से ईटानगर ले जा रहा हेलीकॉप्टर पश्चिमी कामेंग जिले में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। वर्ष 2005 में उद्योगपति और हरियाणा के मंत्री ओम प्रकाश जिंदल तथा कृषि मंत्री सुरेंद्र सिंह की भी एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। यह हेलीकॉप्टर दिल्ली से चंडीगढ़ जा रहा था और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। 
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई. एस. राजशेखर रेड्डी, जिन्हें वाईएसआर के नाम से जाना जाता था, की 2 सितम्बर 2009 को एक हेलीकॉप्टर हादसे में मृत्यु हो गई थी। इसके अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता माधवराव सिंधिया की 30 सितम्बर 2001 को एक विमान दुर्घटना में मृत्यु हुई थी। वह कानपुर जाने के लिए 10 सीटों वाले निजी विमान में सवार थे, जो खराब मौसम के कारण मैनपुरी के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। 23 जून, 1980 को संजय गांधी की भी एक हवाई दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी, जब वह दिल्ली फ्लाइंग क्लब का विमान उड़ा रहे थे। लोकसभा अध्यक्ष और तेलुगु देशम पार्टी के नेता जी. एम. सी. बालयोगी की 3 मार्च, 2002 को हेलीकॉप्टर दुर्घटना में जान चली गई थी। बहरहाल, यहां यह कहना गलत नहीं होगा कि इन सभी घटनाओं ने भारत में तेज़ी से बढ़ते एविएशन सेक्टर की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अधिकांश हादसे ऐसे होते हैं जिन्हें समय रहते सावधानी, सख्त निगरानी और नियमों के ईमानदारी से पालन से काफी हद तक रोका जा सकता है। 
दुर्भाग्य यह है कि किसी बड़े हादसे के बाद जांच के आदेश होते हैं, बयानबाज़ी होती है, कुछ दिनों तक मीडिया में शोर मचता है और फिर सब कुछ ठंडे बस्ते में चला जाता है। हम पूर्व में हुई दुर्घटनाओं से न तो गंभीरता से सबक लेते हैं और न ही स्थायी सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाते हैं। यदि वास्तव में जीवन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी है तो सुरक्षा नियमों को कागजों तक सीमित रखने के बजाय ज़मीन पर सख्ती से लागू करना होगा, तभी हवाई यात्रा ही नहीं, हर यात्रा वास्तव में सुरक्षित बन सकेगी। वास्तव में अजित पवार के निधन से सबक लेते हुए एविएशन सेक्टर को दुर्घटना-शून्य बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। (एजेंसी)

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