कुतुब मीनार बनाम बुर्ज खलीफा
1943 में रजिस्टर्ड हुई पंजाबी साहित्य सभा नई दिल्ली प्रत्येक वर्ष फरवरी माह में नवयुग फार्म में लगभग 37 वर्षों से धूप की महफिल मनाती आ रही है। यह फार्म महरौली के कुतुब मीनार के निकट है। दिल्ली के सुल्तान कुतुबद्दीन एबक ने दिल्ली से 10 मील दूर हिन्दुस्तान पर अपनी जीत के चिन्ह के रूप में 1193 में कुतुब मीनार का निर्माण आरंभ किया था। इसको पूरा करने की ज़िम्मेदारी उसके दामाद अल्तमश के कंधों पर आ गई थी जो कुतुब-उद-दीन एबक के बाद दिल्ली के तख्त पर बैठा था। इसके निर्माण के लिए दोनों सुल्तानों ने चमकदार लाल पत्थर तथा सफेद संगमरमर का इस्तेमाल किया। जब पांच मंज़िला यह मीनार पूर्ण हुआ तो उस समय इसका शुमार विश्व के सब से ऊंचे मीनार के रूप में होने लगा था।
एक चरण पर इंद्र देवता की खुदाई ने इसकी शीर्ष मंज़िल को इतना तबाह कर दिया कि फिरोज़दीन तुगलक को इसकी शीर्ष मंज़िल का पुन: निर्माण करवाना पड़ा। इसलिए उसने सफेद संगमरमर का इस्तेमाल किया ताकि इसका ज़िक्र करते समय उसके नाम को विशेष स्थान मिल सके। 1600 वर्ष पुराने लोहे के स्तम्भों वाली विश्व की सबसे ऊंची इस यादगार का नाम दुनिया भर में तब तक बोलता रहा, जब तक 2010 में दुबई के शासकों ने इससे कई गुणा ऊंचे बुर्ज ़खलीफा का निर्माण नहीं कर लिया था।
बुर्ज ़खलीफा की 163 मंज़िलें हैं। इसकी ऊंचाई इतनी है कि इसमें 11 कुतुब मीनार समा सकते हैं। 163 मंज़िला बुर्ज ़खलीफा आज विश्व की सबसे ऊंची इमारत है और यह तब तक रहेगी जब तक सऊदी अरब का जेदाह टावर पूरा नहीं हो जाता, जो अभी निर्माणाधीन है। यदि बुर्ज ़खलीफा ने कुतुब मीनार को मात दी है तो सऊदी अरब के जेदाह टावर ने इसे मात दे देनी है। खूबी यह है कि इन ऊंची यादगारों का निर्माण विश्व के मुस्लिम शासकों ने ही किया है। चाहे वे धरती के दूरवर्ती क्षेत्रों पर जाकर शासन करते थे और उनके शासन करने के समय में भी एक-दूसरे से सदियों का अंतर था। यह सभी करिश्मे यात्रियों के मन को अच्छे लगते हैं और तत्कालीन शासक इन पर बड़ी टिकटें लगाकर अपने खज़ाने भरते थे।
मैं 1953 से 1984 तक दिल्ली का निवासी रहा हूं। मैं श्री गुरु गोबिन्द सिंह कालेज माहिलपुर से बी.ए. करके अपनी उम्र के 20वें वर्ष में दिल्ली चला गया था। तब हम एक-दूसरे से शर्तें लगा कर कुतुब मीनार की मंज़िलों पर चढ़ जाते थे। दुबई वाला बुर्ज ़खलीफा देखने का सबब मेरे जानकार सुरिन्दर पाल सिंह ओबराय की बजह से बना, जो वहां समुद्र में इमारतें बनाने के ठेकेदार हैं। निश्चय ही बुर्ज ़खलीफा देखने वालों के लिए लिफ्टें भी हैं और अलग-अलग मंज़िलों पर खाने-पीने का प्रबंध भी है।
जाते-जाते यह भी बता दूं कि कुतुब मीनार की ऊंचाई 828 मीटर (2717 फुट, नोक तक कुल ऊंचाई 829.8 मीटर या 2722 फुट) है, जिसके निर्माण में तीन शासकों का योगदान है,परन्तु 2717 फुट ऊंची बुर्ज ़खलीफा की इमारत बहुत कम समय में सिर्फ शेख मुहम्मद बिन राशिद की देख-रेख में ही निर्मित की गई है। सऊदी अरब वाला जेदाह टावर कब बनता है, यह समय बताएगा। वैसे इस टावर के सभी कार्य मानवीय सूझबूझ तथा मानवीय चमत्कारों को उजागर करते हैं।
इस बार की महफिल में महफिल से अधिक मेरा ध्यान कुतुब मीनार की ओर जाने का कारण यह है कि 2025 के मध्य में दुबई का बुर्ज ़खलीफा देख कर आया हूं, जो कुतुब मीनार से 11 गुणा ऊंचा है।



