तमिलनाडु की नई शुरुआत
तमिलनाडु में सी. जोसेफ विजय द्वारा मुख्यमंत्री की शपथ लेने के साथ बहुत समय से दो द्रविड़ पार्टियों के बार-बार शासन करने का दौर एक बार तो खत्म हो गया है। पिछले 60 वर्ष से द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डी.एम.के.) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (ए.आई.ए.डी.एम.के.) पार्टियों से सत्ता छीनना वहां एक इंकलाब से कम नहीं है। पिछले लम्बे समय से तमिलनाडु की राजनीति में एक विशेष बात यह भी देखी गई है कि यहां फिल्मी हस्तियों को ही अधिक महत्व दिया जाता रहा है। सी.एन. अन्नादुराई जिन्होंने डी.एम.के. पार्टी की नींव रखी थी, वह तमिल फिल्मों के प्रसिद्ध कहानीकार थे। वह 1967 में मुख्यमंत्री बने। उस समय इसको मद्रास स्टेट कहा जाता था। 1969 में तमिलनाडु राज्य के बनने पर भी वह वहां के पहले मुख्यमंत्री थे।
इसी प्रकार फिल्मी कहानीकार एम. करुणानीधि, जिन्होंने लगभग 75 स्क्रिप्ट (कहानियां) और डायलॉग लिखे थे, वह भी लगभग 20 वर्ष तक यहां के मुख्यमंत्री रहे। इसी प्रकार एम.जी. रामचंद्रन (एम.जी.आर.) जिन्होंने 140 फिल्मों में भूमिका निभाई, ने डी.एम.के. से अलग अन्ना डी.एम.के. का गठन किया और 1977 में वह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने। इसी तरह एम.जी.आर. के साथ अधिकतर फिल्मों में भूमिका निभाने वाली अभिनेत्री जय ललिता भी तमिलनाडु की 6 बार मुख्यमंत्री बनी। विजय भी इस राज्य का एक बेहद लोकप्रिय फिल्मी अभिनेता रहा है, जिसने 2 वर्ष पहले ही अपनी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (टी.वी.के.) का अपने पिता के साथ मिलकर गठन किया और कम समय में ही वह वहां के बेहद लोकप्रिय नेता भी बन गए। राज्य के चुनाव के दौरान उनकी पार्टी ने 108 सीटें जीत कर राजनीति में एक हलचल पैदा कर दी। विगत 6 दशक से बारी-बारी से शासन कर रहीं डी.एम.के. तथा अन्ना डी.एम.के. उनके चुनाव प्रचार के आगे प्रभावहीन हो गईं। एम.के. स्टालिन जैसा धुरंधर नेता भी विजय की राजनीतिक आंधी से डावांडोल हो गया। चुनाव परिणाम की घोषणा के बाद 4 दिन तक राजनीतिक कशमकश चलती रही। तमिलनाडु की विधानसभा की 234 सीटें हैं। विजय ने दो सीटों पर जीत प्राप्त की थी। सरकार बनाने के लिए उन्हें 10 और विधायकों की ज़रूरत थी। डी.एम.के. के साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस को 5 सीटें मिली थीं, परन्तु उसके समर्थन के बाद भी बहुमत के लिए विजय को और पार्टियों के समर्थन की ज़रूरत थी।
मार्क्सवादी पार्टी तथा सी.पी.आई. के 2-2 सदस्यों के समर्थन के बाद उन्हें 2 और छोटी पार्टियों का समर्थन भी मिल गया। शपथ ग्रहण समारोह के समय विजय ने बहुत स्पष्ट शब्दों में यह कहा कि उनका प्रशासन पारदर्शी होगा और यह भी कि वह अपनी सरकार में धर्म-निरपेक्षता तथा सामाजिक न्याय को प्राथमिकता देंगे। यह भी कि जो वायदे उन्होंने किए हैं, वे हर हाल में पूरे किए जाएंगे। तमिलनाडु में बने नये राजनीतिक समीकरणों ने नि:संदेह वहां एक ऐसे नये अध्याय की शुरुआत की है, जिससे राज्य के विकास के लिए बड़ी उम्मीदें रखी जा सकती हैं।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

