शिक्षा मंत्री ने केंद्र के सामने CAN फर्टिलाइज़र का मुद्दा उठाया
शिमला, 4 सितंबर (PTI) हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के सामने कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट (CAN) फर्टिलाइज़र की कमी और राज्य में सेब उत्पादकों पर इसके बुरे असर का मुद्दा उठाया है।
यहां जारी एक बयान के मुताबिक, केंद्रीय स्वास्थ्य और रसायन एवं उर्वरक मंत्री को लिखे पत्र में ठाकुर ने बताया कि सेब उद्योग हिमाचल प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक अहम स्तंभ है। यह सालाना लगभग 6,000 करोड़ रुपये का योगदान देता है और हजारों किसान परिवारों की आजीविका का सहारा है।
उन्होंने बताया कि CAN (25 प्रतिशत) पहले सेब के बागों के लिए नाइट्रोजन का एक भरोसेमंद और सस्ता स्रोत रहा है। CAN का उत्पादन बंद होने के बाद, उत्पादक यूरिया, कैल्शियम नाइट्रेट और मिश्रित NPK फर्टिलाइज़र जैसे विकल्पों पर निर्भर रहने को मजबूर हुए हैं।
ये सेब के बागों की खास पोषक तत्वों की ज़रूरतों और इस्तेमाल के शेड्यूल के हिसाब से सही नहीं हैं या फिर काफी महंगे हैं। उन्होंने यूरिया के लंबे समय तक इस्तेमाल से जुड़ी उत्पादकों की चिंताओं पर भी ज़ोर दिया, जैसे मिट्टी का एसिडिक होना, मिट्टी की बनावट खराब होना और पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचना।
उन्होंने कहा कि किसानों ने बताया है कि सेब की खेती का दायरा बढ़ने के बावजूद सेब के पेड़ों के मरने की दर बढ़ी है और पैदावार घटी है।
उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि वह संबंधित अधिकारियों और फर्टिलाइज़र बनाने वाली कंपनियों के साथ इस मामले पर बात करे और जल्द से जल्द CAN के उत्पादन और उपलब्धता को सुनिश्चित करे।
पत्र का जवाब देते हुए, केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने रोहित ठाकुर को भरोसा दिलाया कि संबंधित विभाग इस मामले की जांच कर रहा है। बयान में कहा गया है कि उन्होंने आगे कहा कि बागवानों के हितों को ध्यान में रखते हुए ज़रूरी कदम उठाए जाएंगे।
शिक्षा मंत्री ने उम्मीद जताई कि इस मामले पर जल्द विचार किया जाएगा और सेब उत्पादकों के लिए सही और किफायती फर्टिलाइज़र की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि बागवानों के हितों की रक्षा और हिमाचल प्रदेश की सेब अर्थव्यवस्था को बनाए रखने के लिए खेती से जुड़ी ज़रूरी चीज़ों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना अहम है।

