एक विचित्र चमगादड़ है उड़न लोमड़ी
वर्ग मैमेलिया, उपवर्ग थीरिया निम्नवर्ग यूथीरिया एवं आर्डर काडरॉप्टेरा के अंतर्गत यह विचित्र चमगादड़ आता है। इसे ‘उड़न लोमड़ी’ भी कहते हैं। वैसे इसका वैज्ञानिक नाम टेरोपस मीडियस है।
इसका सिर एक लोमड़ी की तरह होता है जिसमें एक थूथन और बड़ी आंखें होती हैं। कान सामान्य प्रकार के होते हैं, पूंछ नहीं होती। शरीर पर नरम भूरी फर होती है। इसके पंख चार फुट लम्बे होते हैं। यह फलभक्षी होता है। इसको देखने पर पंखवाली लोमड़ी का आभास होता है।
यह भारत, लंका, अफ्रीका तथा आस्टे्रलिया में पाया जाता है। यह उष्णकटिबंधीय पूर्वी गोलार्ध में पाया जाने वाला बड़ा चिमगादड़ होता है। इसका थूथन लम्बा होता है। कर्णपल्लव सरल होता है। पंख की पहली और दूसरी उंगली में नखर होते हैं, इसके चर्वणकों में अनुदैर्धय खांचे होते हैं न कि तेज दन्ताग्र।
ये उड़ सकने वाले एकमात्र स्तनी हैं। इनके अप्रवाद बहुत लम्बे होते हैं। हय्मरस तथा रेडिय लम्बी होती है लेकिन अल्ला अवशेषी होती है। दूसरी से पांचवीं उंगली तक की मेटाकार्पलें एव अंगुलास्थिया बहुत लम्बी होती हैं। पटेजियक अथवा पंख नामक एक त्वचा वलन देह के पार्शव एवं टांगों से जुड़ा रहता है। जिसमें प्राय: टखने की कार्टिलेजी केलकर द्वारा आलंब बना होता है।
ये चमगादड़ें उड़ने में पंखों को उसी तरह फड़फड़ाती हैं जैसे पक्षी अपने पंख फड़फड़ाते हैं। इनकी पसलियां चपटी एवं कशेरूकों से समेकित होती हैं। उड़ान में वे अगतिशील बन जाती हैं और श्वसन डायाफ्राम द्वारा होता है। पश्चपाद दुर्बल और छोटे होते हैं। ये बाहर की ओर घूम गये होते हैं जिससे घुटने बाहर को घूम गये होते हैं। इनके पैरों में नखरयुक्त पांच उंगलियां होती हैं जिससे कि घुटने बाहर को घूम गये होते हैं।
इनके पैरों में नखरयुक्त पांच उंगलियां होती है जिनके द्वारा चमगादड़ गुफाओं, अंधेरी जगहों अथवा पेड़ों पर सिर नीचा किये हुए उल्टी लटकी रहती हैं। इसके लिए भूमि पर चलना बड़ी कठिनाई से होता है। इनकी आंखों में बहुत थोड़ी शीलाकाएं होती है। दांतों में नुकीले शिखाग्र होते हैं। सुनने एवं छूने की प्रक्रिया बहुत ज्यादा विकसित होता है।
ये रात्रिचर होते हैं एवं दिन निकलने से पहले ही गुफाओं और अंधेरे वृक्षों में भारी संख्या में अपने अड्डों पर लौट आते हैं और दिन में सिर नीचे किए हुए उल्टी लटके रहते हैं। यह चमगादड़ एक वक्त में एक बच्चे को जन्म देते हैं। बच्चा अच्छी तरह बन चुका होता है। इसके दूध के दांतों में हुक बने होते है जिनके और नखरयुक्त उंगलियों के द्वारा ये उड़ान के समय एवं आहार करते समय अपनी मां से चिपके रहते हैं। (उर्वशी)



