विचित्र जंगली जीव डकबिल


18वीं शताब्दी के अन्त में जब पहली बार डकबिल की विचित्र खाल आस्टे्रलिया से यूरोप में ले जायी गयी, लोगों में उस विचित्र प्राणी को देखने का जोश जागा जिसकी यह खाल थी। जन्तु वैज्ञानिकों के बीच भी यह एक अद्भुत बात थी। बाद में लोग इस खोज और छानबीन के लिए आस्ट्रेलिया आए। यह साबित हो गया कि यह खाल एक प्राकृतिक खाल थी और यह जन्तु तालाबों और नदियों के किनारे बने स्थानों में देखा गया था। यह जन्तु चपटी पूंछ वाला था जिसके पैरों में जाल था और शरीर पर छोटे-छोटे बाल थे। इसका मुंह बत्तख की तरह का था जिससे मिट्टी खोदी जाती थी और भोजन छाना जाता था। मादा जन्तु किनारे पर आने के बाद अण्डे देते हैं। यह विशेष जन्तु स्तनधारी वर्ग में रखा गया है। विशेषकर मुंह के आकार की वजह से यह जन्तु डकबिल अथवा डकबिल प्लेटिपस कहलाया है किन्तु बाद में यह भी पाया गया कि सब डकबिल अण्डे देते हैं। डकबिल के शरीर का तापमान कम होता है और 25-35 डिग्री सेल्सियस के बीच होता है। क्याेंकि डकबिल सरीसृपों के प्राचीन लक्षणों से मिलते-जुलते हैं इसलिए ये प्रोटोथीरिया उपवर्ग में रखे गये हैं। डकबिल में कुछ ऐसे लक्षण भी हैं जो सरीसृपों और स्तनधारियों में पाए गये हैं किन्तु यह भी प्रमाणित किया जा चुका है कि स्तनधारियों की उत्पत्ति सरीसृपों से हुई है। इस प्रकार डकबिल जैव विकास में बहुत ही महत्त्वपूर्ण जन्तु माना गया है। बाद में जीवाश्म से यह भी प्रमाणित किया गया कि प्राचीन डकबिल सारे संसार में फैला हुआ था लेकिन अब ये सिर्फ नाममात्र के लिए ही बचे हैं। ये केवल दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया एवं तस्मानिया में पाये गये हैं। इसका कारण कुछ अलग ही था। 

    - शिखा चौधरी