खाड़ी देशों में लाखों भारतीय कर रहे हैं काम, अगर युद्ध नहीं रुका तो हो सकता है भारी नुकसान
नई दिल्ली, 1 मार्च - इज़राइल-US और ईरान के बीच युद्ध जैसे हालात के कारण खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों के परिवार वालों में बेचैनी का माहौल है।
गौरतलब है कि यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) में भारतीयों की सबसे ज़्यादा आबादी है, यहाँ करीब 3.55 मिलियन भारतीय रहते हैं। दुबई, अबू धाबी और शारजाह में भारतीय समुदाय व्यापार, कंस्ट्रक्शन, हेल्थकेयर और IT सेक्टर में एक्टिव है।
इसी तरह, सऊदी अरब में करीब 2.46 मिलियन भारतीय रहते हैं। तेल, कंस्ट्रक्शन, सिक्योरिटी और सर्विस सेक्टर में भारतीयों की खास भूमिका है। युद्ध जैसे हालात बनने पर भारत सरकार यहाँ सबसे पहले चेतावनी जारी करती है। कुवैत में करीब 990,000 भारतीय रहते हैं, जिनमें से बड़ी संख्या में ब्लू-कॉलर वर्कर हैं। किसी भी क्षेत्रीय संघर्ष का सबसे पहले असर प्रवासी कामगारों पर पड़ता है। इसी तरह, कतर में करीब 8,35,000 भारतीय रहते हैं। FIFA वर्ल्ड कप के बाद भी, भारतीय वर्कफोर्स वहां अहम भूमिका निभा रही है।
खाड़ी देश बहरीन में भी करीब 323,000 भारतीय रहते हैं। यह देश साइज़ में छोटा है, लेकिन भारतीय समुदाय का वहां मज़बूत सामाजिक और आर्थिक असर है। इज़राइल में करीब 20,000 भारतीय नागरिक रहते हैं। युद्ध के समय, सिक्योरिटी एक बड़ा मुद्दा बन जाती है, और भारत सरकार बचाव प्लान पर काम करती है।
युद्ध से जूझ रहे ईरान में भी करीब 10,320 भारतीय रहते हैं। इनमें स्टूडेंट, बिज़नेसमैन और धार्मिक यात्राओं में शामिल लोग शामिल हैं। जब भी लड़ाई बढ़ती है, भारत इस इलाके पर नज़र रखता है।
इसी तरह, जॉर्डन में करीब 16,897 भारतीय नागरिक रहते हैं। यहां भारतीय मुख्य रूप से एजुकेशन, हेल्थ और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में काम करते हैं। ओमान में करीब 680,000 भारतीय रहते हैं। यह देश भारतीय प्रवासियों के लिए सुरक्षित माना जाता है, फिर भी युद्ध का इनडायरेक्ट असर यहां भी महसूस किया जा रहा है।

