ट्रम्प की थानेदारी

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा दक्षिणी (लातीनी) अमरीका के एक छोटे देश वेनेजुएला पर हमला करके वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को बंधक बना कर अमरीका ले जाने की कार्रवाई की अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कड़ी आलोचना हुई है। जहां रूस और चीन ने प्रत्यक्ष रूप से इसके लिए ट्रम्प को निशाना बनाया है, वहीं यूरोपियन संघ के ज्यादातर देशों ने भी इसकी निंदा की है और संघ के कुछ अन्य देशों ने दबे स्वर में इससे असहमति प्रकट की है। वेनेजुएला में कच्चे तेल के बड़े भंडार हैं। राष्ट्रपति मादुरो वामपंथी विचारधारा रखते हैं। उनके स्वर ज्यादातर रूस और चीन के साथ मिलते हैं। अमरीका से उनका विगत लम्बी अवधि से विरोध चलता आ रहा है। विगत वर्ष जनवरी मास में वह तीसरी बार राष्ट्रपति पद के लिए चुने गए थे। उस समय उन पर चुनावों में बड़ी हेरा-फेरी करने के आरोप लगे थे। उनके अपने देश में भी उनके विरुद्ध बहुत कठोर स्वर उठने शुरू हो गए थे।
विगत वर्ष ही उनकी विपक्षी नेता मारिया कोरीना मैचाडो को नोबल पुरस्कार दिया गया था, जिसकी वेनेजुएला सहित विश्व भर में भारी प्रशंसा हुई थी। इससे मादुरो को बड़ा नुकसान हुआ था और उसने प्रतिक्रिया-स्वरूप देश में प्रशासन को और भी कड़ा कर दिया था, जिससे उनका प्रभाव लगातार कम होता जा रहा था। इसका लाभ ट्रम्प लेना चाहते थे क्योंकि वह मादुरो की तेल नीतियों के विरुद्ध थे। मादुरो ने पद ग्रहण करते ही अपने देश में कच्चे तेल और अन्य खनिजों के स्रोतों का राष्ट्रीयकरण करना शुरू कर दिया था, जिस कारण अमरीका की बड़ी तेल कम्पनियों का काम लगभग बंद ही हो गया था। अमरीका के साथ चलते तनाव के दौरान मादुरो ने ट्रम्प के साथ बातचीत करने की इच्छा भी प्रकट की थी, जिसे ट्रम्प ने दृष्टिविगत कर दिया था। अमरीकी प्रशासन ने मादुरो पर अपराधी संगठनों और नशीले पदार्थों के व्यापारियों के साथ संबंध होने के संगीन आरोप लगा कर उन पर अमरीकी आपराधिक कार्रवाइयों संबंधी अदालतों में मामला चलाने की इजाज़त भी दी हुई थी। इन आरोपों को आधार बना कर ट्रम्प ने वेनेजुएला की घेराबंदी शुरू कर दी थी, परन्तु वह इस प्रकार वहां हमला करके देश के राष्ट्रपति को ही उठा लाएंगे, इसकी उम्मीद नहीं की जाती थी। इस कारण ही इस हमले पर विश्व भर में बड़ा आश्चर्य प्रकट किया जा रहा है।
नि:संदेह वर्ष भर से पुन: सत्ता में आए अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार तो अपनी नीतियों से विश्व भर को हिला कर रख दिया है। इस कारण आज ज्यादातर देश अमरीका से नाराज़ दिखाई दे रहे हैं। उनकी टैरिफ नीतियों ने ज्यादातर देशों को अमरीका के साथ संबंधों में दूरी पर ला खड़ा किया है। उन्होंने अपने समय में लगातार कई देशों को धमकियां दी हैं और यहां तक कि उन पर कब्ज़ा करने की भी घोषणाएं कर दी हैं। वेनेजुएला हमले के बाद उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से कहा है कि अमरीका तब तक इस देश से कब्ज़ा नहीं छोड़ेगा, जब तक यहां कोई अच्छी सरकार की स्थापना नहीं हो जाती। इसे ट्रम्प की सीधी दादागिरी समझा जा रहा है, जिस कारण ज्यादातर देशों की उनके साथ नाराज़गी और भी बढ़ सकती है। अमरीका में भी उनकी नीतियों का कड़ा विरोध होना शुरू हो गया है तथा वहां की घरेलू मंडी पर भी इनका स्पष्ट प्रभाव देखा जा सकता है।
नि:संदेह ऐसी नीतियां अमरीका के प्रभाव को भी कम करेंगी और उनके लोकतांत्रिक प्रबन्ध पर भी बड़ी आंच आएगी, जिससे इस महा-शक्ति का भविष्य भी डावांडोल दिखाई देने लगा है। ट्रम्प की ऐसी अन्तर्राष्ट्रीय थानेदारी और कितना समय चलेगी, इस संबंध में भी बड़े सवाल उठने शुरू हो गए हैं, जो अमरीका जैसे देश के लिए भारी घाटे वाली बात होगी।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

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