आज हम सभी सेवा तीर्थ में विकसित भारत के लक्ष्य के साथ प्रवेश कर रहे हैं- प्रधानमंत्री मोदी
दिल्ली, 13 फरवरी - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "आज हम सभी एक नए इतिहास को बनते देख रहे हैं। आज विक्रम संवत् 2082, फाल्गुन कृष्ण पक्ष, विजया एकादशी का महत्वपूर्ण शुभ दिन है... 13 फरवरी का यह दिन भारत की विकास यात्रा में एक नए आरंभ का साक्षी बन रहा है। हमारे शास्त्रों में विजया एकादशी का बहुत महत्व रहा है, इस दिन जिस संकल्प के साथ बढ़ते हैं उसमें विजय जरूर प्राप्त होती है। आज हम सभी भी सेवा तीर्थ में विकसित भारत के लक्ष्य के साथ प्रवेश कर रहे हैं। आजादी के बाद साउथ ब्लॉक, नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतों से देश के लिए अनेक निर्णय, नीतियां बनी लेकिन यह भी सच है कि ये इमारतें ब्रिटिश साम्राज्य के प्रतीक के तौर पर बनाई गई थी। इन इमारतों को बनाने का मकसद भारत को गुलामी की जंजीरों में जकड़े रखना था। साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतें जहां ब्रिटिश हुकूमत की सोच को लागू करने के लिए बनी थी। वहीं, आज मैं गर्व के साथ कह सकता हूं कि सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन जैसे नए परिसर भारत की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बने हैं। यहां से जो फैसले होंगे वह किसी महाराजा की सोच को नहीं 140 करोड़ देशवासियों की सोच को आगे बढ़ाने का आधार बनेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "इस बदलाव के बीच निश्चित तौर पर पुराने भवन में बिताए गए वर्षों की स्मृतियां हमारे साथ रहेंगी। अलग-अलग समय पर वहां से कई महत्वपूर्ण फैसले किए गए, वहां से देश को नई दिशा मिली है। वह परिसर, वह इमारत भारत के इतिहास का अमर हिस्सा है इसलिए हमने उस भवन को देश के लिए समर्पित म्यूजियम बनाने का फैसला किया है। 2014 में देश ने तय किया कि गुलामी की मानसिकता अब और नहीं चलेगी। हमने गुलामी की इस मानसिकता को बदलने का अभियान शुरू किया, हमने वीरों के नाम नेशनल वॉर मेमोरियल बनाया। हमने पुलिस की वीरता को सम्मान देने के लिए पुलिस स्मारक बनाया। रेस कोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग रखा गया। यह सिर्फ नाम बदलना नहीं था, यह सत्ता के मिजाज़ को सेवा की भावना में बदलने का पवित्र प्रयास था।

