परीक्षाओं की तैयारी के लिए ऐसे बनें बच्चों का मज़बूत पिलर

बोर्ड की परीक्षाएं शुरु होने वाली हैं, ऐसे में कुछ पैरेंट्स बच्चों पर बहुत ही सख्ती करना शुरु कर देते हैं। हकीकत यह है कि उन्हें सख्ती, नसीहत की ज़रूरत नहीं बल्कि पैरेंट्स के सपोर्ट की ज़रूरत होती है। यदि पैरेंट्स इन बातों का ख्याल रखेंगे तो बच्चे तो मन लगाकर पढ़ेंगे ही, परीक्षाओं को लेकर उनके मन में जो डर, तनाव और असुरक्षा का माहौल है, वह भी कम होगा। चलिए हम आपको बताते हैं कुछ ऐसे टिप्स।
मोबाइल से बनाएं दूरी
अगर हम चाहते हैं कि बच्चे मोबाइल फोन से खुद को पूरी तरह दूर करके अपनी पढ़ाई में मन लगाएं, तो उनको नसीहत देने के साथ-साथ खुद पर भी कंट्रोल करना होगा। घर के माहौल को शांत और स्टडी के अनुकूल बनाने के लिए घर में टीवी, मोबाइल और दूसरी चीजों का शोर न करें। पढ़ाई के दौरान बच्चे ही नहीं बल्कि खुद भी सोशल मीडिया से दूर रहें। जिस समय वे पढ़ाई कर रहे हों, अगर किसी का फोन आ जाए तो फोन पर संक्षिप्त बात करें। पति-पत्नी यदि आपस में फोन पर बात कर रहे हैं तो शांति और धैर्य बनाकर रखें। यह उनकी नहीं आपकी भी परीक्षा है, जिस पर बच्चे का पूरा भविष्य टिका है। इसलिए पैरेंट्स अपने आपसी मनमुटाव, झगड़े और रिश्तों के तनाव को बच्चों से दूर रखें।
उन्हें इमोशनली सपोर्ट करें
बच्चा स्टडी में अच्छा या बुरा जैसा भी परफॉर्म करता हो, उन्हें यह बताएं और जताएं कि आपको उन पर भरोसा है और वो बहुत मेहनत से पढ़ाई कर रहा है। उसे यह बताएं कि नंबर कम आ भी जाएं तो आप उस पर कोई प्रेशर नहीं डालेंगे। बच्चा सबसे ज्यादा अपने पैरेंट्स के करीब होता है। वह उनकी चिंता और सपोर्ट से बहुत मोटीवेट होता है। अगर पैरेंट्स उसे इमोशनली सपोर्ट करेंगे तो वह भी आत्मविश्वास से अपनी पढ़ाई करेगा और अच्छे नंबर से पास होगा। याद रखें, अगर पैरेंट्स के हाथ पैर ढीले हो जाते हैं यानी वो अपने को खुद ही बच्चों की परीक्षा के समय टेंशन में रखते हैं तो इससे बच्चे भी नवर्स हो जाते हैं। इसलिए बच्चों को शांति और धैर्य से मन लगाकर पढ़ने के लिए मोटीवेट करें। 
बच्चे का उत्साह बढ़ाएं
अगर बच्चे की परीक्षा की तैयारी में कमी है तो हो सकता है उसे इसकी टेंशन हो। अगर उसका कोर्स काफी पढ़ने के लिए रहता हो और उसे समय पर पूरा करने में उसे परेशानी हो तो इसके बारे में उससे बात करें। यदि पैरेंट्स उसे पढ़ा सकते हैं तो बच्चे की मदद करें। उसे समझाएं कि यह महज एग्जाम है और आप एग्जाम के अच्छे या बुरे नतीजे दोनों में उसके साथ हैं। अगर उसके पास रिविजन करने का समय नहीं है, तो उसे कहें कि मेन-मेन प्वाइंट्स को ही अच्छे से पढ़कर उसके कॉन्सेप्ट को समझ लें। इससे उसके भीतर नवर्सनेस कम होती है। बच्चे की तैयारी कैसी भी हो, उसे उत्साहित करें। तुम कर सकते हों, तुममें कैलिबर है, तुमने अच्छी तैयारी की है, देखना सब ठीक होगा, जैसी बातों से उसका हौसला बढ़ाएं।
बच्चे की तुलना दूसरों से न करें
जीवन के किसी भी पहलू में अपने बच्चे की दूसरे बच्चे से तुलना करना, बच्चे को मानसिक रूप से आहत करता है। यहां तक कि अपने सगे भाई या बहन से तुलना करना भी गलत है। अपने बच्चे की न तो आलोचना सही है, न ही उसकी ज्यादा तारीफ करना। ज्यादा तारीफ करने से वह ओवर कॉन्फिडेंट हो जाता है और पढ़ना, मेहनत करना ज्यादा ज़रूरी नहीं समझता। दूसरे बच्चों से तुलना करने पर उसका आत्मविश्वास कमजोर पड़ता है और उसे लगने लगता है कि वह उनकी बराबरी नहीं कर सकता। 
उसे एंज्वॉय करने दें
बच्चाें की परीक्षा पैरेंट्स की भी परीक्षा होती है। इसके लिए पैरेंट्स को भी अनुशासन में रहना होता है। फोन पर दूसरों से बातचीत या सोशल मीडिया पर रील्स देखने में बिजी रहने और बीच-बीच में बच्चे को जाकर पढ़ाई करने के लिए कहने से बच्चे डाइवर्ट होता है। जिस दौरान वह पढ़ाई कर रहा हो, आप भी उसके साथ हल्की-फुल्की बातचीत करें। उसके जीवन अनुभवों को सुनें, उसे हंसाने के लिए जोक्स सुनाएं। बीच में ब्रेक लेकर अगर वह कुछ अपने मन की कोई एक्टिविटी करना चाहता है तो उसे मौका दें। अगर वह शारीरिक और मानसिक रूप से खुद को थका हुआ महसूस कर रहा हो तो उसे पढ़ने के लिए मजबूर न करें बल्कि उसे आराम करने दें।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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