अपने बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार करें

जीवन में सदैव सकारात्मक सोच का होना नितान्त आवश्यक है। सकारात्मक सोच से ही जीवन में अनुशासन व आदर्श संस्कारों का आगमन होता हैं। संस्कारित व्यक्ति ही समाज व राष्ट्र को एक नई दशा व दिशा प्रदान कर सकता हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को केवल किताबी ज्ञान ही न दें अपितु उन्हें संस्कारवान व चरित्रवान भी बनायें। इसी के साथ ही साथ वे बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार करें तभी बच्चे आपको बिना हिचक अपने दिल की बात बताकर हर समस्या का समाधान समय पर निकाल कर अपनी शंकाओं का समाधान कर अपनी मंजिल को हासिल कर सकतें है।
बच्चे तो बच्चे ही होते हैं और वे कितने भी बड़े क्यों न हो जाये वे आपके सामने बच्चे ही रहेंगे। अत: उनकी भावनाओं का मान-सम्मान करें और कभी कोई बात में शंका लगा तो आपसी सलाह व मशविरा कर कोई सर्वमान्य हल निकालें। जब आप बच्चों से मित्रवत व्यवहार करेंगे तो वह आपसे कोई बात नही छिपायेगा।
जीवन में अंहकार का त्याग कर करें और अंहकार व घमंड को कभी भी न पनपने दे। ये आदर्श व्यक्तित्व की महक को कमजोर करते हैं और हमारे यश व प्रतिष्ठा को खराब करते हैं जीवन में वहीं करें जिसके लिए हमारा दिल व दिमाग अनुमति दे। भूलकर भी जीवन में झूठ का सहारा न ले चूंकि झूठ से सदैव नुकसान आपका ही होगा। जीवन में हमेशा अच्छा सोचें, अच्छा बोले व अच्छा लिखें। तभी लोग आपके कार्यों की सर्वत्र प्रशंसा करेंगे और नये संबंधों का लाभ मिलेगा।
अपने से बड़ों की राय ज़रुरत पड़ने पर अवश्य ही लीजिए चूंकि अपने से बड़ों की राय आपको सफलता के रास्ते दिखाएगी। जीवन में मौन व्रत सबसे बडा व्रत हैं। इसलिए न तो कभी किसी को बिना मांगे राय दे और न ही किसी के मामले में अनावश्यक टांग अड़ाये। चूंकि आपकी मनमानी से नुकसान आपका ही होगा। अत: ऐसा करने से बचें।
अगर आप अपने कार्यों को पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ सुचारु रूप से करें तो इस मेहनत से आपका भाग्य बदल जायेगा और समय रहते कार्य भी पूरा हो जायेगा। समाज में वही व्यक्ति श्रेष्ठ हैं जो अपनी मंजिल को हासिल करने के लिए सदैव प्रयासरत रहते हैं। इस जीवन में उतार-चढ़ाव आते ही रहते हैं लेकिन हमें कभी भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए अपितु उत्साह व उमंग के साथ आगे बढ़ना चाहिए एक न एक दिन आपको सफलता अवश्य ही मिलेगी और आपके कदमों को चूमेगी। 
(सुमन सागर)

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