रायचन्दों का स्वर्णिम युग
अपना देश अजब गजब नमुनो से भरा हुआ देश है। एक से एक रायचन्द नमूने देखने को मिलते हैं। कुछ नमुने ऐसे होते है कि करना-धरना कुछ नहीं होता है, लेकिन उन्हें कहना बहुत कुछ होता है। देश में भले ही हजारों समस्याएं हैं। महंगाई, बेरोज़गारी, ट्रैफिक, भ्रष्टाचार लेकिन इससे भी बड़ी समस्या रायचंद है। यह जहां भी होते हैं एक नई समस्या खड़ी कर देते हैं।
और इन रायचंदो की सबसे बड़ी खूबी यह होती है कि हर एक मामले के विशेषज्ञ होते हैं। चाहे विषय राजनीति हो, क्रिकेट हो, शादी ब्याह हो या पड़ोसी की बहू का स्वभाव हो या पड़ोसी देश हो सब पर निर्बाध रूप से अपना ज्ञान बांटते हैं।
भले ही घर में उनकी इज्जत दो कौड़ी की नहीं हो। बच्चे सुनते नहीं हो। पत्नी भाव नहीं देती हो, लेकिन बात लाखों की करते हैं।
रायचंदो की उपस्थिति हर जगह होती है। ऑफिस, घर, गली-मोहल्ले, सोशल मीडिया तो इनका मुख्यालय है। जिस पर दिनभर अपने जैसे लोगों के साथ मिलकर हुआ-हुआ करते रहते हैं।
यहां पर यह अपनी राय ऐसे परोसते हैं। जैसे देश की नीतियां इन्हीं के इशारों पर तय होनी है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री, गृह मंत्री को ऐसे सलाह देते हैं कि बिना इनके सलाह के वह लोग कुछ कर ही नहीं सकते हैं। विदेश नीति पर राय देना तो उनके बाएं हाथ का खेल रहता है। रायचंद्रों का आत्मविश्वास इतना अधिक होता है कि अगर कोई उनसे असहमत हो जाए। तो वह सामने वाले को पल भर में अज्ञानी साबित करने पर उतारू हो जाते हैं।
और किसी भी ऑफिस में चले जाइए रायचंदो की भरमार होती है। कोई अपना काम चुपचाप कर रहा हो तब भी यह अपनी राय ज़रूर बताएंगे कि यह प्रेजेंटेशन ऐसे नहीं ऐसी होनी चाहिए।
रायचंदों की सबसे बड़ी और अनोखी खूबियां होती है कि यह अपनी सलाह पर कभी खुद अमल नहीं करते हैं।
यह दूसरों को बताते हैं कि पैसे कैसे बचाने चाहिए, लेकिन महीने के आखिरी में यह खुद लोगों से उधार मांगते नज़र आते हैं।
यह रिश्ते निभाने का ज्ञान देंगे लेकिन खुद के सारे रिश्तेदारों से दुश्मनी मोल लिए बैठे रहेंगे। रायचंद की महान प्रजाति बिना बुलाए आते हैं। बिना रुके बोलते हैं। और बिना असर की चिंता किए लोगों को सलाह देते हैं।



