स्वस्थ समाज के लिए सुरक्षित खाद्य पदार्थ अति महत्वपूर्ण
आज के लिए विशेष
संयुक्त राष्ट्र द्वारा 7 जून को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने विश्व स्वास्थ्य संगठन और खाद्य और कृषि संगठन को खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देने की ज़िम्मेदारी दी है। विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 2026 का विषय ‘बोझ से समाधान तक—हर जगह सुरक्षित भोजन’ है। यह दिवस सुरक्षित, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन के महत्व को रेखांकित करते हुए खाद्य जनित बीमारियों की रोकथाम, वैश्विक सहयोग और खाद्य सुरक्षा प्रणालियों को मज़बूत बनाने पर ज़ोर देता है। यह दिन अब रश्मि होता जा रहा है। ढोल नगाढ़ा पीटने से न गरीबी दूर होगी और न हीं भूखे को खाना मिलेगा। यह हमारी जमीनी सच्चाई है जिसे स्वीकारना ही होगा।
मानव जीवन के लिए खाद्य पदार्थों की सुरक्षा अति महत्वपूर्ण है। लोगों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन का प्रकृति प्रदत अधिकार है। राज्य का दायित्व है कि प्रकृति की ओर से प्रदान किए गए अधिकारों का संरक्षण और संवर्धन करे। खाद्य सुरक्षा का अधिकार भी इसमें शामिल है। वैश्विक आंकड़ों के अनुसार हर वर्ष लगभग 60 करोड़ लोग असुरक्षित व मिलावटी भोजन के कारण बीमार पड़ते हैं, जबकि करीब 4.2 लाख लोगों की मृत्यु खाद्य जनित बीमारियों से जुड़ी मानी जाती है। इनमें पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चे सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं। असुरक्षित व मिलावटी भोजन न केवल स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि आर्थिक उत्पादकता और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी गंभीर दबाव डालता है। विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस हम ऐसे समय में मनाने जा रहे है जब भारत भूख और गरीबी के दल दल से बाहर निकलने के लिए निरंतर प्रयासरत है। खाद्य सुरक्षा दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य पूरी दुनिया में विशेष रूप से संकट के समय खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देना है। भारत सहित दुनिय के अनेक देशों ने संकट में अपने ज़रूरतमंद देशवासियों की मदद के लिए हाथ बंटाया है, मगर यह नाकाफी है।
खाद्य पदार्थ की बर्बादी भी प्रमुख समस्या बन गई है। दुनिया भर में सभी खाद्य पदार्थों का लगभग 50 प्रतिशत बर्बाद हो जाता है और कभी भी ज़रूरतमंदों तक नहीं पहुंचता है। मानव उपभोग के लिए लगभग एक तिहाई भोजन विश्व स्तर पर बर्बाद हो जाता है। दुनिया में लाखों लोग भूखे पेट सोने को मजबूर है या आधा पेट खाकर जीवन जीते हैं, वही कुछ ऐसे भी लोग हैं जो बहुत सारा भोजन बर्बाद कर देते हैं। विकासशील देशों में सबसे अधिक अन्न सही रख-रखाव न हो पाने के कारण भी बर्बाद हो जाता हैं जो बेहद चिंतनीय है।
सुरक्षित एवं मिलावट रहित भोजन के प्रति हम सबको जागरूक होना चाहिए और दूसरों को भी जागरूक करना चाहिए ताकि एक सशक्त समाज और देश का निर्माण हो सके।
खाने की बर्बादी और मिलावटी भोजन को लेकर दुनियाभर में चिंता व्यक्त की जा रही है। यही भोजन यदि गरीबों को सुलभ कराया जाये तो भूखे पेट सोने वालों की संख्या में कमी आएगी। भारत भी खाना बर्बाद करने तथा मिलावटी खाद्य पदार्थों वाले देशों में शामिल है। संयक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने खाने की बर्बादी और मिलावट को लेकर डराने वाले आंकड़े जारी किए। इसके मुताबिक भारत में हर साल प्रति व्यक्ति 50 किलो खाने की बर्बादी हो रही है।
रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा खाना लोग अपने घरों के भीतर बर्बाद करते हैं। वे ज़रूरत से ज्यादा खाना बनाकर फिर बचे खाने को फैंकते संकोच नहीं करते। होटलों और खाने-पीने के दूसरे स्थान भी इस कार्य में आगे है। खुदरा दुकानदार भी अनाज का ठीक से भंडारण नहीं कर पाते और खराब होने पर उसे फेंकना पड़ जाता है। आपने कई बार सुना होगा कि लोग अपना खाना बर्बाद करते हैं या आपने अपने घर में सुना होगा किए आपके माता-पिता हमेशा आपको खाने को बर्बादी न करने की सलाह देते हैं, क्योंकि वे बखूबी समझते है कि खाना उनके लिए क्या माइने रखता है। ढोल नगाड़ा पीटने से न खाद्य सुरक्षा होगी और न हीं भूखे को खाना मिलेगा। यह हमारी जमीनी सच्चाई है जिसे स्वीकारना ही होगा।
-मो. 94144-41218



