पैसे की दौड़ में उलझ गया है मनुष्य

आज समाज में पैसे की होड़ इतनी बढ़ गई है कि लोग हर हाल में पैसा कमाना चाहते हैं, चाहे वह गलत तरीके से ही क्यों न कमाया जाए। पुराने समय में चाहे ऐशो-आराम के साधन सीमित थे, लेकिन पैसे के लिए अंधी दौड़ नहीं थी। लोग मेहनत करके पूरे परिवार का पेट भरते थे और एक-दूसरे को नीचा भी नहीं दिखाया जाता था। लोग एक-दूसरे का सम्मान करते थे और ज़रूरत पड़ने पर पैसों से ज़रूरतमंदों की मदद भी कर देते थे। इसके लिए कोई एहसान भी नहीं जताते थे। लेकिन आजकल किसी की मदद करना तो दूर, किसी के पास बातचीत करने या हाल पूछने तक का समय नहीं है। अगर किसी रिश्तेदारी में कोई अप्रिय घटना घटित हो जाए तो लोग मोबाइल पर दुख साझा कर हैं। लोगों के पास किसी के दुख में शामिल होने का समय तक नहीं है, अब हमारी सुविधा के लिए बना मोबाइल अलादीन का चिराग बन गया है।
पहले घरों में छोटे बच्चे बुज़ुर्गों के साथ अधिक समय व्यतीत थे। बुज़ुर्ग उन्हें अच्छी बातें सुनाते थे और अच्छी आदतें सिखाते थे। आजकल तो माता-पिता के पास अपने ही बच्चों के लिए समय नहीं है, वे सुबह घर से निकलते हैं और शाम को लौटते हैं। माता-पिता के पास बच्चों की तोतली बातें सुनने का समय नहीं है। अगर हो भी तो बच्चों के साथ हंसने-खेलने के बजाय उन्हें मोबाइल थमा देते हैं। आजकल बच्चों का अधिक समय मोबाइल पर व्यतीत होता है। इसलिए वे घर से बाहर खेलने नहीं जाते। वे स्कूल से घर आकर मोबाइल पर गेम खेलना शुरू कर देते हैं। लोगों में सब्र, संतोष, विनम्रता और आपसी प्यार खत्म हो गया है। लोग बिना वजह संकीर्ण सोच और दूसरों के प्रति मन में ईर्ष्या रख कर अवसाद का शिकार हो रहे हैं। अगर मोहल्ले में किसी सम्पन्न परिवार के पास बड़ा घर, कार या अन्य सुविधाएं हैं, तो बहुत-से लोगों के मन में ईर्ष्या के कारण उसके लिए नकारात्मक भाव पैदा होने लगते हैं। पहले अक्सर ‘चादर देखकर पांव फैलाने’ की सलाह दी जाती थी, लेकिन आजकल लोग एक-दूसरे को देख अपनी वित्तीय हैसियत से ज़्यादा खर्च करके कज़र्दार हो रहे हैं। छोटे-छोटे बच्चे तनावग्रस्त होने लगे हैं, वे किसी के साथ मन की बात साझा नहीं करते। 
समय बहुत कीमती है, परमात्मा की कृपा से आपको घर-परिवार मिला है। अपने बच्चों, माता-पिता और परिवार को समय ज़रूर दें। उनके साथ जीवन के सुख-दुख साझा करें, एक साथ बैठकर भोजन करें। बुज़ुर्गों के पास जीवन का अनुभव होता है। उनके अनुभव का फायदा उठाएं। हमारे बुज़ुर्ग अपना अंतिम समय वृद्धाश्रमों में व्यतीत कर रहे हैं। यह हमारे समाज की त्रासदी है। आज लोग जंक फूड के आदी होकर लाइलाज बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। ज़्यादातर लोगों की सुबह खाली पेट दवा खाकर शुरू होती है। मधुमेह, बीपी तथा न जाने कितनी अन्य बीमारियां कम उम्र के युवाओं और बच्चों को भी घेर रही हैं। रात को देर से सोने की वजह से लोग सुबह समय पर नहीं उठ पाते। सुबह की सैर के लिए बहुत कम लोग घर से निकलते हैं। लोगों में गर्मी और सर्दी बर्दाश्त करने की क्षमता तक नहीं रही। हर इंसान लोगों के सामने सुंदर दिखना चाहता है। कोई पतला होने की तथा कोई मोटा होने की दवा खा रहा है।  समाज में पैसे की दौड़ ने रिश्तों को खत्म कर दिया है, हर कोई रातों-रात अमीर बनना चाहता है। लेकिन एक बात याद रखने वाली है कि गलत तरीके से कमाए गए पैसे और प्रकृति से छेड़छाड़ के नतीजे बहुत बुरे होते हैं। इंसान ने पहाड़ी क्षेत्रों में नदियों और नालों के प्राकृतिक बहाव को रोक कर वहां घर और होटल बनाकर प्राकृतिक वातावरण के संतुलन को बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी। खाद्य पदार्थों में मिलावट इतनी बढ़ गई है कि आज हमें कोई भी चीज़ बिना मिलावट के नहीं मिलती।

-मो. 78889-66168

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