आयात पर निर्भरता कम करने हेतु 100 उत्पाद होंगे चिन्हित
आयात निर्भरता कम करने की दिशा में भारत सरकार ने ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। देश में आयात में निरन्तर बढ़ोतरी हो रही है तो इलेक्ट्रानिक उत्पादों का आयात 100 अरब डॉलर के आंकड़े को भी पहलीबार पार कर गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राष्ट्र प्रथम, मेक इन इंडिया और वोकल फॉर लोकल को केवल जुमला के स्थान पर धरातल पर उतारने को कटिबद्ध हो गए हैं। पिछले दिनों देश में 100 सर्वाधिक आयात होने वाले उत्पादों को चिन्हित कर उनका देश में ही उत्पादन बढ़ाने की दिशा में ठोस प्रयास शुरू किये गये हैं। उद्योग एवं व्यापार संवर्धन विभाग के सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन कर 3 सप्ताह में सरकार को रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। इसके लिए 6 क्षेत्र विशेष कार्य समूह का गठन किया गया है। समिति द्वारा एक मोटे अनुमान के अनुसर 500 आयात होने वाले प्रमुख उत्पादों का अध्ययन किया जाएगा और इनमें से पहले चरण में 100 उत्पादों का चयन किया जाएगा। इन 100 उत्पादों का उत्पादन देश में ही बढ़ाया जाएगा ताकि विदेश से आयात पर निर्भरता कम हो सके।
दरअसल देश में 2025-26 में 7.5 प्रतिशत विकास के साथ 775 अरब अमरीकी डॉलर के उत्पाद आयात हुए हैं। इनमें भी 18 प्रतिशत की विकास दर के साथ सर्वाधिक 116 अरब डॉलर के इलेक्ट्रानिक उत्पाद आयात किये गये हैं। देश में प्रमुखत: 6 क्षेत्रों में आयात हो रहा है। इनमें फार्मास्यूटिकल, बायोटेक, मेडिकल क्षेत्र, रसायन और पेट्रोकेमिकल, कपड़े, जूते आदि सेक्टर, ऑटोमोबाइल, इलैक्ट्रिक वाहन और पूजीगत सामान का आयात सेक्टर, उर्जा क्षेत्र, निर्माण और संरचना क्षेत्र और रक्षा, एयरोस्पेस, इलेक्ट्रानिक्स आदि सेक्टर है। यह समिति इन सेक्टरों के 500 प्रमुख उत्पादों में से 100 उत्पाद चिन्हित करेंगी, जिनका उत्पादन देश में बढ़ाया जा सके और आयात में निर्भरता को कम किया जा सके। समिति ने काम आरंभ कर दिया है। इसका मतलब यह है कि सरकार सर्वाधिक आयात होने वाले 100 उत्पादों का उत्पादन देश में ही बढ़ाने के लिए संकल्पित है।
दरअसल प्रधानमंत्री वोकल फॉर लोकल की बात हवा में नहीं करते रहे हैं। मेक इन इंडिया और इसकी ब्रांडिंग की बात भी हवाहवाई न होकर इसके पीछे आयात को कम करने और भारतीय उत्पादों की विदेशों में पहचान बनाने और बाज़ार विकसित करने में हैं। इसी दिशा में बढ़ता एक कदम सरकार को एक ज़िला एक उत्पाद कार्यक्रम है। एक बात तो यहां साफ हो जानी चाहिए कि भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता और अलग पहचान रही है। आगे भी इसके लिए ठोस प्रयास करने होंगे। दूसरी यह कि आयात का सीधा अर्थ है कि इन उत्पादों की हमारे देश में काफी मांग है और इस मांग की पूर्ति नहीं हो पर रही है और विदेशों से आयात पर निर्भरता बनी हुई है। ऐसे में योजनाबद्ध तरीके से आयात घटाने, स्थानीय आवश्यकता की देश में ही आपूर्ति सुनिश्चित करने और निर्यात बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाने की आवश्यकता है और सरकार के इन प्रयासों में यही परिलक्षित हो रहा है।
किसी भी देश के आर्थिक स्वास्थ्य के लिए आयात पर निर्भरता कम होनी चाहिए। देश में ही उत्पादन होने लगता है तो एक और विदेशी मुद्रा की बचत होती है, तो दूसरी और देश में ही रोज़गार, निवेश और सरकारी राजस्व के साथ ही इकोनोमी का बूस्ट मिलता है। केन्द्र सरकार ने देश में ही उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन योजना सहित अनेक कदम उठाने जा रही है। इसे इस दृष्टि से शुभ संकेत व सरकार की गंभीरता के रूप में समझा जा सकता है। केन्द्र सरकार ने देश में ही उत्पादन बढ़ाने के लिए पीएलआई यानी प्रोडक्शन लिंक्ड इनिशिएटिव योजना लागू की है। इसमें इलेक्ट्रानिक्स, फार्मा, ऑटोमोबाइल, रसायन सहित 14 प्रमुख क्षेत्रों को प्रोडक्शन लिंक्ड इनिशिएटिव के दायरें में लाया गया है।
देश को आर्थिक दृष्टि से सशक्त राष्ट्र बनाने के लिए आयात पर निर्भरता तो कम करनी ही होगी। आज विदेशी के नाम पर देशवासियों खासतौर से अमीर लोगों की खरीद की प्रवृति को भी बदलने की आवश्यकता है। माना जाना चाहिए कि उद्योग सचिव की समिति द्वारा 100 उत्पादों के चिन्हिकरण और ठोस योजना के साथ रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी और सरकार द्वारा भी कमेटी की सिफारिशों के अनुसार चिन्हित 100 उत्पादों के उत्पादन बढ़ाने की खासतौर से स्थानीय मांग की पूर्ति की कार्ययोजना बनाकर क्रियान्वयन करना होगा। इसके लिए किसी भी तरह का सहयोग की आवश्यकता हो तो सरकार को खुले दिल से आगे आना होगा। इससे सबसे बड़ा लाभ स्थानीय स्तर पर रोज़गार के अवसर उपलब्ध होंगे। यहां के युवा व्यवसायी बनेंगे, बाज़ार में संभावनाएं विकसित होंगी और आर्थिकता को गति मिलेगी।
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