भारत का वर्षों पुराना रिश्ता है इंडोनेशिया के साथ
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी तीन दिवसीय इंडोनेशिया की यात्रा के बाद ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड भी जाएंगे। पहले चरण में उनकी इंडोनेशिया की यात्रा इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि दक्षिण पूर्वी एशिया का यह देश भारत और प्रशांत महासागर के साथ जुड़ता है। समुद्र मार्ग से नज़दीक होने के कारण इसकी भारत के साथ सांझ और संबंध सैकड़ों वर्षों से बने रहे हैं। इसलिए इस देश में अनेक मंदिर हैं। यहां बनाया गया एक बड़ा ऐतिहासिक मंदिर हज़ार वर्ष पुराना माना जाता है। नरेन्द्र मोदी ने अपने दौरे के दौरान इस पुरातन मंदिर की भी यात्रा की है।
इंडोनेशिया हज़ारों ही द्वीपों वाला देश है, परन्तु इसकी ज्यादा जनसंख्या कुछ एक द्वीपों तक ही सिमटी हुई है। बाली नामक एक सुंदर द्वीप में हिन्दू धर्म को मानने वालों की बहुसंख्या है। वैसे 29 करोड़ से भी अधिक जनसंख्या वाला यह देश विश्व भर में मुस्लिम बहुसंख्या वाला देश माना जाता है। हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में विगत लम्बी अवधि से चीन ने अपनी विस्तारवादी नीतियां जारी रखी हुई हैं, जो दक्षिण-पूर्वी एशिया के कई देशों के लिए बड़ी चिंता का कारण बनी हुई हैं, क्योंकि विश्व भर के देश हिन्द-प्रशांत क्षेत्र को अंतर्राष्ट्रीय आवागमन के लिए एक महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्ग समझते हैं, जिसके बड़े क्षेत्र पर अब चीन अपना अधिकार जता रहा है। यही कारण है कि इस समुद्री क्षेत्र के साथ लगते देश वियतनाम, मलेशिया, फिलपाइन, थाइलैंड, कम्बोडिया चीन से भयभीत होकर भारत की ओर देखते रहे हैं। इससे पहले जापान की प्रधानमंत्री ने भी भारत का दौरा किया था। उस समय भी इस क्षेत्र संबंधी चर्चा होती रही थी। प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया की संसद में सम्बोधित करते हुए अपने ऐतिहासिक भाषण में यह कहा है कि भारत एक स्वतंत्र और खुले हिन्द-प्रशांत का समर्थक है और वह यहां समुद्री आवागमन के लिए अंतर्राष्ट्रीय नियमों का सम्मान करता है और सभी देशों की इस अंतर्राष्ट्रीय मार्ग में भागीदारी मानता है। हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए एशिया-प्रशांत देशों की केन्द्रीय भूमिका होनी चाहिए। दोनों देशों के बीच नरेन्द्र मोदी की यात्रा के दौरान 20 समझौते हुए हैं, जिनमें भारत में बनी हुई सुपरसोनिक ‘ब्रह्मोस’ और हवा से हवा में मार करने वाली ‘अस्त्र’ मिसाइलों का समझौता भी शामिल है। अपने समुद्री व्यापार के मार्ग को बढ़ाने और मज़बूत करने के लिए भारत और इंडोनेशिया की साबांग बंदरगाह का विकास भी करेंगे। यह बंदरगाह भारत के ग्रेट निकोबार से मात्र सौ किलोमीटर की दूरी पर है।
इसके अतिरिक्त इंडोनेशिया में ज्यादातर बड़े खनिज भंडार हैं, जिनका भारत से आदान-प्रदान बेहद महत्त्वपूर्ण होगा। दोनों देशों ने आपसी व्यापार और नागरिकों के निर्विघ्न आवागमन संबंधी भी समझौते किए गए हैं। दिल्ली से तीन देशों इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड की यात्रा पर जाने के दौरान प्रधानमंत्री ने ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ जिसमें महासागर की सुरक्षा और विकास की योजनाएं शामिल हैं, की भी बात की थी। यह नीति मुख्य रूप से खुले हिन्द-प्रशांत के लिए भारत के दृष्टिकोण को और भी मज़बूत करती है। तीन देशों की यह यात्रा भारत के विश्व के महत्त्वपूर्ण देशों के साथ बढ़ते सहयोग को और भी मज़बूत करने में सहायक हो सकेगी।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

