सबका साथ-सबका विकास

एक तरफ भारत और पाकिस्तान में दूरियां इस कारण बढ़ गई हैं क्योंकि पाकिस्तान भारत को अपने पोषित आतंकवादियों द्वारा लगातार रक्त-रंजित करने में कोई कमी नहीं छोड़ रहा। वहां के सैन्य तानाशाह ज़िया-उल-हक के समय से आतंकवादी संगठनों को पोषित करके भारत को रक्त-रंजित करने की नीति चलती आ रही है, जिसने दोनों देशों में आपसी घृणा और दुश्मनी को ही जन्म दिया है। दूसरी तरफ भारत में वर्ष 2014 से केन्द्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एन.डी.ए.) की सरकार चला रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अब तक आज़ाद भारत के सभी प्रधानमंत्रियों में से लम्बी अवधि तक शासन करने का रिकार्ड स्थापित किया है। नरेन्द्र मोदी शुरू से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के साथ जुड़े रहे हैं, इसलिए यही प्रभाव बना रहा है कि वह संघ के राष्ट्रीय एजेंडे को देश में प्रत्येक पक्ष से लागू करने के इच्छुक हैं।
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और जम्मू-कश्मीर में धारा 370 को खत्म करने में सफल होने के उपरांत उनके संबंध में संघ की विचारधारा को क्रियात्मक रूप देने वाले नेता होने का प्रभाव और भी बढ़ गया है। राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस और कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण राजनीतिक दल उनकी इस पक्ष से कड़ी आलोचना भी करते रहे हैं, परन्तु पिछले कुछ समय से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेताओं द्वारा इस तरह के बयान सामने आए हैं जिनसे कुछ ढाढस ज़रूर बंधा है। इनमें स्वयं सेवक संघ सर-संघ-चालक मोहन भागवत और संगठन के प्रमुख पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबोले शामिल हैं। मोहन भागवत ने एक बयान में कहा कि समाज में पहले वर्ण विभाजन एक व्यवस्था थी परन्तु  बाद में इस आधार पर भेदभाव शुरू हो गए, जो गलत हैं। भेदभाव धर्म और समाज का नुकसान करता है। उन्होंने कहा कि भगत सिंह और चन्द्र शेखर आज़ाद सभी बनना चाहते हैं परन्तु दाऊद कोई नहीं बनना चाहता। जो किसी शख्सियत जैसा बनने का यत्न करता है, उसे उस जैसा आचार-व्यवहार भी रखना पड़ेगा। ऐसे ही विचार दत्तात्रेय होसबोले ने प्रकट किए हैं और कहा है कि भारत और पाकिस्तान का विभाजन ऐतिहासिक रूप से नकली आधार पर हुआ है और यह भी कि उन देशों के साथ अपने संबंध कैसे बेहतर बनाए जा सकते हैं, जो ऐतिहासिक और भूगोलिक रूप से हमारे साथ जुड़े हुए हैं। यह विचार-विमर्श करने का मामला है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी होसबोले के उस बयान पर मोहर लगाई है, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के साथ बातचीत की सम्भावना पैदा करने का समर्थन किया था। इस बात को आगे बढ़ाते भागवत ने यह कहा है कि पाकिस्तान में ज्यादातर लोग ऐसे हैं, जो देश के विभाजन को गलत मानते रहे हैं। ऐसे लोग दो राष्ट्र के सिद्धांत के विरुद्ध हैं और उनका कहना है कि एकजुट रहना ही बेहतर था। इसी क्रम को ही आगे बढ़ाते हुए केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी जो राष्ट्रीय स्वयं संघ के निकट माने जाते हैं, ने नागपुर में कहा है कि भारतीय जनता पार्टी किसी भी समुदाय के विरुद्ध नहीं है और सभी  समुदायों, धर्मों और जातियों के लोगों को साथ लेकर चलना चाहती है। भारत सिर्फ हिन्दू देश नहीं है, अपितु सभी भारतीयों का साझा देश है।
उन्होंने यह भी कहा कि विभाजन के समय दो देश भारत और पाकिस्तान बनाए गए। इनके इतिहास को  देखा जाए तो हम सभी इस विभाजन के परिणामों को भुगत रहे हैं। राष्ट्र उत्तम है और राष्ट्रवाद हमारा सभी का साझा विश्वास है। हम सभी आपस में साझ रखते हैं और हमारे देश में कोई मस्जिद में जाता है, कोई बुद्ध विहार में जाता है और कोई गुरुद्वारा में जाता है, परन्तु फिर भी हम सभी एक हैं। हम भारतीय हैं, हमारा सभ्याचार, इतिहास और विरासत सभी साझे हैं। चाहे हमारी भक्ति और अरदास अलग-अलग हैं। हम यह मानते हैं कि हमारा संविधान प्रत्येक को एक जैसा अधिकार देता है। हमारा देश किसी भी जाति, समुदाय या धर्म के लोगों के लिए समान है। हम नितिन गडकरी के इन विचारों पर सन्तोष प्रकट करते हैं, जिन्होंने पहले भी कभी किसी तरह की साम्प्रदायिक सोच या क्रियान्वयन का दिखावा नहीं किया। यदि देश के बहुसंख्यक नेता ऐसी सोच वाले बन जाएं तो देश प्रत्येक पक्ष से विकास के मार्ग पर अपनी निरन्तर चाल जारी रखने में समर्थ हो सकेगा।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

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