बढ़ रहे साइबर अपराध सावधान रहने की ज़रूरत

देश में डिजीटल बैंकिंग फ्राड अथवा एस.एम.एस. स्कैम के ज़रिये लूट और ठगी के मामलों में हाल ही में हुई भारी वृद्धि ने देश भर के जन-सामान्य को एक बार चिंतित किया है। डिजीटल एवं बैंकों से जुड़े साइबर अपराधों की जानकारी रखने वाली एक संस्था डिजीटल बैंकिंग फ्राड ट्रेंड्स इन इंडिया-2026 की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026 में पिछले वर्ष के मुकाबले ऐसे मामलों में 146 प्रतिशत के हिसाब से वृद्धि हुई है। यह स्थिति कितनी गम्भीर हो गई है, इसका अनुमान इस एक तथ्य से भी लगाया जा सकता है कि चालू वर्ष में इस प्रकार के अपराधों से डिजीटल लुटेरों ने 22 हज़ार करोड़ रुपये की ठगी जन-साधारण के साथ की है। डिजीटल ठगी से जुड़े ठगों का दायरा इतना व्यापक हो गया है कि अब इनका संचालन विदेशों से नहीं, अपने देश से होने लगा है, और यह भी कि इनके सम्पर्क अन्तर्राज्यीय हो गये हैं, और देश के प्राय: हर राज्य में इनके अड्डे मौजूद हैं। अब डिजीटल ठग अपने शिकार से प्राप्त धन को तत्काल दूसरे राज्यों के अपने स्रोतों को भेज देते हैं जिससे ठगी के स्रोत की तलाश और ठगे गये धन की वापिसी की प्रक्रिया कठिन जैसी हो जाती है। इससे पूर्व इन ठग गिरोहों के बड़े सम्पर्क सूत्र दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में होते थे। अब अपने ही देश में अपना संजाल इतने व्यापक रूप में फैला लेने से इनके लम्बे होते जाते हाथों का पता स्पष्ट रूप से चल जाता है। सी.बी.आई. की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार देश भर के बैंकों की कम से कम 700 शाखाओं में 8.5 लाख ऐसे खाते पकड़े गये जो अनाधिकृत थे, और कि जिनमें ऐसी ठगी के करोड़ों रुपये जमा किये जाते थे। इससे ठगे जाने वाले जन-साधारण को एक नया और बड़ा नुक्सान यह हुआ है कि पहले जहां ऐसे धन को खपाने के लिए कई प्रकार की बाधाओं को पार करना होता था, वहीं अब ये ठग लूटे गये धन को बहुत थोड़ी अवधि में ही ठिकाने लगा लेते हैं। पिछले वर्ष यानि 2025 में ऐसे 26.48 लाख म्यूल खातों का पता चला था। आपराधिक गिरोह ऐसे म्यूल बैंक खातों को बाकायदा किराये पर लेते हैं। वास्तव में तकनीकी और ई-जानकारियों में इज़ाफा होने से ऐसे अपराधों से जुड़े गिरोह भी अत्याधुनिक होते जा रहे हैं। इस कारण ऐसे अपराध अब दीदा-दानिश्ता होने लगे हैं। ऐसे गिराहों ने अपनी कार्य-प्रणाली और अपराध के तरीकों में भी उसी अनुपात से बदलाव किया है। आसानी से प्राप्त हो जाने वाले ऐसे धन के लालच में ऐसी घटनाओं की संख्या भी बढ़ी है, और इनसे सम्बद्ध आपराधिक तत्वों में भी इज़ाफा हुआ है। पहले ऐसे होता था कि अपराधी अपने शिकार से थोड़ी-थोड़ी मात्रा में, बैंकों के ज़रिये उनका पैसा उड़ा ले जाते थे। अब नई तकनीक से बड़ी आसानी से भारी-भरकम राशि निकाल ली जाती है। यह भी, कि यह पैसा अब देश में ही रहने से बड़ी आसानी से एक से दूसरे बैंक खाते में तबदील हो जाता है जिस कारण अपराध और अपराधी का शीघ्र पता चलना कठिन हो जाता है। इसी कारण सम्भवत: वर्ष 2025 में ऐसे ठगी अपराधों के ज़रिये 22,496 करोड़ रुपये की राशि खुर्द-बुर्द कर दी गई। 
ऐसे साइबर अपराधों की संख्या में विगत एक दशक में अथाह रूप से वृद्धि हुई है। यह भी कि इस काल में ऐसे अपराधों में शुमार होने वाली धन-राशि भी उसी अनुपात से बढ़ी है। पहले अपराध होने के बाद पता चलता था कि मामला कितना गम्भीर है। अब अपराधी घंटों तक, अर्थात कई मामलों में कई-कई दिनों तक अपने शिकार को डिजीटल कैद में रखते हैं, अथवा कई-कई दिन तक अपनी प्रक्रिया में उलझाये रखते हैं। इस प्रकार वे यथासंभव, अधिकाधिक राशि उनके बैंक खातों से निकाल कर म्यूल खातों में तबदील कर लेते हैं। इस प्रकार यह आपराधिक क्रिया निरन्तर गम्भीर रुख धारण करती जा रही है। 
साइबर अपराधों के ज़रिये देश की कितनी बड़ी धन-राशि प्रभावित होती है, इसका अनुमान इस एक तथ्य से भी लगाया जा सकता है, कि अकेले तेलंगाना और कर्नाटक दो राज्यों में पिछले पांच वर्ष में 55,000 करोड़ रुपये ठगे गये। ये दोनों राज्य ऐसे मामलों को लेकर सर्वाधिक प्रभावित माने जाते हैं। पंजाब जैसा सीमांत राज्य भी ऐसे अपराधों की अग्रिम कतार में शुमार दिखाई देता है। पंजाब में प्रतिदिन साइबर अपराध के 170 मामले दर्ज होते हैं। चिंता की बात यह है कि पंजाब के जालन्धर, अमृतसर, लुधियाना और पटियाला जैसे महानगरों के बाद अब कपूरथला, फिरोज़पुर, फगवाड़ा, होशियारपुर और तरनतारन जैसे शहर भी ऐसे अपराधों से जुड़ने लगे हैं। पंजाब की एक पुलिस रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक वर्ष में प्रदेश में 62,253 मामले दर्ज किये गये। पुलिस ने इस काल में साइबर ठगों से जुड़े 63,000 से अधिक बैंक खातों को मुहरबंद किया। अकेले जालन्धर में 16,032 खाते फ्रीज हुए। एक अच्छी बात यह भी रही प्रतीत होती है कि पुलिस तंत्र और ऐसे ठगों के बीच तू डाल-डाल, मैं पात-पात का खेल भी चल रहा है। पुलिस ने अपनी तकनीकी जानकारी के ज़रिये इस काल में ठगी गई धन-राशि में से बड़ी संख्या में राशि बरामद भी की और बड़ी संख्या में ठगों को अपने फंदे में फंसाया भी है।
हम समझते हैं कि नि:संदेह तकनीकी जानकारी और ई-उपलब्धियों के ज़रिये ऐसे अपराधी खुल खेलने लगे हैं, किन्तु प्रशासनिक तंत्र भी बड़े लम्बे हाथों के साथ, इनके पीछे लगा है। फिर भी, ऐसे अपराधों की रोकथाम हेतु जन-जागृति, जन-जागरूकता और जन-सहयोग बहुत ज़रूरी है। जहां तक संभव हो सके, प्रशासन और जन-साधारण के बीच ऐसे मामलों संबंधी बैठकों का आयोजन समय-समय पर किया जाते रहना चाहिए। यह अभियान जितना अधिक गति से बढ़ेगा, उतना ही इस अपराध का ताप कम होगा।

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