प्रधानमंत्री का सम्बोधन
देश भर में 80वां स्वतंत्रता दिवस भारी उत्साह के साथ मनाया गया। प्रत्येक वर्ष की तरह ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 13वीं बार देश के लोगों को सम्बोधित किया। उन्होंने अपने सम्बोधन में जहां 2014 के बाद प्रधानमंत्री के रूप में अपने दो पिछले कार्यकालों और वर्तमान कार्यकाल की बड़ी उपलब्धियां गिनाईर्ं, वहीं उन्होंने 2047 तक देश को एक विकसित राष्ट्र बनाने की अपनी कार्य योजना की भी एक बार फिर से रूप-रेखा पेश की।
उन्होंने यह दावा भी किया कि 2014 से पहले देश धीमी रफ्तार से विकास कर रहा था, परन्तु 2014 के बाद देश के विकास की रफ्तार पहले से कहीं अधिक तेज़ हुई है। उदाहरण के तौर पर उन्होंने कहा कि 2014 से पहले मात्र 70 शहरों को ही पाइप द्वारा गैस सप्लाई की जाती थी, अब 700 शहरों को गैस पाइप लाइन द्वारा सप्लाई की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सौर ऊर्जा का उत्पादन 106 गीगा वॉट तक बढ़ गया है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 90 वर्षों में रेलवे नैटवर्क का मात्र 30 प्रतिशत विद्युतीकरण हुआ था, जब कि अब यह 100 प्रतिशत हो चुका है। उन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत के बढ़ रहे व्यापारिक रिश्तों की चर्चा करते हुए कहा कि अब तक 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते हो चुके हैं। उन्होंने यह भी बताया कि साइंस टैक्नोलॉजी और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में भी भारत ने भारी विकास किया है। 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए उन्होंने 7 महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों के विकास पर ज़ोर देते हुए ‘सप्तधारा’ नामक सात नुक्तों पर आधारित सूत्र पेश किया है। उन्होंने कहा कि निर्माण, बिजली उत्पादन, डिज़ाइनिंग, सप्लाई क्रम आदि क्षेत्रों की ओर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है और भारत को विश्व की सप्लाई शृंखला का केन्द्र बनाने की ज़रूरत है। इसलिए हमें अपने निर्माणों की लागत कम करने, उनमें गुणात्मक रूप से वृद्धि करने, उपभोक्ता के पक्ष से और मुकाबले योग्य उत्पादन तैयार करने पर ज़ोर देने की ज़रूरत है। खाद्य उत्पादन और प्रोसैसिंग, टैक्नोलॉजी और नवीनीकरण, नए ज़मीनी अन्तर्राष्ट्रीय मार्ग और समुद्री मार्ग, मज़बूत सुरक्षा, पर्यावरण पक्षीय नई ऊर्जा आदि के क्षेत्रों को भी विशेष प्राथमिकता देने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि आगामी समय में भारत के विकास में सैमी कंडक्टर चिप, दुर्लभ खनिज, डाटा सैंटर और डिजिटल तकनीक का विशेष योगदान रहेगा। इसके साथ ही उन्होंने भारत को देश-विदेश में सम्मान दिलाने वाले क्षेत्रों (सापट पॉवर) जैसे कि योगा, रुहानी केन्द्र, स्वास्थ्य सेवाएं सिस्टम, मनोरंजन, पर्यटन आदि के क्षेत्रों को भी महत्त्व देना पड़ेगा। प्रधानमंत्री ने अपने 76 मिनट के भाषण में 27 मिनट तक 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने के संबंध में अपनी प्रतिबद्धता संबंधी विचार पेश किए। प्रधानमंत्री के इस भाषण पर विगत दिवस जंतर-मंतर और देश के अन्य भागों में युवाओं (ज़ैन-जी) द्वारा अपने मामलों को लेकर किए गए आन्दोलन का प्रभाव भी स्पष्ट दिखाई दे रहा था। उन्होंने बार-बार भाषण में युवाओं का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि देश के विकास को युवाओं के विकास के साथ जोड़ने की ज़रूरत है। युवाओं के लिए विशेष योजना की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि एक करोड़ युवाओं को ए.आई. तकनीक संबंधी शिक्षा देने और विभिन्न दाखिला परीक्षाओं की ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध करवाने के लिए कदम उठाए जाएंगे, ताकि युवा अपने गांवों और शहरों में रहकर ऑनलाइन कोचिंग प्राप्त कर प्रतियोगिता कीदाखिला परीक्षाओं की तैयारी कर सकें।
देश की आंतरिक सुरक्षा स्थिति की बात करते हुए उन्होंने कहा कि नक्सलवाद और माओवाद को खत्म कर दिया गया है और वह अंतिम सांस पर है। इसके साथ ही उन्होंने ‘दिमागी नक्सलवाद’ से सतर्क रहने की भी चेतावनी दी। कई विपक्षी पार्टियों की ओर से प्रधानमंत्री द्वारा उपयोग किए गए इस दिमागी नक्सलवाद शब्द की कड़ी आलोचना की गई और उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने इस शब्द का उपयोग अपने विचारधारक और राजनीतिक विरोधियों के लिए किया है। वह देश की समस्याओं को समझ कर उन्हें हल करने के स्थान पर लोगों का ध्यान भटकाने का यत्न कर रहे हैं। इस बार लाल किले पर हुए समारोह की एक विशेष बात यह भी रही कि पहली बार राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् गाया गया। पिछली बार की तरह ही कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस बार भी इस समारोह में अनुपस्थित रहे।
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या को देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी राष्ट्र को सम्बोधित किया। उन्होंने भी अपने सम्बोधन में 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की ज़रूरत पर बल दिया और उन्होंने यह भी आशा प्रकट की कि आगामी वर्षों में देश की विकास दर विश्व की औसतन विकास दर से दोगुना अधिक रहेगी।
समूचे रूप से हम कह सकते हैं कि देश ने पिछले 80 वर्ष में विभिन्न पक्षों से भारी विकास किया है, परन्तु इसके बावजूद देश की जनसंख्या भी तेज़ी से बढ़ी है और लोगों की ज़रूरतें भी कई गुना बढ़ी हैं। देश के युवाओं को अच्छी शिक्षा, अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं और रोज़गार के अधिक अवसरों की ज़रूरत है। यदि केन्द्र और अन्य प्रदेश सरकारें लोगों की इन ज़रूरतों को पूरा करने में सफल होती हैं, तभी भारत सही अर्थ में एक विकसित राष्ट्र बन पाएगा। विशेष रूप से सरकारों को, युवाओं में बेरोज़गारी के कारण पैदा हो रही बेचैनी की ओर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है।

