मध्यम वर्ग को नहीं मिल रहीं आवश्यक सुविधाएं

देश में एक बार फिर मध्यम वर्ग  (मिडिल क्लास) चर्चा के केन्द्र में है। भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा देने के बाद पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने अब ऐसे मुद्दे उठाए हैं, जिनका सीधा संबंध देश के मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों से है। पूनावाला का कहना है कि भारत का मध्यम वर्ग  अलग-अलग माध्यमों से लगातार टैक्स और अन्य शुल्क का भुगतान करता है, लेकिन इसके बदले उसे किस स्तर की सार्वजनिक सुविधाएं मिल रही हैं, इस पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा देने के बाद पूर्व भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने अब ऐसे मुद्दे उठाए हैं, जिनका सीधा संबंध देश के मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों से है। मध्यम वर्ग पर महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, घर, परिवहन और रोज़मर्रा के खर्च का दबाव लगातार चर्चा में रहता है। ऐसे में टैक्स के बदले सार्वजनिक सुविधाओं की गुणवत्ता का मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकता है।
देश में अमीर और गरीब की चर्चा तो हमेशा से होती आई है मगर मध्यम वर्ग के बारे में कम ही सुना जाता है जबकि यह वर्ग देश की प्रगति और तरक्की में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करता है। भारत का मध्यम वर्ग  सिर्फ  एक आर्थिक वर्ग नहीं है, बल्कि यह समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो देश की प्रगति में योगदान देता है। एक रिपोर्ट के अनुसार हमारे देश की कुल जनसंख्या का तीस प्रतिशत भाग अर्थात 40 करोड़ व्यक्ति  मध्यम वर्ग के अंतर्गत आते हैं। महंगाई की मार भी यही वर्ग झेलता है। आज़ादी के बाद संभवत: यह पहला अवसर है जब मध्यम वर्ग को आयकर के क्षेत्र में  इतनी बड़ी राहत दी गई है। मोदी सरकार ने वर्ष 25-26 के अपने सालाना बजट में आखिर अपने कोर मतदाताओं यानि मध्यम वर्ग की सुध-बुध ली है। मध्यम वर्ग को आयकर में बहुत बड़ी राहत प्रदान कर साधने का प्रयास किया है। मोदी सरकार के इस कदम से लाखों करदाताओं को बड़ी राहत मिलेगी। वित्त मंत्री ने अपने सालाना बजट में इनकम टैक्स छूटी की सीमा बढ़ा कर 12 लाख रुपये करने का ऐलान किया था।
हमारे समाज को सदियों से उच्च, मध्यम और निम्न वर्गों में बांट कर देखा जाता है। उच्च वर्ग धनिक वर्ग में गिना जाता है जिस पर कोई संकट कम ही आता है। निम्न वर्ग अपने हाल पर मस्त है, मगर मध्यम वर्ग को अपने साथ देश की चिंता रहती है। देश की आज़ादी में मध्यम वर्ग की बड़ी भूमिका और योगदान रहा है। मध्यम वर्ग, केवल आर्थिक ही नहीं अपितु सामाजिक, सांस्कृतिक एवं व्यापारिक बदलाव, परिवर्तन, विकास एवं संवृद्धि का वाहक भी होता है। उदारीकरण, बाजारीकरण एवं वैश्वीकरण के दौर में सबसे ज्यादा प्रभावित मध्यम वर्ग हुआ है। आईएचएस मार्किट की एक रिपोर्ट में माना है कि भारत के लिए एक महत्वपूर्ण सकारात्मक कारक इसका बड़ा और तेज़ी से बढ़ता हुआ मध्यम वर्ग है, जो उपभोक्ता खर्च को चलाने में मदद कर रहा है। विभिन्न अध्ययन रिपोर्टों का गहराई से अवलोकन करे तो पाएंगे मध्यम वर्ग यानि मिडिल क्लास की कोई निश्चित और सर्वमान्य परिभाषा नहीं है। अलग-अलग रिसर्च और सर्वेक्षणों में अलग-अलग परिभाषाएं दी गई हैं। कुछ रिपोर्ट के अनुसार मिडिल क्लास वह वर्ग है जिसकी सालाना आय 5 लाख रुपये से 30 लाख रुपये के बीच होती है, जबकि कुछ रिपोर्टें इसे 2 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक मानती हैं। सच तो यह है, महंगाई की मार भी यही वर्ग झेलता है। उच्च वर्ग से होड़ करता यह वर्ग भीतर से खोखला होता जा रहा है। असल में  भारत की अर्थव्यवथा का केन्द्र है यह वर्ग। मध्यम वर्ग आर्थिक रूप से कमज़ोर होता है और दैनिक जीवन में काफी अनिश्चितता का सामना करता है, लेकिन वह बेहतर जीवन स्तर की आकांक्षा रखता है। यह ऐसा वर्ग है जो लेता कम और कर के रूप में देश को देता ज्यादा है। अपनी आवश्यकताएं पूरी न होने के बावजूद टैक्स की भरपाई में आगे रहता है।  

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