शीशा हो या रीना रॉय का दिल... आखिर टूट जाता है!

प्रत्येक बॉलीवुड सितारे के पीछे एक अनकही कहानी है, जो बड़े पर्दे पर दिखायी देने वाली मुस्कान के पीछे छुपी रहती है। प्रेम, धोखा और उलझे हुए संबंध केवल फिल्मी प्लॉट्स नहीं हैं, अनेक सेलिब्रिटीज़, जिन्होंने इसका अनुभव किया है, वह इसकी गवाही दे सकते हैं। 70 व 80 के दशकों की सबसे चर्चित जोड़ी रीना रॉय व शत्रुघ्न सिन्हा की थी। बॉलीवुड में जो प्रेम कथाएं हैं, उनमें संभवत: सबसे आइकोनिक इन दोनों की प्रेम कहानी है, जो बतौर निर्देशक सुभाष घई की डेब्यू फिल्म ‘कालीचरण’ से आरंभ हुई, जिसमें ये दोनों लीड एक्टर थे। शत्रुघ्न पहले ही अपनी लम्बे समय से पार्टनर रहीं पूनम चंदिरामानी के प्रति समर्पित थे, जब रीना रॉय से उनका रोमांस गंभीर हुआ। पूनम के बच्चा होने जा रहा था, जिससे शत्रुघ्न पर ज़बरदस्त दबाव पड़ा कि वह पूनम के साथ अपने संबंध का सम्मान करें। शत्रुघ्न के परिवार का भी दबाव था कि वह पूनम से शादी करें। उधर रीना रॉय ने आठ दिन की लिमिट तय कर दी उनसे शादी करने की, लेकिन 1981 में शत्रुघ्न ने पूनम से शादी कर ली और एक प्रेम कथा का अंत हो गया।
रीना रॉय अपने दौर की टॉप अभिनेत्री थीं। उनका जीवन ग्लैमर, प्रेम, दिल टूटने व बर्दाश्त करने से भरा रहा। उनका जीवन बताता है कि एक बॉलीवुड स्टार को किन संघर्षों का सामना करना पड़ता है। रीना रॉय का जन्म सायरा अली के रूप में सादिक अली व शारदा राय के घर में हुआ था लेकिन जब सादिक व शारदा का तलाक हुआ तो रीना रॉय व उनके अन्य भाई बहनों (बरखा, अंजू व राजा) ने अपने पिता का हमेशा के लिए त्याग कर दिया। शारदा ने अपने सारे बच्चों के नाम बदल दिये, सायरा अली रूपा रॉय हो गईं लेकिन किशोरावस्था में जब रूपा रॉय ने फिल्मी दुनिया में प्रवेश तो निर्देशक बीआर इशारा ने उन्हें आइकोनिक स्क्रीन नाम रीना रॉय दिया। 
रीना रॉय को स्टारडम फिल्म ‘नागिन’ (1976) से मिला। इस फिल्म में उस समय की लगभग हर टॉप अभिनेत्री ने काम करने से इनकार कर दिया था। फिल्म पहले दिन ही ब्लॉकबस्टर हो गई और रीना रॉय स्टार बन गईं। इसके बाद उनकी अनेक सफल फिल्में आयीं जैसे ‘जानी दुश्मन’ (1979), ‘आशा’ (1980), ‘नसीब’ (1981), ‘सनम तेरी कसम’ (1982), ‘अर्पण’ (1983) आदि। इन फिल्मों से रीना रॉय ने सबसे अधिक फीस लेने वाली और सबसे अधिक मांग में रहने वाली अभिनेत्री बन गईं। शत्रुघ्न सिन्हा की वजह से दिल टूटने के बाद रीना रॉय ने उनसे फासला बनाने और ज़िंदगी में आगे बढ़ने का फैसला किया। उन्होंने 1980 के दशक के मध्य में पाकिस्तानी क्रिकेटर मोहसिन खान से शादी की। वह चाहती थीं कि मोहसिन खान भारत में ही रहें, इसलिए उन्होंने कुछ फिल्मों में अपने पति को बतौर एक्टर भूमिकाएं दिलाने में भी मदद की, जिससे रीना रॉय की उस समय बॉलीवुड में ताकत का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। लेकिन मोहसिन खान को मुंबई की चकाचौंध रास न आयी। 
वह अच्छे बैटर अवश्य थे, लेकिन अच्छे एक्टर न थे। वह पाकिस्तान लौट गये। अपनी शादी को बचाने की खातिर रीना रॉय भी उनके साथ पाकिस्तान चली गईं, अपने फिल्मी करियर को अलविदा कहते हुए। दोनों के यहां एक लड़की ने जन्म लिया, जिसका नाम जन्नत रखा गया। बहरहाल, जीवनशैली व सांस्कृतिक अंतर के कारण यह शादी अधिक समय तक चल न सकी। 1990 के दशक के शुरुआत में दोनों में तलाक हो गया। मोहसिन खान जन्नत को लेकर कराची में बस गये। इससे जन्नत की कस्टडी को लेकर दोनों पैरेंट्स में लम्बा अदालती विवाद चला और आखिरकार रीना रॉय को जन्नत की कस्टडी मिल गई। अपनी मां शारदा की तरह रीना रॉय ने भी तलाक के बाद अपनी बेटी जन्नत का नाम बदलकर सनम खान रख दिया, जिसकी परवरिश वह मुंबई में ही कर रही हैं। 
अपने रेन-डांस ‘अब के सावन में जी डरे’ (जैसे को तैसा, 1973) के लिए विख्यात रीना रॉय ने बॉलीवुड में अपनी दूसरी पारी 1992 में सहायक अभिनेत्री के रूप में फिल्म ‘आदमी खिलौना है’ से शुरू की, लेकिन वह अपनी पुरानी सफलता को दोहरा न सकीं। उनकी अंतिम फिल्मी भूमिका जेपी दत्ता की फिल्म ‘रिफ्यूजी’ (2000) में थी। इसके बाद वह टीवी की तरफ मुड़ीं और अपनी बहन बरखा के सीरियल ‘ईना मीना डीका’ में काम किया। दोनों बहनों ने मिलकर 2004 में एक एक्टिंग स्कूल खोला। अब रीना रॉय उसी में ही अधिक व्यस्त रहती हैं। कभी-कभी रियल्टी शो या राजनीतिक मंच पर भी दिखायी दे जाती हैं। रीना रॉय को ‘अपनापन’ के लिए फिल्मफेयर ने 1979 में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री अवार्ड के लिए विजेता घोषित किया था, लेकिन उन्होंने इस पुरस्कार को लेने से इन्कार कर दिया; क्योंकि उन्हें लगता था कि सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री अवार्ड की वह हकदार थीं। उन्हें 1977 में ‘नागिन’ और 1981 में ‘आशा’ में अदाकारी के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री अवार्ड हेतु नामांकित अवश्य किया गया था, लेकिन वह जीत न सकीं। कुल मिलाकर रीना रॉय का जीवन उनकी फिल्म ‘आशा’ के गाने ‘शीशा हो कि दिल आखिर टूट जाता है’ की तरह ही रहा है।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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