'सच, झूठ के शोर को हराएगा'; विपक्ष पर 'नाराज़ फूफा' जैसा तंज कसा :पीएम मोदी

वडोदरा (गुजरात) 8 सितंबर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि भारत लोगों और सामान की आवाजाही को तेज़ करने, नए आर्थिक अवसर पैदा करने और विकास को गति देने के लिए तेज़ी से अपना इंफ्रास्ट्रक्चर मज़बूत कर रहा है। उन्होंने गुजरात के वडोदरा में 35,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया, उन्हें देश को समर्पित किया और उनकी आधारशिला रखी।
महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी (MSU) पैविलियन ग्राउंड में "नमो फॉर विकसित भारत" नाम के एक बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज़ोर एक विकसित भारत की नींव रखने के मकसद से है। इस कार्यक्रम में युवाओं के साथ उनकी बातचीत और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की शुरुआत एक ही जगह पर हुई, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र, युवा और नागरिक शामिल हुए।
प्रधानमंत्री ने कहा, "हम लोगों और सामान को तेज़ी से लाने-ले जाने, नए अवसर पैदा करने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत कर रहे हैं।" उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग, व्यापार और निवेश को सहारा देने में आधुनिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के महत्व पर ज़ोर दिया।
इस कार्यक्रम की एक मुख्य बात वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) के तीन महत्वपूर्ण हिस्सों की शुरुआत और उन्हें देश को समर्पित करना था। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को भारत के आर्थिक विस्तार के लिए बहुत ज़रूरी बताते हुए मोदी ने कहा, "डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर तेज़ी से विकसित हो रहे भारत की जीवन रेखा है।" वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को प्रमुख औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्रों के बीच माल की तेज़ी से और बेहतर आवाजाही के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे पारंपरिक रेलवे रूट पर दबाव कम करने और लॉजिस्टिक्स की क्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। इस कॉरिडोर से बंदरगाहों तक कनेक्टिविटी मज़बूत होने और पश्चिमी और उत्तरी भारत में औद्योगिक सामान की आवाजाही में मदद मिलने की भी उम्मीद है।
इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को देश की मैन्युफैक्चरिंग महत्वाकांक्षाओं से जोड़ते हुए मोदी ने कहा कि भारत औद्योगिक विकास के एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने कहा, "चिप से लेकर जहाज़ तक, भारत अब मैन्युफैक्चरिंग का एक नया भविष्य बना रहा है।" उन्होंने घरेलू उत्पादन, सप्लाई चेन और रणनीतिक मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं पर सरकार के ज़ोर को रेखांकित किया।
फ्रेट कॉरिडोर प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ, प्रधानमंत्री ने कई रेलवे, हाईवे और आदिवासी कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स की शुरुआत की, उन्हें देश को समर्पित किया और उनकी आधारशिला रखी। इन पहलों का मकसद क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मज़बूत करना और आर्थिक गतिविधियों और रोज़गार के लिए नए अवसर पैदा करना है। वडोदरा का यह कार्यक्रम मोदी के लिए विपक्ष पर तीखा राजनीतिक हमला करने का मंच भी बन गया। प्रधानमंत्री ने उन लोगों पर निशाना साधा जो भारत की तरक्की को मानने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने अपने पुराने "नाराज़ फूफा" वाले तंज को दोहराते हुए कहा कि कुछ लोग देश की उपलब्धियों के बावजूद हमेशा असंतुष्ट ही रहते हैं।
मोदी ने कहा कि कुछ राजनीतिक विरोधी भारत के विकास से खुश नहीं हो पाते और लगभग हर बात पर "शिकायत" करते रहते हैं। उन्होंने परिवार के किसी ऐसे सदस्य का उदाहरण दिया जो हमेशा नाखुश रहता है; उन्होंने कहा कि विपक्ष भी उसी "नाराज़ फूफा" की तरह व्यवहार करता है जो दूसरों के तरक्की का जश्न मनाने पर भी नाराज़ रहता है।
प्रधानमंत्री ने भारत की उपलब्धियों के बारे में "झूठ का शोर" (echo of lies) खड़ा करने की कोशिशों की भी आलोचना की। मोदी ने कहा, "युवाओं का सच, झूठ के शोर को हरा देगा।" उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भारत के युवा आखिरकार सच और गलत जानकारी के बीच फ़र्क समझ लेंगे।
उन्होंने कहा, "झूठ का शोर युवाओं को गुमराह नहीं कर सकता," और साथ ही कहा कि "सच की जीत होगी"।
मोदी की ये बातें खास तौर पर उन कोशिशों के जवाब में थीं जिनमें भारत के विकास की उपलब्धियों और असलियत को नकारा या कम करके दिखाया जाता है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी इस बात से गुमराह नहीं होगी कि देश की तरक्की मनगढ़ंत है।
वडोदरा कार्यक्रम में युवाओं पर प्रधानमंत्री का ज़ोर सबसे अहम था; इसे 'जेन ज़ी' (Gen Z) और छात्रों तक पहुँचने के एक बड़े प्रयास के तौर पर पेश किया गया था। इस कार्यक्रम में लोगों ने काफी दिलचस्पी दिखाई; खबरों के मुताबिक, एंट्री पास तेज़ी से बिक गए और बड़ी संख्या में लोगों को वेटलिस्ट में डालना पड़ा।

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