फसली विभिन्नता और सब्ज़ियों की काश्त
सब्ज़ियों का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए बहुत ज़रूरी है। नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ न्यूट्रीशन, हैदराबाद के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन 300 ग्राम सब्ज़ियों का सेवन करना चाहिए। घरेलू स्तर पर सब्ज़ियां उगाने के लिए बागवानी विभाग पंजाब, पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी और इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीच्यूट सब्ज़ियों की मिनी किटें जिसमें प्रत्येक किट में 8-10 तरह की सब्ज़ियों के बीज होते हैं, सप्लाई करते हैं। इन बीजों को तीन मरला जगह में बोया जा सकता है और एक परिवार के लिए पर्याप्त मात्रा में सब्ज़ियां उगाई जा सकती हैं। इन सब्ज़ियों को बगीचों, गमलों या छतों पर उगा कर ज़रूरी विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट तत्व प्राप्त कर सकते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर के लिए स्वयं सब्ज़ियां उगानी चाहिएं। इससे आर्थिक लाभ तो होता ही है, साथ ही बीमारियों से भी बचा जा सकता है। व्यापारिक और घरेलू स्तर पर सब्ज़ी उगाने वालों को विशेषज्ञों की सिफारिशों को नज़रअंदाज़ करके दुकानदारों के कहने पर कीटनाशकों का स्प्रे नहीं करना चाहिए। इस तरह स्प्रे के लिए इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाओं जैसे फ्यूराडान या थीमेट आदि का प्रभाव सब्ज़ियों में एक से डेढ़ महीने तक रहता है, जो मानवीय स्वास्थ्य के लिए घातक है।
खाने के अतिरिक्त फसली विभिन्नता लाने में सब्ज़ियों की विशेष भूमिका है। पीएयू में जो ‘हॉर्टिकल्चर नॉलेज सेंटर’ स्थापित किया गया है, उसके लिए 1200 करोड़ रुपये का उपबंध है जिसमें बागवानी के ज़रिए विभिन्नता लाने में सब्ज़ियों का भी योगदान होगा। छोटे किसान अधिक सब्ज़ियां उगाते हैं। सब्ज़ी की काश्त बढ़ने से उन्हें विशेष लाभ होगा। धान की काश्त का रकबा कम करके सब्ज़ियों और फलों की काश्त बढ़ाना फसली विभिन्नता के लिए बेहद अहम है। इससे पानी बचेगा, भू-जल स्तर गिरने से रुकेगा और किसानों के लिए रोज़गार के अवसर पैदा होंगे। सर्दियों में उपयोग होने वाली सब्ज़ियों में मूली, गाजर, पालक, मेथी, धनिया, ब्रोकली, पीली सरसों, फूलगोभी और पत्तागोभी आदि शामिल हैं, की बिजाई के लिए उचित समय सितम्बर महीना है। चाहे ये अक्तूबर के आखिरी दिनों में भी बोई जाती हैं।
बागवानी विभाग के सेवा-निवृत्त उप-निदेशक डॉ. स्वर्ण सिंह मान कहते हैं कि इन सब्ज़ियों की बिजाई से पहले एक मरले के लिए 400 किलोग्राम गली-सड़ी रूढ़ी की खाद या 100 किलोग्राम वर्मीकम्पोस्ट ज़मीन में डाल कर मिला देनी चाहिए। अच्छी गुणवत्ता वाली सब्ज़ियों की पौध सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (करतारपुर) से ली जा सकती है। कई निजी नर्सरियां भी सब्ज़ियों की स्वस्थ पौध सप्लाई करती हैं। जिनके पास घरेलू बगीचे के लिए जगह नहीं है, वे ब्रोकली, गोभी, प्याज़, मूली, पालक, पुदीना आदि सब्ज़ियां जिनकी जड़ें कम गहराई तक जाती हैं, को गमलों या कंटेनर में लगा सकते हैं। जिन सब्ज़ियों की जड़ें मध्यम गहराई तक जाती हैं, जैसे बीन्स, गाजर, खीरा, बैंगन, मटर, शिमला मिर्च, शलजम, घीया कद्दू, शकरकंद आदि भी गमलों या कंटेनरों में लगाई जा सकती हैं। घर की छत पर रखे गमलों या कंटेनरों को सर्दियों में हफ्ते में दो बार हल्का पानी देना चाहिए। बारिश के मौसम में पानी जमा नहीं रहने देना चाहिए।
कीड़े-मकौड़ों और बीमारियों से बचाने के लिए सब्ज़ियां नेट हाउस में लगाई जाएं। फफूंद रोग से बचाने के लिए चार दिन पुरानी एक लीटर लस्सी को 15 लीटर पानी में मिला कर स्प्रे करना चाहिए। कीड़े-मकौड़ों से बचाने के लिए 2 किलो लहसुन, 1 किलो अदरक और 1 किलो हरी मिर्च को पीस कर व कपड़े से छानकर 15 लीटर पानी में घोल कर स्प्रे करना चाहिए। दीमक से बचाव के लिए 20 ग्राम हींग को कपड़े में लपेट कर पानी की लाख में रख देना चाहिए। 4 किलो नीम के पत्तों और शाखाओं को 10 लीटर पानी में आधा घंटा उबाल कर इस घोल को पानी में डाल कर सब्ज़ियों में कीड़े-मकौड़ों तथा बीमारियों से बचाव के लिए स्प्रे किया जा सकता है। पीएयू के एडल डायरेक्टर (एक्सटेंशन) और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. तरसेम सिंह ढिल्लों का कहना है कि विटामिन से भरपूर गाजर सबकी पसंदीदा सब्ज़ी है। इसकी गुणवत्ता ठंडे मौसम में ही बनती है। गाजर से कई पदार्थ तैयार किए जाते हैं। गाजर की संशोधित किस्मों पंजाब संतरी, पंजाब जामनी, पंजाब रोशनी, पीसी-161, पंजाब ब्लैक ब्यूटी में से कोई भी किस्म चुनी जा सकती है। गाजर आमतौर पर 90-100 दिनों में तैयार हो जाती है। फूलगोभी की सफल काश्त के लिए ठंडा और हल्का मौसम सबसे अनुकूल है। पत्तागोभी भी ठंडे और नमी वाले मौसम में अच्छी वृद्धि करती है। इसकी फसल कम और ज़्यादा दोनों तरह का तापमान झेल सकती है, लेकिन शुष्क मौसम का इसकी गुणवत्ता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। ब्रोकली भी ठंडे और नमी वाले मौसम में अच्छी पैदावार देती है। गोभी जाति की किस्मों के लिए खाद और सिंचाई की ज़रूरत एक जैसी होती है। गोभी की फसल पर मौसम के अनुसार तना छेदक, चमकदार पीठ वाला पतंगा, तम्बाकू की सुंडी, तेला (चेपा) तथा पत्तागोभी की सुंडी जैसी सुंडियों का हमला हो जाता है, जिनकी रोकथाम के लिए सिफारिश किए स्प्रे इस्तेमाल करने चाहिएं। सब्ज़ियों से मिलने वाले विटामिन ऐसे तत्व हैं, जो हमारे शरीर को संक्रमण (इन्फेक्शन) और बीमारियों से बचाते हैं। ये पोषक तत्व मिलकर अच्छे स्वास्थ्य, स्मरण शक्ति एवं कार्य क्षमता बढ़ाने और समूचे शारीरिक एवं मानसिक विकास में अहम योगदान देते हैं।



