भारत-चीन संबंधों की मज़बूती

विगत दिनों दिल्ली में हुए ब्रिक्स सम्मेलन की विश्व भर में चर्चा रही है। इस वर्ष इसकी अध्यक्षता के कारण भारत भी विशेष तौर पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आकर्षण का केन्द्र बना रहा है। नि:संदेह इस सम्मेलन ने देश का कद और भी ऊंचा किया है। इस मंच पर विश्व के कुछ बड़े और विकासशील देशों का जुड़ना, आपसी सहयोग की बात करना, कई क्षेत्रों में लगे युद्ध के बारे में चिंता प्रकट करना और उनके हल निकालने का यत्न करना, एक अच्छे दृष्टिकोण की पहुंच की निशानी कही जा सकती है। जब विश्व भर के लिए सभी क्षेत्रों में बहुत सारे पक्षों से बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं, कई देश आपस में उलझे हुए हैं, अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों ने सब को हैरानी और परेशानी में डाला हुआ है, उस समय ऐसा इकट्ठ जुड़ना और एक साझी नीति अपनाने का यत्न करना, अपने आपमें बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है।
परन्तु हम भारत की यह भी एक बड़ी सफलता मानते हैं कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आए। उनकी ओर से विस्तारपूर्वक अपने विचार पेश करना और अलग तौर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात करना, दोनों देशों के संबंधों को एक सुखद माहौल की ओर तथा एक नये मार्ग पर ले जाने का यत्न करना भी विशेष महत्व रखता है। सम्मेलन में शी जिनपिंग ने जहां तकनीक के विकास पर ज़ोर दिया, वहीं औद्योगिक सहयोग की बात भी की और इसके साथ ही डिजिटल दौर में सम्मेलन के साझेदार देशों को आपस में जुड़ कर काम करने का संदेश दिया। इसके साथ ही विज्ञान और तकनीक में भी साझे कदम उठाने की बात उनकी ओर से कही गई। जहां तक भारत और चीन का संबंध है, दोनों देशों के प्रमुखों ने आपस में आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर विशेष ज़ोर दिया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने चीन के प्रमुख का इस बात की ओर भी अधिक ध्यान दिलाया है कि चाहे दोनों देश एक-दूसरे के साथ व्यापार करने को प्राथमिकता दे रहे हैं, परन्तु भारत के लिए चीन के साथ व्यापार बड़े घाटे का सौदा है। उदाहरण के लिए भारत द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के अप्रैल से जुलाई के चार महीनों में चीन को 74724 करोड़ रुपये का सामान भेजा गया था, जबकि चीन से 504866 करोड़ रुपये का सामान भारत में आया था। इस वर्ष भारत तथा चीन का व्यापारिक अंतर 1072960 करोड़ रुपये तक हो गया था। चीनी राष्ट्रपति ने इस संबंध में सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए इस आपसी व्यापारिक अंतर को कम करने के लिए दोनों देशों को नीतिबद्ध ढंग से योजनाबंदी करने के लिए कहा। इसी दिशा में चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि भारत उसका एक महत्वपूर्ण पड़ोसी देश है। दोनों देश एक-दूसरे के साथ सहयोग के इच्छुक हैं और दोनों देशों के नेताओं ने इस संबंध में जो आपसी भावनाएं साझा की हैं, उनकी दिशा से भविष्य में सचेत रूप में एक संतुलन बनाने का यत्न किया जाना चाहिए।
यदि निकट भविष्य में क्रियात्मक रूप में ऐसे मार्ग पर चला जाता है तो भारत के लिए इसे एक बड़ी उपलब्धि माना जाएगा। इस दिशा में चलते हुए यदि दोनों देशों के संबंध प्रत्येक पक्ष से सुधरते हैं तो दोनों देश ही विकास के अन्य मार्ग प्रशस्त करने में समर्थ हो सकते हैं। भारत और चीन दोनों को ऐसी भावना से आपसी संबंधों को सद्भावनापूर्ण ढंग से आगे बढ़ाने की नीति पर क्रियान्वयन करते रहना चाहिए। 

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

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