फरक्का जल संधि को लेकर बांग्लादेश की बढ़ी चिन्ता
पहलगाम में आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान से साथ सिंधु जल संधि को भारत ने स्थगित कर दिया। भारत के इस कदम से पाकिस्तान के सामने पानी को लेकर गम्भीर संकट पैदा हो गया था। इससे वह तिलमिलाया हुआ है और अंतरर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा करने में लगा हुआ है। कुछ ऐसा ही डर अब बांग्लादेश को सताने लगा है। वैसे भी अगस्त 2024 में बांग्लादेश से शेख हसीना सरकार के हटने के बाद वहां की मौजूदा सरकार और इससे पहले अंतरिम सरकार के मुखिया रहे मोहम्मद यूनिस ने भारत से नफरत की सारी हदें पार कर दी थीं। यह देश इस वक्त चीन और पाकिस्तान का मोहरा बन रहा है।
बांग्लादेश में भय का कारण है गंगा नदी जल बंटवारे को लेकर हुई फरक्का संधि। इस संधि की मियाद इसी साल दिसम्बर में पूरी हो रही है। भारत ने इस संधि में एक पड़ोसी होने के नाते बांग्लादेश को कई तरह की रियायत दी थी, लेकिन अगर भारत इस मौजूदा संधि के प्रावधानों को कड़ाई से लागू कर दे तो गर्मियों के मौसम में बांग्लादेश को भी जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। इसी कारण वहां की सरकार अब पाकिस्तान की तरह ही तिलमिलाई हुई है। जानकारी के अनुसार भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे को लेकर 12 दिसम्बर, 1996 को समझौता हुआ था। इसे आम तौर पर गंगा जल बंटवारा संधि या फरक्का संधि कहा जाता है। यह संधि 30 साल के लिए हुई थी और दिसम्बर 2026 में इसकी अवधि खत्म हो रही है। यही वजह है कि इस समय दोनों देशों के बीच इस समझौते को लेकर बातचीत बेहद अहम हो गई है। इस संधि के तहत फरक्का पर जनवरी से मई के बीच गंगा के पानी का बंटवारा किया जाता है।
बताया जाता है कि बांग्लादेश की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर गंगा का बहाव ही कम हो गया तो उसे मिलने वाला पानी भी कम हो सकता है। 1996 की संधि में पानी के बंटवारे के लिए एक फार्मूला बनाया गया है। अगर फरक्का पर पानी का बहाव 70 हज़ार क्यूसिक या उससे कम है तो दोनों देशों के बीच पानी बराबर बांटा जाता है। 70 हज़ार से 75 हज़ार क्यूसिक के बीच होने पर बांग्लादेश को 35 हज़ार क्यूसिक मिलता है। वहीं 75 हजार क्यूसिक से ज्यादा बहाव होने पर भारत को 40 हज़ार क्यूसिक मिलता है और बाकी पानी बांग्लादेश को जाता है, लेकिन यहां एक पेंच है। इस समझौते में बांग्लादेश के लिए किसी स्थायी न्यूनतम जल गारंटी का प्रावधान नहीं है। यही बात आज ढाका को सबसे ज्यादा परेशान कर रही है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री भी कह चुके हैं कि नई संधि में गारंटी क्लॉज (धारा) की ज़रूरत है और उनका देश ज्यादा पानी हासिल करना चाहता है।
जानकारों के अनुसार यही वह बात है जो बांग्लादेश को पुराने समझौते की याद दिला रही है। 1977 में भारत और बांग्लादेश के बीच पांच साल के लिए पानी बांटने का समझौता हुआ था। उसमें बांग्लादेश के लिए एक न्यूनतम गारंटी क्लॉज था। इस प्रावधान के तहत कम बहाव की स्थिति में भी एक न्यूनतम मात्रा सुनिश्चित करने की व्यवस्था थी लेकिन 1996 की 30 साल वाली संधि में ऐसा कोई स्थायी न्यूनतम गारंटी क्लॉज नहीं रखा गया। अब बांग्लादेश चाहता है कि नई संधि में उसकी इस मांग को शामिल किया जाए। वहां के जल संसाधन मंत्री ने अगस्त 2026 में साफ कहा कि ढाका मौजूदा समझौते को फिर से बातचीत के ज़रिए बदलना चाहता है और ज़रूरत पड़ने पर अंतर्राष्ट्रीय मंचों का रुख भी कर सकता है।
भारत ने पश्चिम बंगाल में फरक्का बैराज का निर्माण किया था। इसका मकसद गंगा के पानी का एक हिस्सा हुगली नदी की ओर मोड़ना था। इससे कोलकाता बंदरगाह में जमा गाद को हटाने और नदी की नौवहन क्षमता बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद थी। लेकिन गंगा भारत से निकलकर बांग्लादेश भी जाती है। वहां यही नदी पद्मा के नाम से जानी जाती है। इसलिए फरक्का से पानी मोड़े जाने का असर नीचे की ओर बांग्लादेश तक पहुंचता है। यही वजह है कि ढाका लंबे समय से फरक्का को लेकर अपनी नाराज़गी जाहिर करता रहा है। जानकारों के अनुसार गर्मी और सूखे के महीनों में गंगा का प्राकृतिक बहाव पहले ही कम हो जाता है। ऐसे में पानी की मांग बढ़ती है। बांग्लादेश के लिए इसका असर सिर्फ नदियों तक सीमित नहीं है। कम पानी का मतलब सिंचाई पर असर, मछलियों और जलीय जीवों पर असर और दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों में समुद्री खारे पानी के ऊपर आने का खतरा भी बढ़ना है। वहां की राजनीति में भी फरक्का लंबे समय से बेहद संवेदनशील मुद्दा रहा है। ढाका को डर सिर्फ इस बात का नहीं है कि उसे कुछ हज़ार क्यूसिक पानी कम मिलेगा। डर यह है कि अगर आने वाले वर्षों में नदी का बहाव लगातार घटा तो मौजूदा फॉर्मूला उसके लिए और मुश्किल पैदा कर सकता है।
2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव बड़ा। ऐसे माहौल में दिसम्बर 2026 में गंगा जल संधि की अवधि खत्म होना ढाका के लिए बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। (एजेंसी)



