नशे का प्रचलन
चुनाव को निकट आते देख पंजाब में ज्यादातर राजनीतिक पार्टियों द्वारा प्रदेश में फैले नशे के प्रचलन को मुख्य मुद्दा बनाया जा रहा है, परन्तु ऐसा प्रचलन आज किसी एक प्रदेश में नहीं, अपितु समूचे देश में ही फैला हुआ दिखाई देता है। केन्द्र सरकार और ज्यादातर राज्य सरकारें इससे चिंतित दिखाई देती हैं, परन्तु यह प्रचलन इस सीमा तक गहरी जड़ें पकड़ चुका है, इसे उखाड़ना यदि असंभव नहीं तो बेहद मुश्किल ज़रूर है। पिछले कुछ तीन दशकों से केन्द्र और प्रदेश सरकारों ने इसके विरुद्ध अभियान शुरू किया हुआ है, परन्तु इसका कोई प्रभाव पड़ता दिखाई नहीं देता। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नशे के इस नैटवर्क को तोड़ने के यत्नों के फलस्वरूप नई दिल्ली में एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया है। उन्होंने कहा है कि इसमें एंटी नॉरकोटिक्स टास्क फोर्स (नशे पर काबू पाने वाला संगठन) के यत्नों में वह स्वयं भाग लेंगे, जिसमें नशे पर काबू पाने के लिए तीन वर्ष (2026-29) तक के लिए एक विस्तारपूर्वक योजना तैयार की गई है। जिसका उद्देश्य योजनाबद्ध ढंग से की जा रही तस्करी के नैटवर्क को तोड़ना है। जहां तक पंजाब का संबंध है लगभग पिछले 30 वर्ष से यहां की सरकारें इस नामुराद बीमारी पर काबू पाने के लिए यत्नशील रही हैं। इस संबंध में लाखों ही मामले दर्ज किए गए हैं। कोई भी सरकार बनती है, वह एक सीमित समय में पंजाबियों को नशे से छुटकारा दिलाने का वायदा करती रही है, परन्तु यह नकारात्मक क्रियान्वयन जारी है। किसी समय कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने गुटका साहिब हाथ में पकड़ कर यह कहा था कि वह कुछ महीनों में ही इस बुरे प्रचलन को नकेल डालेंगे। अकाली-भाजपा सरकार ने भी इस संबंध में यत्न किए थे और तस्करों पर कड़ी कार्रवाई करने की योजनाएं बनाई थीं। इसी तरह मौजूदा सरकार ने भी कुछ महीनों में इस पर काबू पाने का दावा किया था। उसने इसके लिए ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ अभियान भी चलाया हुआ है, जिसके तहत पिछले वर्षों में हज़ारों ही मामले दर्ज किए गए। यहां तक कि नशा तस्करों के घर तक भी ध्वस्त कर दिए गए। ऐसा सिलसिला आज तक भी जारी है।
प्रदेश को नशा मुक्त करने के लिए पंजाब सरकार ने ‘बिग-5’ नामक योजना भी बनाई है, जिसमें प्रत्येक स्तर पर सरकारी कर्मचारियों, सोसायटियों, अध्यापकों और व्यापक स्तर पर वालंटियरों को शामिल किया गया। इसमें पूरी नज़र रखना, नशेड़ियों को काबू करना और उनके उपचार का प्रबंध करना आदि नुक्ते शामिल हैं। इसमें व्यापक स्तर पर समाज-सेवकों को भी शामिल किया गया है। स्कूलों में भी बच्चों को इस संबंध में जागरूक करने का दावा किया गया है। वरिष्ठ मंत्रियों अमन अरोड़ा और हरपाल सिंह चीमा ने भी यह दावा किया है कि पिछली सरकारों के समय के नशा तस्करों और उनके संरक्षकों के गठबंधन को तोड़ा गया है। इसके साथ-साथ अब भाजपा द्वारा भी पंजाब भर में लोगों को नशे के प्रति जागरूक करने के लिए योजनाबद्ध यात्राएं की जा रही हैं, जिनकी व्यापक चर्चा है। इन्हें ‘नशा मुक्त पंजाब’ का नाम दिया गया है। भाजपा नेताओं ने बार-बार यह भी दावा किया है कि पार्टी के इस फैले नैटवर्क को पूरी तरह तोड़ने में समर्थ है और वह कुछ महीनों में ही ऐसा करके दिखा सकते हैं। उनकी ओर से स्थान-स्थान पर रैली और यात्राएं की जा रही हैं। चौथी नशा मुक्त पंजाब यात्रा में केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भाग लिया और एक बार फिर यह दावा किया कि भाजपा सरकार बनने पर कुछ महीनों के भीतर-भीतर इस प्रचलन को खत्म कर दिया जाएगा। इस संबंध में पार्टियां एक दूसरे पर आरोप भी लगा रही हैं और हमलावर होती भी दिखाई दे रही हैं।
हम सरकार और इन पार्टियों की भावनाओं को समझते हुए, यह ज़रूर कहेंगे कि इस बुरे प्रचलन को रोकने के लिए एक दूसरे पर आरोप लगाने की बजाय सभी पार्टियों को एकजुट होकर प्रयास करने की ज़रूरत होगी और लोगों के सहयोग से इस ़खतरनाक खेल को हर हाल में रोकना होगा। यदि इस स्तर पर यह बात चल ही पड़ी है तो इसे इसके अंत तक लाने की ज़िम्मेदारी राजनीतिक पार्टियों और समाज के सचेत वर्ग की होनी चाहिए, ताकि इस प्रदेश की परम्परागत आभा पुन: बहाल हो सके।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

