राजू और जादुई बीज
राजू और उसकी मां एक छोटे से मकान में रहते थे। वह बहुत गरीब थे। उनके पास एक अंतिम बकरा बचा था, जिसे बेचने के लिए राजू उसे बाज़ार ले जा रहा था ताकि कुछ दिन के लिए उनकी रोटी का इंतज़ाम हो सके। रास्ते में राजू को एक बुजुर्ग व्यक्ति मिला, जिसने राजू से कहा, ‘मुझे यह बकरा दे दो। बदले में मैं तुम्हें एक जादुई बीज दूंगा जो तुम्हारी सारी आर्थिक तंगी दूर कर देगा।’
राजू को यह सौदा अच्छा लगा। उसने बकरा बुज़ुर्ग व्यक्ति को दे दिया और उनसे जादुई बीज ले लिया। राजू ने घर लौटने के बाद जब इस सौदे के बारे में अपनी मां को बताया तो वह बहुत गुस्सा हुईं और उन्होंने जादुई बीज को खिड़की के बाहर आंगन में फेंक दिया। लेकिन रातभर में ही वह जादुई बीज एक विशाल पेड़ में तब्दील हो गया, जिसकी ऊंचाई बादलों को स्पर्श कर रही थी।
एक दिन अपनी मां से छुपकर राजू उस पेड़ पर चढ़ गया। जब वह पेड़ के ऊपर पहुंचा तो उसने देखा कि बादलों के ऊपर एक महल है। वह महल के अंदर चला गया। उसे महल में कोई दिखायी नहीं दिया लेकिन महल में एक दैत्य अपनी पत्नी के साथ रहता था। राजू महल में इधर-उधर घूम ही रहा था कि उसकी मुलाकात दैत्य की पत्नी से हो गई, जिसने राजू से कहा, ‘अरे तुम यहां कैसे आ गये? क्या तुम्हें डर नहीं लगता? अगर दैत्य ने तुम्हें देख लिया तो वह तुम्हें मार देगा...।’
यह बातें चल ही रहीं थीं कि तभी दैत्य के चिल्लाने की आवाज़ आयी, ‘फी-फी-फ़ो-फुम, मुझे इंसानी खून की गंध आ रही है।’ यह सुनते ही दैत्य की पत्नी ने राजू को महल के स्टोर रूम में छुपा दिया। स्टोर रूम में राजू ने देखा कि अन्य कीमती चीज़ों के साथ एक छोटा सा बॉक्स भी रखा हुआ है। राजू को यह देखकर आश्चर्य हुआ कि बॉक्स पर उसके पिता का नाम लिखा हुआ था। यह वही बॉक्स था जिसके बारे में उसकी मां बताती थीं कि एक दैत्य ने उसे उसके पिता की हत्या करके उसे जबरन छीन लिया था, जिसके बाद उनके ऊपर गरीबी के पहाड़ टूट पड़े थे। राजू ने बॉक्स को खोलकर देखा तो उसके अंदर सोने के सिक्के थे। राजू ने तय किया कि वह अपने पिता का बॉक्स हर कीमत पर वापस लेकर जायेगा।
तभी मानव गंध को सूंघता हुआ दैत्य स्टोर रूम की तरफ बढ़ा। राजू ने जल्दी से बॉक्स उठाया और वह पेड़ की तरफ भागा। दैत्य ने उसे पेड़ से उतरता हुआ देख लिया। राजू का पीछा करते हुए दैत्य भी पेड़ से नीचे उतरने लगा। पेड़ से उतरते ही राजू ने बॉक्स एक तरफ रखा, पास पड़ी कुल्हाड़ी उठायी और पेड़ को काट दिया। पेड़ के साथ दैत्य भी नीचे गिरा और मर गया। अब अपने पिता के खज़ाने के साथ मां बेटा आराम से रहने लगे।
यह कथा हमें सिखाती है बहादुरी, कठिनाई के समय जल्द सही निर्णय लेना और सोच समझकर खतरा मोल लेने से परेशानियां दूर हो सकती हैं। साथ ही यह भी कि अगर आप छोटे या कमज़ोर भी हों तो भी होशियारी से बड़े खतरों पर भी विजय पायी जा सकती है। जब अवसर आता है तो किस्मत भी साहसी व्यक्तियों का ही साथ देती है। -इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर



