वस्तु एवं सेवा-कर की चोरी रोकी जाए
पंजाब सरकार द्वारा जी.एस.टी. अर्थात गुड्स एंड सर्विस टैक्स संग्रहण नेटवर्क में अरबों रुपये की कर-चोरी पकड़े जाने की घटना ने प्रदेश के इलावा राजधानी दिल्ली के लोगों एवं सत्ता तंत्र को भी आश्चर्य-चकित किया है। यह कर-चोरी नेटवर्क इतना विस्तृत और व्यापक है कि इस कृत्य में पांच दर्जन से अधिक फर्में सक्रिय पाई गई हैं। इनमें से 25 कथित फर्मों का संबंध सीधे पंजाब से है, तथा 37 अन्य फर्मों की ज़मीन पंजाब के बाहर के राज्यों से भी जुड़ी हुई पाई गई है। ये सभी फर्में विगत कई वर्षों में इस आपराधिक कार्य-प्रणाली हेतु सक्रिय रही हैं, और वर्तमान में भी इनका कार्य-क्षेत्र विस्तृत होता चला गया है। इनकी इस कार्य-प्रणाली का यह राज़ शायद अभी फाश नहीं होता, यदि प्रदेश के कर सुरक्षा तंत्र द्वारा 2,410.22 करोड़ रुपये की एक अतिरिक्त कर-चोरी का मामला पकड़ा न गया होता।
इस कर-चोरी की जांच शुरू हुई तो मामले के तार इस बड़े जी.एस.टी. नेटवर्क से जुड़े पाये गये। गुड्स एवं सर्विस कर-चोरी का यह मामला कितनी दूर तक गया है, इसका पता इस एक तथ्य से भी चल जाता है कि प्रदेश के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने स्वीकार किया है कि इस कर-चोरी नेटवर्क के तार पंजाब के बाहर दिल्ली, एन.सी.आर. और प्रदेश के कई पड़ोसी राज्यों के साथ भीतर तक जुड़े हुए पाये गये हैं। पंजाब की सरकार ने इस स्कैंडल की व्यापक जांच-पड़ताल के निर्देश दिए हैं। नि:संदेह अभी और कई रहस्योद्घाटनों की सम्भावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। वित्त मंत्री के दावे के अनुसार प्रदेश के सतर्कता एवं निरोधक विभाग (स्टेट इंटेलीजेंस एंड प्रिवेंटिव यूनिट) ने इस संबंध में प्राथमिक चरण पर लुधियाना के कुछ व्यवसायियों और कम्पनी मालिकों के विरुद्ध केस दर्ज कर लिया है। इस संबंध में कई अन्य ट्रांस्पोर्टरों एवं उनके सहयोगियों को भी नामज़द किया गया है। बहुत स्वाभाविक है कि इस मामले के और व्यापक होते जाने की बड़ी सम्भावनाएं मौजूद हैं।
जी.एस.टी. संग्रहण को लेकर विगत कुछ वर्षों से उगाही के आंकड़े बड़ी तेज़ी से बढ़े हैं। केन्द्र सरकार और केन्द्रीय वित्त मंत्रालय ने कई बार यह स्वीकार किया है कि जी.एस.टी. के अन्तर्गत कर-उगाही की राशि निरन्तर बढ़ती गई है। जानकार सूत्रों के अनुसार कर-चोरी की यह राशि और बढ़ने की प्रबल सम्भावना है। इस स्कैंडल की कार्य-प्रणाली कुछ इस प्रकार से संचालित होती रही है कि जिन फर्मों के नाम पर बिल मंगवाया जाता रहा, वे फर्में मौजूद ही नहीं थीं, अथवा उन्होंने इस सामान को अपनाने से ही साफ-साफ इन्कार कर दिया। इस प्रकार फर्जी फर्मों, जाली बिलों और अन्य जाली दस्तावेज़ों के ज़रिये करोड़ों रुपये के गुड्स एवं सर्विस कर की चोरी की जाती रही। इसका सीधा नुक्सान प्रदेश और पूरे देश को होता रहा है। बेशक प्रदेश के कर-ढांचे में चोरी होगी तो केन्द्र से पंजाब को मिलने वाले हिस्से में भी कमी होगी। वैसे भी, विश्व धरातल पर तेज़ी से विकसित हो रहे देश और उसके कर-ढांचे को राज्यों की ओर से चूना लगेगा तो यह कृत्य प्रत्यक्ष राज-द्रोह जैसा कार्य हो जाता है। वित्त वर्ष 2025-26 और 2026-27 में इस नेटवर्क ने अपने जाल को फैलाया है। वित्त मंत्रालय ने इस कर-चोरी राशि का अनुमान 429.30 करोड़ रुपये बताया है। हालांकि इस मामले की जांच आपराधिक जांच ब्यूरो को सौंपे जाने के दृष्टिगत इस राशि के और बढ़ने की बड़ी सम्भावना है।
इस संबंध में वस्तु एवं सेवा कर परिषद् की बैठक से लिये गये कुछ अच्छे फैसलों का भी हवाला दिया जा सकता है। नि:संदेह इतने बड़े स्तर पर चल रहे स्कैंडल के लिए इसी विभाग के कुछ लोग उत्तरदायी हो सकते हैं। परिषद् ने फैसला किया है कि एक सीमा तक कर-चोरी के मामलों का फौरी तौर पर जुर्माना से निपटारा किया जा सकता है। इससे जहां कर चोरी पर अंकुश लगेगा, वहीं मामलों के लम्बा खिंचने की सम्भावना कम होगी। कर-प्रणाली आसान होने से भी कर-चोरी की सम्भावनाएं कम होती हैं। उद्योग एवं व्यवसायी वर्ग की परेशानियां कम होने से भी एक ओर जहां कर-आय बढ़ती है, वहीं कर-चोरी की सम्भावनाएं भी घटती हैं। हम समझते हैं कि वैश्विक धरातल पर तेज़ी से विकसित हो रही देश की अर्थ-व्यवस्था को सुदृढ़ सम्बल प्रदान करने के लिए जहां इस कर के संग्रहण की राशि को और बढ़ाये जाने की बड़ी आवश्यकता है, वहीं ऐसा वातावरण सृजित किया जाना भी बेहद लाज़िमी है कि जहां से व्यापारी, उद्योगपति और व्यवसायी आसानी से यथा-सम्भव और समुचित कर अदायगी हेतु प्रेरित हो सकें। वस्तु एवं सेवा कर विभाग को भी अपने भीतर की दुर्बलताओं को दूर करके, व्यवसायियों के लिए अनुकूल वातावरण सृजित करने हेतु यत्न करना होगा। यह भी ज़रूरी है कि अधिकारी नियमों-कानूनों का पालन करें, और व्यवसायी एवं उद्योगपति राष्ट्र-हित को दृष्टिगत रख कर ही कर-अदायगी पर अमल करें। नि:संदेह यह क्रिया राष्ट्र-हित में समाहित हो सकेगी।

