अमरीका और कनाडा के अपराधी

विगत लम्बी अवधि से कनाडा और अमरीका में किसी न किसी कारण भारत से विभिन्न ढंगों से गए बड़ी संख्या में युवाओं ने इन देशों में भी दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। इनमें बड़ी संख्या में पंजाबी युवक शामिल हैं, जिनकी कार्रवाइयों के कारण वहां बसते लाखों ही पंजाबियों को शर्मिन्दगी उठानी पड़ती है। विगत दिवस कनाडा पुलिस द्वारा फिरौती और गोलीबारी के लगभग 60 मामले दर्ज किए गए, जिनमें ज्यादातर पंजाबी मूल के युवक शामिल हैं। वहां की पुलिस ने इनकी तस्वीरें भी प्रकाशित की हैं, जिसका उद्देश्य वहां के लोगों में इनकी पहचान करना और इनके ठिकानों का पता लगाना है। 
कनाडा में पढ़ाई करने गए और बेहतर भविष्य की उम्मीद में युवाओं का अपराध की दुनिया में प्रवेश करना बेहद चिंताजनक बात है। इस घटनाक्रम ने वहां की सरकार के लिए भी बड़ी चिंता पैदा कर दी है। पिछले महीनों में कनाडा सरकार 100 से भी अधिक भारतीयों को वापस (डिपोर्ट) भेज चुकी है। इससे प्रतीत होता है कि वहां की सरकार ने ऐसे अपराधियों पर कड़ी कार्यवाही करने की योजना बना ली है। जिन गैंगस्टरों के नैटवर्क से जुड़े युवाओं को डिपोर्ट किया गया है, उनका संबंध रंगदारी से जुड़ी गोलीबारी की वारदातों को अंजाम देना है और कुछ लोगों को ज़बरन बंधक बनाना है। इसी क्रम में वहां लारैंस गैंग से संबंधित करनवीर को गिरफ्तार किया है। कनाडा सरकार द्वारा डिपोर्ट करने के बाद उसे दिल्ली एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया था। उस पर हत्या, हथियारों की लूट, ज़बरन वसूली और आम्ज़र् एक्ट के तहत बहुत से गम्भीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। उस पर अमरीका में रहते अनमोल बिश्नोई की सहायता करने और उसे पनाह देने का आरोप है। 
कनाडा में ब्रिटिश कोलम्बिया और टोरांटो क्षेत्र में ऐसे लोग बड़ी संख्या रहते हैं। डिपोर्ट किए गए ज्यादातर आरोपी स्टडी परमिट या अस्थायी रैज़ीडैंट वीज़ा पर गए थे। इनका बड़ा ठिकाना वहां के अल्बर्टा में भी है, जिन पर कपिल शर्मा के रेस्टोरैंट पर गोली चलाने सहित पंजाबी कारोबारियों और परिवारों से रंगदारी मांगने, गोलीबारी करने और आगज़नी करने के आरोप हैं। अमरीका और कनाडा में विगत लम्बी अवधि से अपनी कार्रवाइयों को अंजाम देते हुए गोल्डी बराड़ पर वहां की सरकार ने 10 लाख डॉलर का इनाम रखा है। उसे गैंगस्टर लारैंस बिश्नोई का साथी माना जाता है, जिसके द्वारा अमरीका और कनाडा में हत्या, लूट और फिरौती के अपराधों के कारण वह अमरीका के 10 सबसे अधिक खतरनाक अपराधियों की सूची में शामिल हो गया है। इसी तरह सितम्बर महीने में अमरीका से 6 लाख डॉलर का घोटाला करके वहां से भाग कर भारत आए मनजीत सिंह बेदी को भी अमरीका की जांच एजेंसी ने विशेष अपराधियों की सूची में शामिल किया है, अब उसे ज़िला जालन्धर से गिरफ्तार करके अमरीका वापस भेजा गया है। उस पर आरोप है कि वहां रहते हुए उसने एक वर्ष में 6 लाख अमरीकी डॉलरों की धोखाधड़ी की थी। बेदी के विरुद्ध 21 मई, 2026 को वाशिंगटन की संघीय अदालत ने गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। इसी तरह अमृतपाल सिंह जो रविन्दर ढांडा के अपराधी संगठन के साथ जुड़ा हुआ था, को भी विशेष सूची में शामिल किया गया था। उस पर भी अमरीका, कनाडा और मैक्सिको में कोकीन और मैथाफोटामाइन आदि ड्रग्ज़ की तस्करी के आरोप हैं। उसे भी ़खतरनाक अपराधियों की सूची में शामिल किया गया था।
कनाडा और अमरीका की सरकारों ने इन आपराधिक तत्वों पर पूरी तरह नकेल डालनी शुरू कर दी है, जिससे भारत में भी बड़ी चिंता पाई जा रही है, क्योंकि इन्हें वापस भेजे जाने से संबंधित सरकारों को कानून के अनुसार सख्ती करनी पड़ेगी, परन्तु ऐसे अपराधियों के तार दुनिया भर के देशों से जुड़े हुए होते हैं, जिस कारण इस तरह के अपराधियों के बीच सम्पर्क बना रहता है। एक संयुक्त नीति बना कर इंटरपोल द्वारा ही इन तत्वों पर सख्ती बढ़ाई जा सकती है। पंजाब की पहले ही ऐसे तत्वों की मौजूदगी के कारण हालत बिगड़ी हुई है। यहां की सरकारें अपराधों के इस जाल को कैसे खत्म करने में सफल होंगी, यह देखने वाली बात होगी।

 

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

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