बोर्टल स्केल क्या है?

‘दीदी, आजकल प्रकाश प्रदूषण को कम करने और रात के अंधेरे को सुरक्षित रखने के संदर्भ में बहुत बातें सुनने व पढ़ने को मिलने लगी हैं। मैं यह जानना चाहता हूं कि यह कैसे मालूम होगा कि किस जगह प्रकाश प्रदूषण अधिक है और किस जगह कम?’
‘बोर्टल डार्क-स्काई स्केल से।’
‘क्या है?’
‘यह एक 9-स्तरीय संख्यात्मक पैमाना है, जिससे किसी विशेष स्थान पर रात्रि आकाश की चमक और वहां मौजूद प्रकाश प्रदूषण को मापा जाता है।’
कब और किसने इजाद किया?’
‘इसे शौकिया खगोलशास्त्री जॉन ई बोर्टल ने 2001 में ‘स्काई एंड टेलिस्कोप’ पत्रिका में प्रकाशित किया था।’
‘बोर्टल स्केल का इस्तेमाल अधिकतर कौन करते हैं?’
‘खगोलविद और स्टारगेज़र अपने टेलिस्कोप या फोटोग्राफी की योजना बनाने के लिए इस स्केल का उपयोग करते हैं। दरअसल, श्रेणी 1 उत्कृष्ट डार्क-स्काई के लिए है जो पृथ्वी पर सबसे अंधेरे व साफ आसमान का रूप है। यहां राशिचक्र प्रकाश, एयरग्लो और आकाशगंगा बेहद साफ दिखती है। श्रेणी 2 यानी वास्तविक डार्क साईट पर आकाश में बहुत अंधेरा होता है। आकाशगंगा में कई बारीक संरचनाएं और एम33 जैसी डार्क गैलेक्सी आसानी से नग्न आंखों से दिख जाती है। इन दोनों श्रेणियों का मतलब है गहरा अंधेरा और तारों से भरा साफ आसमान।’
‘भारत में कोई ऐसा स्थान है जहां यह श्रेणियां खरी उतरती हों?’ 
‘लद्दाख के हेनले या स्पीति घाटी जैसी जगहों पर ऐसा आसमान मिलता है।’
‘बाकी सात श्रेणियां कौन सी हैं?’
‘श्रेणी 3- ग्रामीण आकाश, हल्की रोशनी या शहरी चमक क्षितिज पर कम दिखायी देती है। आकाशगंगा अब भी बहुत स्पष्ट होती है। श्रेणी 4- ग्रामीण/उप-शहरी संक्रमण, प्रकाश प्रदूषण थोड़ा बढ़ जाता है। आकाशगंगा के बादल कम स्पष्ट हो जाते हैं। श्रेणी 5- उप-शहरी आकाश, आकाशगंगा केवल क्षितिज के पास या बहुत साफ रातों में दिखायी देती है। आसपास की कृत्रिम रोशनी काफी महसूस होती है। श्रेणी 6- उज्ज्वल उप-शहरी आकाश, आकाशगंगा शायद ही कभी दिखायी देती है। आसमान का रंग हल्का सलेटी या सफेद जैसा हो जाता है। श्रेणी 7- उप-शहरी/शहरी संक्रमण, आसमान पूरी तरह रोशनी से प्रभावित होता है। तारे धुंधले दिखने लगते हैं और आकाशगंगा बिल्कुल नहीं दिखती। श्रेणी 8 (शहर का आकाश) व श्रेणी 9 (अत्यधिक प्रकाशित शहर) का अर्थ है भारी प्रकाश प्रदूषण और न के बराबर तारों का दिखना।’ -इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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