उचित ढंग से चल रहा धान और बासमती का मंडीकरण

इस वर्ष धान और बासमती की फसल भरपूर है। कृषि और किसान कल्याण विभाग के निदेशक डॉ. गुरजीत सिंह बराड़ के अनुसार उत्पादन 220 लाख टन से ज़्यादा होने का अनुमान है। गत वर्ष यह 180 लाख टन था। डॉ. बराड़ के मुताबिक प्रति हेक्टेयर उत्पादन 8 क्विंटल से अधिक आ रहा है, चाहे कुछ प्रगतिशील किसान 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन अधिक ले रहे हैं। फसल काटने के प्रयोग बताते हैं कि इस वर्ष उत्पादन 67.35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर आया है जबकि गत वर्ष यह 58.6 क्विंटल था। धान की काश्त 32.5 लाख हेक्टेयर से ज़्यादा रकबे में हुई है। इसमें से लगभग 6.80 लाख हेक्टेयर रकबे में खुशबूदार बासमती की काश्त हुई। किसानों को धान का दाम एमएसपी पर 2461 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है और पूसा बासमती-1121 किस्म 5000 रुपये प्रति क्विंटल तथा पूसा बासमती-1509 किस्म की फसल 4300-4500 रुपये प्रति एकड़ बिक रही है। 
किसानों को यह दाम पिछले वर्षों से ज़्यादा मिल रहा है। उन्हें बासमती का औसतन 1 लाख रुपये प्रति एकड़ और धान की 80 हज़ार रुपये प्रति एकड़ से ज़्यादा मिल रहा है। एक अनुमान के अनुसार आगामी वर्ष धान और बासमती की काश्त का रकबा बढ़ कर 35 लाख हेक्टेयर से ज़्यादा होने की संभावना है, क्योंकि किसान वही फसल बोने को प्राथमिकता देते हैं, जिससे उन्हें अधिक मुनाफा होता है, जबकि अभी तक कोई ऐसी फसल विकसित नहीं की जा सकी, जिसका लाभ धान के बराबर या उससे ज़्यादा हो। इसमें कोई संदेह नहीं कि इस साल नरमा-कपास के उत्पादन में भी कुछ वृद्धि हुई है, परन्तु इसकी काश्त के अधीन मौजूदा रकबा ही कायम रहने की उम्मीद है। धान और बासमती के उत्पादन में बढ़ोतरी का कारण इस साल बीमारियों का कम आना, किसानों को शुद्ध कीटनाशक उपलब्ध होना, ट्यूबवेलों को 8 घंटे प्रतिदिन बिजली मिलना, नहर के पानी से सिंचाई का बढ़ना और सबसे अधिक मौसम का लगभग अनुकूल रहना है। आईसीएआर-इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीच्यूट (आईएआरआई) की बासमती की पूसा बासमती-1121, पूसा बासमती-1509 और धान की पूसा-1824 किस्मों की काश्त बड़े रकबे में की गई है। संस्था के संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डॉ. विश्वानाथन सी. कहते हैं कि पूसा द्वारा विकास अधीन धान और बासमती की कुछ ऐसी किस्में हैं, जिनका उत्पादन मौजूदा किस्मों से ज़्यादा होगा। ऐसी कुछ किस्मों पंजाब में पटियाला ज़िले के बिशनपुर छन्ना के प्रगतिशील किसान राजमोहन सिंह कालेका के फार्म पर परीक्षण अधीन हैं, जो बहुत अच्छा उत्पादन दिखा रही हैं। 
इस वर्ष केंद्र ने पंजाब के धान की खरीद का जो लक्ष्य रखा था, वह दो बार बढ़ाने के बावजूद अब अपर्याप्त है, जिसमें और वृद्धि करनी पड़ेगी। इसके लिए पंजाब सरकार को केंद्र से मांग करनी पड़ेगी, क्योंकि सरकारी खरीद के लिए नकदी की सीमा भी बढ़ाने की ज़रूरत है, जिसे केंद्र ही बढ़ा सकता है। चावल के भंडारण का भी उचित प्रबंध करना पड़ेगा, क्योंकि पिछले वर्षों का स्टॉक भी अभी पड़ा है। इस समय धान और बासमती की कटाई ज़ोरों पर है और किसानों को मंडीकरण में भी कोई खास मुश्किल नहीं आ रही। पंजाब आढ़ती एसोसिएशन के उपाध्यक्ष और आढ़ती एसोसिएशन पटियाला के अध्यक्ष देवी दयाल का कहना है कि किसानों को फसल का भुगतान भी लगभग समय पर किया जा रहा है। 
बासमती का निर्यात मध्य-पूर्व देशों जो युद्ध से प्रभावित हैं, में बढ़ने से यह पहली बार है कि पंजाब की मंडियों में बासमती, विशेषकर पूसा बासमती-1509 और पूसा बासमती-1121 बेचने में किसानों को कोई मुश्किल नहीं आई। आगामी वर्ष बासमती की काश्त का रकबा बढ़ने की भी सम्भावना है और भारत से बासमती का निर्यात जो गत वर्ष 50 हज़ार करोड़ रुपये का था, उसके और बढ़ने की उम्मीद है। 
चाहे इस वर्ष भी पराली तथा अन्य अवषेश को जलाने के मामले सामने आए हैं, परन्तु फिर भी धीरे-धीरे पराली न जलाने की बात आगे बढ़ रही है। अब पराली की गांठें बांध कर ले जाने वाले खेतों के आस-पास घूम रहे हैं। किसान भी एसएमएस कंबाइनों से धान की फसल कटवा कर अवशेष और पराली को खेत में जोत कर ज़मीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए उत्साहित हो रहे हैं। इसलिए सरकार हैप्पी सीडर और सुपर सीडर आदि मशीनें भी भारी सब्सिडी पर दे रही है। 
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