सर्दी को सुखद बनाएं


सभी मौसम सुहाने होते हैं। सर्दी का मौसम भी उनमें से एक है। मौसम का साधारण रूप सबको प्रिय होता है किन्तु उसकी तीव्रता कुछ लोगों को परेशान कर देती है। यही ठंड के मौसम में भी होता है। तेज ठंड पड़ने की स्थिति में यदि अपनी दिनचर्या एवं खानपान को समुचित बदल दिया जाए तो कड़ाके की ठंड भी सुखद बन सकती है। यह मौसम कुछ रोग एवं रोगियों के लिए परीक्षा की घड़ी के समान होता है। जरा सी लापरवाही बरतने पर बच्चे से लेकर बूढ़े तक इसकी चपेट में आ जाते हैं।
सर्दी लगना:- सर्दी के मौसम में सर्दी लगना, सर्दी जुकाम एवं खांसी होना साधारण सी बात है। ठंड से बचाव का उपाय नहीं करने पर इन्हीं सब का हम पर सबसे पहले आक्रमण होता है। गर्म स्थान एवं गर्म कपड़ों को त्याग कर बाहर खुले में ठंडे स्थान में आने पर छीकें आने लगती हैं एवं नाक बहने लगती है। बचाव नहीं करने पर यह तीव्र होकर सुख चैन छीन लेता है।  गर्मागर्म सूप या दूध पिएं। अदरक वाली चाय या अदरक की चटनी खाएं। 
हार्ट अटैक:- ठंड के मौसम में तापमान में कमी होने के कारण नसें सिकुड़ जाती हैं जिससे हृदय रोगियों को हार्ट अटैक का खतरा 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। नसों के सिकुड़ने से रक्त प्रवाह में होने वाली परेशानी का भार हृदय पर पड़ता है जिसके कारण अटैक की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे मरीज निर्धारित दवा एवं सावधानी का पालन करें। खानपान में तेल, घी, नमक अत्यन्त कम हो। धूम्रपान नशापान न करें। तली-भुनी चीज़ें न खाएं। हल्का-फुल्का व्यायाम करें। बचाव उपाय कर ठंड में निकलें। ठंडे पानी के स्थान पर गुनगुने पानी से नहाएं। 
ब्रेन अटैक:- ठंड के मौसम में खूब खाने पीने का मन करता है जिससे हम तली-भुनी व चटपटी चीजें खाने लगते हैं। तन में आलस समा जाता है और खूब सोने का मन करता है। यही सब मिलकर रक्तचाप बढ़ने एवं रक्त थक्का जमने का कारण बनता है। इसकी अधिकता की स्थिति में ब्रेन अटैक (मस्तिष्क आघात) होता है। मस्तिष्क की नसें फैल जाती हैं, फट जाती हैं या खून जम जाता है। अतएव हृदय से संबंधित मामलों के मरीज तेल, घी, नमक, शक्कर, धूम्रपान, नशापान की मात्र अत्यंत कम कर दें। 
आर्थराइटिस:- ठंड में तापमान गिरने पर मांसपेशियों में जकड़न होने से दर्द होता है एवं हड्डी के जोड़ों में भी दर्द होता है। कुछ लोगों को इन दर्द वाले जोड़ों में सूजन हो जाती है। यह खिंचाव एवं जकड़न सभी को हो सकता है किन्तु वृद्धों को इस मौसम में ऐसी परेशानी बढ़ जाती है। बच्चे खेलते रहते हैं एवं बड़े काम करते हैं इसलिए उनको यह पीड़ा कम होती है। व्यायाम, धूप सेवन, मालिश, गुनगुने पानी से नहाने या जोड़ों की गर्म पानी से सिंकाई करने पर यह परेशानी कम हो जाती है। ऐसे मौसम में भारी भोजन से बचें।
अस्थमा:- सांस संबंधित रोगियों की परेशानी ठंड में बढ़ने लगती है। ठंड के कारण सांस नली के सिकुड़ने से यह समस्या और बढ़ जाती है और सांस लेने में दिक्कत होती है। दमा पीड़ितों को दौरा पड़ता है। सांस के ऐसे रोगी तेज ठंड एवं धुंध में जाने से बचें। दमे के दौरे से बचने हेतु इनहेलर का उपयोग करें। ताजा सादा गर्म एवं हल्का भोजन करें। ठंडी व खट्टी चीजों से बचें। हल्का-फुल्का व्यायाम करें।
डायबिटिज:- मन खाने को अधिक करता है। भोजन पचता भी जल्द है इसलिए लोग बेरोक-टोक डट कर खाते हैं। यही खर्च के अभाव में शुगर के लेवल को बढ़ा देता है। अतएव मधुमेह के मरीज सीमित मात्रा में खाएं। श्रम करें एवं निर्धारित दवा का सेवन करें। अनुशासन का पालन करें।  शुगर लेवल के बढ़ने के खतरों से बचें।
ब्लड प्रेशर:- ठंडे पानी से नहाने, व्यायाम नहीं करने एवं डटकर खाने से बी.पी. बढ़ जाता है। बी.पी. का बढ़ना हृदय के खतरों को बढ़ाता है। अतएव वसा की अधिकता वाली तली भुनी एवं भारी चीजें न खाएं। श्रम करें। गुनगुने पानी से नहाएं। डॉक्टर के निर्धारित एवं बताएं निर्देश का पालन करें। (स्वास्थ्य दर्पण)
-सीतेश कुमार द्विवेदी