भाजपा के नए अध्यक्ष का चयन

नितिन नबीन को भारतीय जनता पार्टी का औपचारिक रूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया है। इससे पहले उन्हें 14 दिसम्बर को कार्यकारी अध्यक्ष घोषित किया गया था। उस समय वह बिहार में मंत्री के रूप में काम कर रहे थे। भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष बनाना कई पक्षों से बहुत अहम माना जाने लगा है। यह पार्टी देश के ज्यादातर प्रदेशों में शासन कर रही है। यह केन्द्र में तीसरी बार सरकार बनाने में सफल रही है परन्तु इसके साथ ही यह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में बड़ी पार्टी बन कर उभरती रही है। ऐसी प्रभावशाली पार्टी के अध्यक्ष पर सभी की नज़रें केन्द्रित  होना स्वाभाविक है। जहां तक नितिन नबीन का संबंध है, उनके चयन से कुछ महत्त्वपूर्ण नुक्ते और भी उभरे हैं।
नितिन छोटी उम्र से ही पार्टी के व़फादार सिपाही रहे हैं परन्तु वह विगत अवधि के दौरान बिहार की राजनीति में ही सक्रिय रहे। राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान नहीं थी। बिहार में वह 5 बार लगातार विधायक चुने जाते रहे। प्रदेश में उनकी प्रतिभा की बड़ी पहचान बनी रही। वहीं उन्हें मंत्रिमंडल में स्थान भी मिला। बिहार की जीत में भी नितिन नबीन की अहम भूमिका रही थी। वह लगातार पार्टी के आदर्शों को समर्पित रहे। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर उन्होंने कहा कि वह ऐसे राजनीतिक दल के साथ जुड़े हुए हैं, जहां राजनीति सत्ता नहीं, साधना है, राजनीति भोग नहीं, त्याग है, राजनीति ऐशो-आराम नहीं, तपस्या है, राजनीति कोई पद नहीं, ज़िम्मेदारी है। नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की उम्र मात्र 45 वर्ष है। भारतीय जनता पार्टी का गठन 1980 में हुआ था। नितिन 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उनसे पहले अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण अडवानी, मुरली मनोहर जोशी, नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह, अमित शाह और जे.पी. नड्डा जैसे उच्च कोटि के राजनीतिज्ञ इस पद पर रहे हैं। इसलिए इस बार एक प्रादेशिक नेता का इस पद पर चुना जाना आश्चर्यजनक ज़रूर कहा जा सकता है। नि:संदेह इसके लिए भाजपा नेतृत्व की प्रशंसा करनी बनती है, कि उन्होंने निचले स्तर के नेता को पार्टी का उच्च पद प्रदान किया है।
आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह का पार्टी में विशेष प्रभाव माना जाता है। इस चुनाव में इन दोनों व्यक्तियों की बड़ी भूमिका कही जा सकती  है। चाहे इस पद के लिए चुनाव की प्रक्रिया निचले स्तर से शुरू नहीं हुई परन्तु इसके बावजूद इस चुनाव की इस पक्ष से प्रशंसा की जानी बनती है कि यह चुनाव किसी स्थापित राजनीतिक परिवार से नहीं हुआ। आजकल बड़ी-छोटी राजनीतिक पार्टियों में आम तौर पर परिवारवाद की परम्परा को ही प्राथमिकता दी जाती है, परन्तु भाजपा ने ऐसा नहीं किया, जिस कारण इस चयन से भाजपा के प्रभाव में और भी वृद्धि हुई है। यह नए अध्यक्ष पार्टी को आगे बढ़ाने में कितने सहायक होंगे, यह आगामी समय में ही देखा जाएगा।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

#भाजपा के नए अध्यक्ष का चयन