अमरीका और यूरोपियन संघ का टकराव
स्विट्ज़रलैंड के प्रसिद्ध शहर दावोस में विश्व आर्थिक फोरम की वार्षिक बैठक हो रही है, जिसमें विश्व भर के देश भाग ले रहे हैं। एक तरह से आज दावोस पर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर नज़रें केन्द्रित हैं। विगत बुधवार को अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यहां सम्बोधित करते हुए फिर दोहराया कि उत्तरी अमरीका के साथ लगते बर्फ से ढके विश्व के सबसे बड़े द्वीप ग्रीनलैंड को वह अमरीका का हिस्सा बनाएंगे। इससे पहले अमरीकी राष्ट्रपति ने कई बार यह भी बयान दिए थे कि वे अपने पड़ोसी विशाल क्षेत्रफल वाले देश कनाडा को अमरीका का 51वां प्रदेश बनाएंगे। ट्रम्प दूसरी बार अमरीका के राष्ट्रपति बने हैं। मात्र एक वर्ष की अवधि में उन्होंने अपने बड़बोलेपन और कार्रवाइयों से एक तरह से विश्व में हड़कम्प मचा दिया है और इसी ही अवधि में उन्होंने वेनेजुएला पर भी एक तरह से कब्ज़ा ही कर लिया है।
ईरान के साथ वह अब तक कई बार टकराव पैदा कर चुके हैं। अमरीकी टैरिफ के नाम पर उन्होंने अब तक विश्व के अधिकतर देशों पर अपना दबाव बनाने का यत्न किया है। चाहे वह कई बार भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा भी करते रहे हैं परन्तु भारत पर भी वह टैरिफ के मामले में लगातार अपना दबाव बना रहे हैं। चाहे अब तक वह ‘अमरीका फर्स्ट’ का नारा ज़रूर लगाते रहे हैं, परन्तु अपनी कार्रवाइयों से वह अमरीका को अलग-थलग करने के ज़िम्मेदार बने नज़र आ रहे हैं। कनाडा सैकड़ों वर्षों से उनका अच्छा दोस्त और हमस़फर बना रहा है। यूरोप के दर्जनों ही देश अमरीका का दम भरते रहे हैं और हमेशा उसके साथ सहयोग को प्राथमिकता देते रहे हैं, परन्तु पहले टैरिफ और अब ग्रीनलैंड के सवाल पर यूरोप भर में अमरीका के प्रति खटास पैदा हो रही है। दावोस में ग्रीनलैंड पर अपना दावा जताने के बाद यूरोपियन संघ के 27 देशों ने उनके विरुद्ध कड़ा रुख अपनाने की घोषणा कर दी है।
विगत वर्ष जुलाई माह में यूरोपियन यूनियन के साथ अमरीका का लम्बी वार्ता के बाद व्यापार समझौता सफल हुआ था। अब ट्रम्प से नाराज़ और निराश हो कर यूरोपियन संघ ने अमरीका के साथ हुए व्यापारिक समझौते को रद्द करने की घोषणा कर दी है। ग्रीनलैंड सैकड़ों वर्षों से यूरोपियन देश डैनमार्क का हिस्सा रहा है। डैनमार्क यूरोपियन संघ का सदस्य देश है। उनकी साझी यूरोपियन संसद भी बनी हुई है, जिसने ट्रम्प के इस कदम को यूरोपियन संघ की आर्थिक और क्षेत्रीय प्रभुसत्ता पर हमला करार दिया है। इससे पहले ही ज्यादातर यूरोपियन देशों ने ट्रम्प द्वारा दिए जाते लगातार बयानों पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया प्रकट की थी। 8 यूरोपियन देशों ने तो ट्रम्प की धमकियों के दृष्टिगत ग्रीनलैंड में अपने-अपने देश की कुछ सैन्य टुकड़ियां भी भेज दी थीं, जिससे ट्रम्प और भी आग-बबूला हो गए थे।
पैदा हुए इस बड़े विवाद के बाद बनी गम्भीर स्थिति के दृष्टिगत यदि ट्रम्प ग्रीनलैंड को हथियाने संबंधी अपने कदम आगे बढ़ाते हैं, तो इससे एक और बड़ा युद्ध छिड़ने का ़खतरा पैदा हो सकता है, जिसे किसी भी तरह अमरीका और विश्व के अन्य देशों के हित में नहीं कहा जा सकता। आज अमरीका में भी ट्रम्प की ऐसी कार्रवाईयों के विरुद्ध भारी रोष पैदा होना शुरू हो गया है। नि:संदेह ऐसी स्थिति अमरीका जैसे शक्तिशाली और विशाल देश के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण सिद्ध होगी।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

