लम्बी तनातनी के बाद आखिर भारत-अमरीका के बीच हुई ट्रेड डील
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से फोन पर वार्ता करने के बाद अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारतीय सामान पर टैरिफ में कटौती करने की घोषणा की है, जो अब 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दी गई है। यह भारत व अमरीका के बीचे फिर से रिश्ते बेहतर होने का संकेत है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह कहते हुए इस घोषणा का स्वागत किया है कि ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों को अब कम टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने इस फैसले के लिए राष्ट्रपति ट्रम्प का शुक्रिया अदा किया। अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा कि टैरिफ में यह कटौती भारतीय प्रधानमंत्री के आग्रह पर की गई है और यह दोस्ती व सम्मान को प्रतिबिम्बित करती है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि काफी समय से लम्बित पड़ा भारत-अमरीका व्यापार समझौता अब मुक्कमल हो गया है, बावजूद इसके कि पहले कुछ असहमतियां थीं, विशेषकर कृषि को लेकर। इसके अतिरिक्त ट्रम्प का यह भी कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी रूस से तेल खरीदारी बंद करने पर सहमत हो गये हैं और अपने आयात अमरीका व वेनेजुएला की तरफ शिफ्ट करेंगे। जुर्माने के तौर पर जो अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया था, उसे भी खत्म कर दिया गया है।
टैरिफ राहत व नीति स्पष्टता से उम्मीद है कि 2026 में निर्यात में सतत रिकवरी संभव हो सकेगी। इसलिए भारत के निर्यातक अब अमरीकी खरीदारों से मांग में संभावित वृद्धि के लिए तैयारी कर रहे हैं। गौरतलब है कि वाशिंगटन व नई दिल्ली के बीच राजनीतिक व आर्थिक तनाव के कारण व्यापार समझौता 2025 के मध्य से लटका हुआ था और फिर अमरीका ने 27 अगस्त 2025 से भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ थोप दिया, जिसमें 25 प्रतिशत जुर्माने के तौर पर था, रूस से तेल खरीदने की वजह से। इस बेतुके 50 प्रतिशत टैरिफ से भारतीय निर्यातकों पर कुप्रभाव पड़ रहा था। अब सबकुछ पहले जैसा होने की उम्मीद है लेकिन व्यापार विशेषज्ञ सावधानी बरतने को कह रहे हैं; क्योंकि समझौता लागू करने के विस्तृत विवरण की अभी प्रतीक्षा है। उनका कहना है कि पिछला अनुभव बताता है कि विवाद बहुत जल्दी फिर से उभर सकता है। हालांकि समझौता प्रगति का संकेत है, लेकिन पुन: तनाव को रोकने के लिए निरंतर डायलॉग आवश्यक है।
नई दिल्ली व वाशिंगटन पिछले साल फरवरी से द्विपक्षीय व्यापार समझौत (बीटीए) करने का प्रयास कर रहे थे ताकि 2030 तक 500 बिलियन डॉलर का व्यापार हो सके, जो वर्तमान में 191 बिलियन डॉलर का है। अमरीका भारत का सबसे बड़ा व्यापार पार्टनर है कि भारत जो कुल निर्यात करता है उसका लगभग 20 प्रतिशत अमरीका जाता है और द्विपक्षीय व्यापार का मूल्य 131.84 बिलियन डॉलर है। कुछ दिन पहले भारत ने यूरोपीय संघ से मुक्त व्यापार समझौता किया था। इस प्रकार भारत के अब संसार के दो बड़े व्यापार ब्लॉकों से समझौते हो गये हैं। ऐसा राष्ट्र के आर्थिक इतिहास में पहली बार हुआ है। ज़ाहिर है इस खबर से भारतीय स्टॉक्स में उछाल आने की उम्मीद है और रुपये के मूल्य में भी सुधार आ सकता है। टेक्सटाइल, सी-फूड आदि निर्यातकों ने तुरंत संतोष व्यक्त किया है और वह आशा कर रहे हैं कि अमरीका को उनका निर्यात फिर से पहले जैसा हो जायेगा। यहां यह बताना आवश्यक है कि पिछले 12 माह में भारत ने पांच व्यापार समझौते किये हैं- अमरीका, इंग्लैंड, यूरोपीय संघ, ओमान और न्यूज़ीलैंड। ऐसा प्रतीत होता है कि भारत जो अपने लिए नये बाज़ार तलाश करने में कामयाब हो रहा था व चीन से भी रिश्ते सामान्य होने की संभावना बढ़ रही थी, उसके दबाव में अमरीका ने व्यापर समझौते किया।
भारतीय समय के अनुसार सोमवार (2 फरवरी 2026) की रात को ट्रम्प ने ट्रूथ सोशल पर पोस्ट किया, ‘प्रधानमंत्री मोदी से दोस्ती व सम्मान और उनके आग्रह पर, तुरंत प्रभाव से हम यूएस व भारत के बीच व्यापार समझौते पर सहमत हो गये हैं, जिसके तहत यूएस कम रेसिप्रोकल टैरिफ चार्ज करेगा, 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत।... इसी तरह वह (भारत) भी यूएस के खिलाफ टैरिफ व ़गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करेंगे, शून्य तक।’ ट्रम्प की पोस्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा, ‘अपने दोस्त राष्ट्रपति ट्रम्प से आज बात करके अच्छा लगा। खुशी है कि मेड इन इंडिया प्रोडक्ट्स पर अब 18 प्रतिशत का कम टैरिफ लगेगा। इस शानदार घोषणा के लिए भारत के 1.4 बिलियन लोगों की तरफ से राष्ट्रपति ट्रम्प को बहुत-बहुत शुक्रिया। जब दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र मिलकर काम करते हैं, तो इससे हमारे लोगों को फायदा होता है और लाभकारी आपसी सहयोग के लिए अपार अवसर खुल जाते हैं।’
हालांकि भारत की तरफ से अभी इस व्यापार समझौते का खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन अमरीका की एग्रीकल्चर सेक्रेटरी ब्रूक रोल्लिंस ने कहा है कि अमरीका भारत को अधिक कृषि उत्पाद निर्यात करेगा, जिससे ग्रामीण अमरीका में ज्यादा कैश आ सकेगा। उनके अनुसार 2024 में भारत के साथ अमरीका का कृषि व्यापार घाटा 1.3 बिलियन डॉलर था, जो इस समझौते से काफी कम हो जायेगा। वह इसे ‘अमरीका की पहली जीत’ बता रही हैं। यह सही है कि एक साल के गंभीर तनाव के बाद भारत व अमरीका के बीच व्यापार समझौता होने की घोषणा से दोनों देशों में उत्साह है और निर्यातकों ने राहत की सांस ली है, लेकिन विस्तृत एफटीए, भारतीय निवेश के वायदे, रूसी तेल, चाबहार पोर्ट आदि से संबंधित प्रश्न अभी भी अनुत्तरित हैं।
फिलहाल बस इतना स्पष्ट हो सका है कि ट्रम्प ने 25 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है, जो पाकिस्तान (19 प्रतिशत) व बांग्लादेश (20 प्रतिशत) से भी कम है और रूसी तेल खरीदने पर जो अतिरिक्त 25 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया था, उसे हटा लिया गया है। समझौते की विस्तृत जानकारी तो जल्द सामने आ जायेगी, लेकिन यह स्वागतयोग्य कदम है कि भारत व अमरीका के संबंधों में सुधार के संकेत मिल रहे हैं और वह मिलकर साथ काम करने को तैयार हैं।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर



