अमरीका-भारत व्यापार समझौता
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने विश्व भर से अपने देश में आने वाले माल पर ऐसा कर (टैरिफ) लगाने की घोषणा की है, जिससे विश्व भर में एक तरह से हड़कम्प मचा हुआ दिखाई देता है। अमरीका आज महाशक्ति है, उसके द्वारा उठाए गए कदमों का शीघ्र प्रभाव छोटे देशों पर पड़ता है। वर्ष भर से राष्ट्रपति के पद पर बैठे ट्रम्प की नीतियों का अमरीकी लोगों पर भी बड़ा प्रभाव पड़ा है। इनमें बहुसंख्या में लोग ट्रम्प की इन नीतियों के विरुद्ध खड़े दिखाई दे रहे हैं। क्रियात्मक रूप में इसका प्रभाव यह पड़ा है कि वहां ज्यादातर वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हैं। आम लोग इस स्थिति को एक जकड़न की भांति महसूस कर रहे हैं। भारत संबंधी डोनाल्ड ट्रम्प ने अब तक अनेक बार बयान दिए हैं। यहां तक कि उन्होंने भारत पाकिस्तान के बीच हुए संक्षिप्त युद्ध को रुकवाने में भी अपना बड़ा योगदान होने का दावा किया है।
अपने देश को होने वाले निर्यात पर उन्होंने ऐसे टैरिफ (टैक्स) लगाए कि ज्यादातर देशों के लिए अमरीका के साथ व्यापार करना ही मुश्किल हो गया। उन्होंने रूस पर 50 प्रतिशत, ब्राज़ील पर 50 प्रतिशत, दक्षिण अफ्रीका पर 30 प्रतिशत और चीन पर 34 प्रतिशत टैक्स लगाने की घोषणा की थी। इसी क्रम में उन्होंने भारत पर 25 प्रतिशत टैक्स लगाने की घोषणा की थी परन्तु बाद में भारत द्वारा रूस से अधिक से अधिक कच्चा तेल खरीदने की नीति के कारण उन्होंने यह टैरिफ 25 से बढ़ा कर पैनल्टी के रूप में 50 प्रतिशत कर दिया था। इससे विगत 10 महीनों से दोनों देशों में आपसी व्यापार बहुत सीमा तक कम हो गया था। इस टैरिफ युद्ध से पहले अमरीका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक मित्र रहा है। इसलिए भारत के समक्ष भी इस तरह बढ़े टैरिफ से बेहद मुश्किलें खड़ी हो जाना स्वाभाविक था, परन्तु महीनों की लम्बी कशमकश के बाद विगत दिवस अमरीकी राष्ट्रपति द्वारा इस टैरिफ को कम करने की घोषणा ने दोनों देशों के आपसी व्यापार में पुन: बड़ी उम्मीद पैदा की है। चाहे अब घोषित इस समझौते के प्रारूप का पूरा विवरण तो अभी सामने नहीं आया परन्तु ट्रम्प के दावे के अनुसार अब भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा और अमरीका द्वारा अपने अधीन किए देश वेनेजुएला से इसकी पूर्ति करेगा। ऐसी स्थिति में उसने पैनल्टी के रूप में भारत पर लगाए 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ से भारत को छूट दे दी है और नये समझौते के अनुसार अब यह टैरिफ 25 से भी कम करके 18 प्रतिशत करने की घोषणा की गई है। अमरीका ने दक्षिण कोरिया पर 25 प्रतिशत, बांग्लादेश पर 20 प्रतिशत और पाकिस्तान पर 19 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है।
अब भारत पर 18 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा से दोनों का व्यापार और भी बढ़ जाने की सम्भावना प्रकट की जा रही है। यह भी कहा गया है कि इस नीति से यह व्यापार वर्तमान में 191 बिलियन डॉलर (17,23,775 करोड़ रुपये) से बढ़ कर वर्ष 2030 तक 500 बिलियन डॉलर (45,12,500 करोड़ रुपये) हो जाएगा। भारत-अमरीका व्यापार समझौते में कृषि क्षेत्र में आयात-निर्यात भी बड़ी बाधा बना रहा है। अब पहले की रिपोर्टों के अनुसार भारत अमरीका से 46 लाख करोड़ की वस्तुएं खरीदेगा, जिसमें ऊर्जा और कृषि उत्पाद भी शामिल होंगे। यह भी कि भारत इस समझौते के तहत अपने पुराने मित्र रूस के साथ तेल व्यापार बंद कर देगा। चाहे केन्द्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इसे ऐतिहासिक समझौता कहा है और यह भी दावा किया है कि इस समझौते से किसानों, छोटे और मध्यम व्यापारियों और प्रतिभावान श्रमिकों के लिए नये अवसर खुलेंगे, परन्तु इस समझौते का समूचा विवरण सामने आने के बाद ही इसका पूरा-पूरा लेखा-जोखा किया जा सकेगा, परन्तु फिलहाल इसे भारत के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है।
विगत एक वर्ष में भारत ने 5 बड़े व्यापारिक समझौते किए हैं, जिनमें अमरीका के अतिरिक्त इंग्लैंड, यूरोपीय संघ, ओमान और न्यूज़ीलैंड आदि देशों के साथ हुए व्यापार समझौते शामिल हैं। भारत सरकार का मुख्य लक्ष्य ‘मेक इन इंडिया’ ही बना रहा है। नि:संदेह ये समझौते इस नीति के तहत भारत के लिए बड़े मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं, जिनसे विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेज़ी के साथ बढ़ा जा सकता है। इस समझौते का पूरा लेखा-जोखा तो किया जाना शेष है, परन्तु यह उम्मीद की जा रही है कि ये समझौते भारत की बढ़ती शक्ति का प्रमाण बनने के समर्थ हो सकते हैं।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

