लम्बे समय के विकास को प्राथमिकता देने वाला बजट

बजट किसी भी देश की वित्तीय स्थितियों और लेन-देन का आईना होता है। बजट एक ओर जहां सम्बद्ध देश के आम लोगों की आर्थिकता को लक्षित करता है, वहीं देश में हुए विकास और सुधार हेतु योजनाओं एवं कार्यक्रमों को भी प्रत्यक्ष लाता है। इस संदर्भ में विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के आगामी वित्त वर्ष हेतु बजट का प्रस्तुत होना सत्य में और सदैव एक अभूतपूर्व एवं दुर्लभ आयोजन जैसा होता है। बजट के महत्त्व को इस एक तथ्य से भी समझा जा सकता है कि यह पहली बार है कि जब यह बजट रविवारीय अवकाश होने के बावजूद लोकसभा में प्रस्तुत किया गया। देश की लोकसभा में वर्ष 2026-27 के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत किया गया यह बजट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार की तीसरी पारी का यह तीसरा वार्षिक बजट है। आंकड़ों के हिसाब से वर्ष 2014 में सत्तारूढ़ हुई प्रधानमंत्री मोदी की भाजपा नीत सरकारों में वित्त मंत्री सीतारमण ने रिकार्ड 9वीं बार बजट प्रस्तुत कर एक रिकार्ड कायम किया है जो सचमुच देश और समाज के सभी वर्गों और आम लोगों के समन्वित विकास का सूचक बन कर सामने आया है। देश के कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के दृष्टिगत भी मौजूदा बजट कृषि से लेकर उद्योग तक और शिक्षा, स्वास्थ्य से लेकर व्यापार तक, सभी के लिए सुविधाजनक स्थितियों के प्रसार को निहित करके बनाया गया बजट प्रतीत होता है।
वर्ष 2026-27 के वार्षिक बजट में बेशक न तो किसी बड़ी राहत की लोक -लुभावन घोषणा की गई है, और न कोई दावा अथवा वायदा किया गया है, किन्तु बजट को देश की युवा शक्ति और महिला वर्ग की भावी कल्पनाओं को ऊंची उड़ान हेतु सशक्त पंख प्रदान करने की दिशा में केन्द्रित रखने का दावा अवश्य किया गया है। बजट को प्रस्तुत किये जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी जहां बजट को आत्म-निर्भर भारत के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु एक कदम और आगे बढ़ने जैसा बताया है, वहीं उन्होंने इसे कई पक्षों से ऐतिहासिक भी करार दिया है। देश की आज़ादी के बाद के अगले पांच दशक तक बजट को सदैव महंगाई और मूल्यों को बढ़ाये जाने वाला समझा जाता रहा है, किन्तु यह पहली बार है जब बजट पेश किये जाने से पूर्व और तत्काल बाद सोने-चांदी सहित कई धातुओं और मोबाइल जैसे कई इलैक्ट्रानिक उपकरणों की कीमतों में कमी आई है। 
वर्ष 2026-27 के 53.5 लाख करोड़ रुपये के बजट में न तो कोई नया टैक्स लगाया गया है और न ही किसी पुराने टैक्स में कोई वृद्धि की गई है। इस बजट में कुल पूंजीगत खर्च 12.2 लाख करोड़ रुपए होगा, जिसे कुल राजस्व खर्च 41.25 लाख करोड़ रुपए निर्धारित किया गया है। इसमें शुद्ध कर टैक्स प्राप्तियां 28.7 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया गया है। इस तरह बजट में सरकारी (राजकोषीय) घाटा 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि चालू वित्तीय वर्ष का घाटा 4.4 रहने की उम्मीद है। आयकर में कोई नई छूट नहीं दी गई जबकि पिछले बजट में 12 लाख की आय को टैक्स मुक्त कर दिया गया है। आयकर रिटर्न भरने को आसान बनाने के लिए एक अप्रैल से एक नये संशोधित कानून को अस्तित्व में लाने की घोषणा ज़रूर की गई है। इससे रिटर्न भरने की अंतिम तिथि अब 31 दिसम्बर से 31 मार्च तक बढ़ा दी गई है।
 हम समझते हैं कि बजट में, कैंसर और कुछ अन्य जीवनोपयोगी दवाओं की कीमतें अवश्य कम करने की घोषणा की गई है जो एक अच्छी पहल है। विश्व धरा पर चल रहे कुछ युद्धों और भविष्य में कुछ नये युद्धों की आशंका के दृष्टिगत रक्षा क्षेत्र हेतु बजट-आरक्षण को बढ़ा कर 7,84,678 करोड़ रुपये किया जाना एक अच्छा निर्णय हो सकता है। देश के प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और  सेना के तीनों अंगों के अध्यक्षों के कई मर्तबा दिये गये ब्यानों से भी यही लक्षित होता है कि देश की सैनिक शक्ति को अवश्य मजबूत और सुदृढ़ किया जाना चाहिए। कृषि एवं किसानों के लिए हालांकि कुछ विशेष घोषणा इस बजट में नहीं है, किन्तु किसानों की आय बढ़ाने के लिए मछली एवं पशु-पालन और नारियल प्रोत्साहन जैसी योजनाएं बनाने की भी घोषणा बजट में निहित है। इस हेतु देश भर में 500 नये जलाशय और अमृत-सरोवर सृजित किये जाएंगे। देश के पंजाब जैसे कई राज्यों की मांग के अनुसार रेलवे के विस्तार हेतु कोई परियोजना घोषित नहीं हुई, तथापि देश के भिन्न राज्यों हेतु सात हाई स्पीड और एक फ्रेट कॉरीडोर अवश्य प्रस्तावित किया गया है। लघु और मध्यम उद्योगों के लिए 10,000 करोड़ रुपये से विकास निधि स्थापित करने से औद्योगिक विकास को गति मिल सकती है। शिक्षा और स्वास्थ्य को हालांकि प्राथमिकता में रखते हुए पिछले वर्ष के आबंटन से इस वर्ष की राशि 8.27 प्रतिशत बढ़ा कर 1,0630.42 करोड़ रुपये की गई है, किन्तु इन क्षेत्रों में अभी बहुत कुछ किये जाने की आवश्यकता है। 
बजट में पंजाब के पक्ष में एक सर्वाधिक नकारात्मक पक्ष यह रहा कि प्रदेश का चुनावी वर्ष होने के बावजूद इसे न तो कोई खास परियोजना अलॉट की गई है, न ही कोई अतिरिक्त राशि दी गई, हालांकि पंजाब के वित्त मंत्री और अन्य राजनीतिक दलों ने प्रदेश के लिए अतिरिक्त राशि आबंटित किये जाने की बार-बार मांग की थी। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष उपजी अप्रत्याशित बाढ़ों के कारण भी पंजाब की केन्द्र से अतिरिक्त सहायता की मांग रही है। हम समझते हैं कि बेशक प्रस्तुत बजट देश और समाज के किसी एक बड़े वर्ग की आकांक्षाओं और उम्मीदों को पूरा करते प्रतीत नहीं होता किन्तु फिर भी यह विकासोन्मुखी भारत के 140 करोड़ लोगों की अधूरी उम्मीदों को विकास के सपने अवश्य दिखाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे नारी शक्ति का प्रतिबिम्ब बनने वाला बजट भी माना है। 

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