थेम्स नदी के तट पर बसा खूबसूरत शहर लंदन
लंदन एक खूबसूरत शहर है। यहां के उद्यानों और बगीचों की सुंदरता में चार चांद लगाते हैं तो सफाई की निर्दोष व्यवस्था भी प्रभावित करती है। पिछले ही दिनों हुए एक सर्वेक्षण में लंदन को दुनिया का सबसे प्रभावशाली शहर चुना गया जबकि न्यूयार्क को दूसरा स्थान मिला। ‘द वेल्थ रिपोर्ट’ नाम के इस सर्वेक्षण में हांगकांग, पेरिस और सिंगापुर को क्रमश: तीसरा, चौथा और पांचवां स्थान मिला है।
लंदर शहर थेम्स नदी के किनारे बसा है। थेम्स नदी लंदन शहर को दो भागों में बांटती है। इस शहर के मुख्यत: तीन भाग हैं. पुराना शहर, जहां पुरानी इमारतें जैसे वेस्टमिन्स्टर जहां शाही परिवार के भवन और सरकारी कार्यालय हैं और वेस्ट एंड जहां खरीदारी के मुख्य तीन स्थान बान्ड स्ट्रीट, रीजेंट स्ट्रीट और आक्सफोर्ड स्ट्रीट हैं।
लंदन के प्रमुख स्थलों में बकिंघम पैलेस, कामनवेल्थ इंस्टीटयूट, टावर ऑफ लंदन, ज्वेल हाऊस, मदाम तुषाद संग्रहालय, लंदन संग्रहालय, विक्टोरिया संग्रहालय, लंदन ब्रिज और सेंट पाल गिरजाघर प्रमुख हैं। बकिंघम पैलेस महारानी का शाही निवास है। यहां मौसम ठीक रहने पर प्रतिदिन 11:30 बजे महारानी के अंगरक्षकों के दल का अदला-बदली समारोह देखने लायक होता है। संयोग से जब हम वहां पहुंचे मौसम खुशनुमा था। भारी भीड़ थी तो उन्हें नियंत्रित करने के लिए घोड़ों पर पुलिस तैनात थी। सभी घोड़े लम्बे-चौड़े मजबूत काठी के थे।
बकिंघम पैलेस का विशाल प्रांगण जंगलों से दिखाई दे रहा था जहां लाल वर्दी में अजीब टोपी लगाये जवानों ने भारत में गणतंत्र दिवस के बाद राष्ट्रपति भवन प्रांगण में होने वाले बीटिंग रिट्रीट जैसा चेजिंग ऑफ गार्ड प्रस्तुत किया। संगीत की धुन पर मार्च-पास्ट बहुत आकर्षक प्रतीत हो रहा था। समारोह देखने के लिए लोग आसपास की दीवारों पर चढ़े दिखाई दे रहे थे। कार्यक्रम के बाद एक टुकड़ी महल से बाहर निकली और कदम-से-कदम मिलाते हुए अपने गन्तव्य की ओर बढ़ गई। बकिंघम पैलेस के आसपास का नजारा भी कम दिलचस्प नहीं है। सुनहरी रंग की विशाल मूर्तियां और फव्वारे चौराहे की शोभा बढ़ा रहे थे।
लंदन थेम्स के किनारे बसा है। इस नदी को लंदन की गंगा कहा जाता है। थेम्स नदी चौल्थनम में सेवेन स्प्रिंग्स से निकलती है और ऑक्सफार्ड, रैडिंग, मेडनहैड, विंड्सर, ईटन और लंदन जैसे शहरों से होती हुई 346 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर इंग्लिश चैनल में जाकर गिरती है। टेम्स कभी दुनिया का सबसे व्यस्त जलमार्ग हुआ करता था। लंदन की आबादी बढ़ने के साथ ही टेम्स नदी में भी प्रदूषण बढ़ता गया। टेम्स नदी की सफाई के लिए हालांकि समय-समय पर लंदन में कई अभियान शुरू किए गए लेकिन 2000 में शुरू हुआ टेम्स रिवर क्लीन अप अभियान टेम्स के लिए वरदान साबित हुआ।
इस अभियान के तहत साल में तय एक दिन चौल्थनम, ऑक्सफार्ड, रैडिंग, मेडनहैड, विंड्सर, ईटन और लंदन जहां-जहां से थेम्स गुजरती है, हर जगह लोग एकत्रा होकर नदी की सफाई करते हैं। ये लोग सफाई का सारा सामान अपने साथ लेकर आते हैं। यह वहां के लोगों की मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम है कि बहुत कम समय में ही टेम्स अपने पुराने स्वरूप में आ गई। कहा तो यह भी जाता है कि टेम्स आज जितनी स्वच्छ है उतनी डेढ़ सौ साल पहले थी।
थेम्स नदी के तट पर बनी किलेनुमा इमारत टावर ऑफ लंदन कहलाता है। यहां पर सेन्ट जॉन का गिरजाघर भी है। टावर के पास ही ज्वेल हाऊस भी स्थित है। यह वास्तव में सोना, हीरा व जवाहरात का भंडार है। विख्यात भारतीय हीरा कोहिनूर भी यहीं पर है। फरवरी माह में ज्वेल हाउस बंद रहता है। यहां के गार्ड आज भी परम्परागत वेशभूषा में रहते हैं। इनके पास छतरी भी रहती है क्योंकि यहां बारिश आम बात है। हम टहलते हुए काफी दूर तक निकल गए। ब्रिज के ठीक नीचे एक स्थान पर एक अंग्रेज टेबल पर कढ़ाई रखे बिल्कुल भारतीय अंदाज में मूंगफली पर चाशनी चढ़ा रहा था। वह हमें देखते ही बोला, ‘गर्मागर्म मूंगफली’ तो मुस्कराये बिना न रह सके। कागज के छोटे से लिफाफे में पांच पौंड की मीठी मूंगफली खरीदकर खाने का अपना ही मजा है।
किले के पास बनी आधुनिक ढंग की पार्किंग में अपना वाहन खड़ा कर हम लंदन ब्रिज देखने के लिए गए। हल्की बूंदाबांदी के बीच भी हजारों लोग वहां उपस्थित थे। हमने लंदन ब्रिज पर फोटो खींचे। कुछ लोगों ने क्रूज पर सवारी की लेकिन मैं टेम्स नदी को निहारते हुए सोच रहा था कि जब लंदन के लोग 346 किलोमीटर लंबी टेम्स को साल में एक दिन साफ कर सकते हैं तो क्या हम यमुना, गंगा या अन्य नदियों के लिए क्या करते हैं? यदि साफ भी नहीं करते तो भी कम-से-कम गंदगी को इसमें जाने से तो रोक ही सकते हैं।
ट्यूब, अंडरग्राउंड या मैट्रो लंदन की महानगरीय रेल सेवा को जिस नाम से भी पुकारें, लंदन की पहचान बन चुकी है। दिल्ली मैट्रो की तरह भूमि के नीचे चलने वाली इसकी रेलगाड़ियां सुबह से देर रात तक थोड़े-थोड़े अंतराल पर उपलब्ध होती हैं। दर्जन से अधिक रूट, 270 स्टेशनों तक इसका जंजाल फैला हुआ है। इसकी शुरुआत इंजीनियर सर जॉन फॉलर के नेतृत्व में 9 जनवरी, 1853 में हुई।
पूरे यूरोप में ब्रिटेन ही है जहां यातायात भारत की तरह सड़क के बायीं ओर चलता है जबकि शेष देशों में सड़क के दायीं ओर चलने का प्रचलन है। यहां यातायात का अनुशासन देखते ही बनता था। भारत की तरह कहीं हड़बड़ाहट अथवा मनमानी नहीं। सड़कें भी बहुत बढ़िया। हम अक्सर गर्व करते हैं कि दिल्ली फ्लाईओवरों की नगरी है लेकिन लंदन में इतने फ्लाईओवर देखने को मिले कि हमारा दावा बहुत पीछे रह गया। सड़क के दोनाें ओर रंग-बिरंगे फूलों की क्यारियां। लंदन में अनेक भारतीय रेस्टोरेंट हैं। हमने पश्चिमी लंदन में आक्सफोर्ड स्ट्रीट के पास डेन्मन स्ट्रीट में चौकी रेस्टोरेंट पर दोपहर का भोजन ग्रहण किया। लजीज दाल मक्खनी और गर्मागर्म नान पाकर मन प्रसन्न हो गया क्योंकि सुबह कांटीनेंटल नाश्ते ने मजा खराब कर दिया था। प्रथम दिवस नाश्ते में बहुत कुछ था लेकिन भारतीय व्यंजन एक भी नहीं। अधिकांश के संदेहास्पद होने के कारण हमने उस ओर देखना भी उचित नहीं समझा था। हां, एक दिन उपमा एवं छोटे-छोटे समोसे अवश्य थे। आलू के पिचके हुए त्रिभुजाकार नर्म गर्म समोसे भी अपेक्षाकृत फीके थे।
एक अन्य महत्त्वपूर्ण जानकारी के अनुसार यूके में 8,500 भारतीय रेस्टोरेंट हैं जोकि देश के कुल रेस्टोरेंट का 15 प्रतिशत हैं। यहां के व्यंजन यूके में काफी पसंद किए जाते हैं। इंग्लैंड और वेल्स में पंजाबी तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। साल 2011 की जनगणना से यह बात सामने आई है। आफिस फार नेशनल स्टेटिस्टिक्स के आंकड़े में कहा गया है कि इंग्लैंड और वेल्स में हर दस लोगों में से एक व्यक्ति अंग्रेजी के अलावा किसी दूसरी भाषा को मुख्य जुबान के रूप में इस्तेमाल करता है। इसमें कहा गया है कि पंजाबी तीसरी सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा है। इंग्लैंड और वेल्स में पंजाबी बोलने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है।
ब्रिटेन से हमें फ्रांस की राजधानी पेरिस जाना था। दोनों देशों के बीच इंगलिश चैनल है। इस समुन्द्र को पार करने के लिए क्रूज उपलब्ध हैं। आश्चर्यजनक बात यह है कि समुन्द्र के नीचे चलने वाली तीव्रगामी रेल सेवा भी उपलब्ध है। पहले से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार हमारे वाहन ने छोटे समुद्री जहाज (क्रूज) पर सवार होकर इसे पार किया। (उर्वशी)





