पुन: अच्छे संबंधों की उम्मीद
भारत और कनाडा के संबंध सदियों पुराने हैं। कनाडा का आधुनिक इतिहास कुछ सौ वर्ष पहले शुरू हुआ, जब इस विशाल धरती पर पहले यूरोप, फिर एशिया और फिर अफ्रीकी महाद्वीपों के लोग आकर यहां बसने शुरू हुए। उनके द्वारा अपने-अपने देश की जीवन-प्रणाली को भी इस समाज में शामिल किया गया, क्योंकि यूरोपियन देशों से बड़ी संख्या में लोग यहां आकर बसे थे। आज भी यहां बहुसंख्या में वे बसे हुए हैं। इसके कुछ राज्यों में फ्रांस की भाषा और सभ्याचार भी इसलिए अधिक प्रभावशाली बने रहे क्योंकि उन स्थानों पर फ्रांस से आए शरणार्थी भारी संख्या में आकर अपनी बस्तियां बना कर बस गए थे। शेष राज्यों में ब्रिटेन से आए लोगों की बहुसंख्या होने के कारण यहां ब्रिटिश सभ्याचार का प्रभाव भी बना रहा।
भारत भी ब्रिटिश शासन के समय उनकी एक बस्ती ही था। उनकी गुलाम देशों की बस्तियों में से भी लोग यहां आकर बसते रहे। उस समय भारतीय भी यहां आते जाते रहे थे और बड़ी संख्या में यहीं बस गए थे। बहुसंख्या में वहां मज़दूरी करने गए भारतीयों में अपने देश के गुलाम होने का एहसास भी यहां आने के बाद पैदा हुआ। यह भी एक बड़ा कारण था कि 20वीं सदी के शुरू में कनाडा और अमरीका में बसे हुए भारतीयों में कुछ अधिकतर जागरूक व्यक्तियों ने यहां अपने संगठन बना कर दूर बैठे ही भारत की आज़ादी के लिए यत्न शुरू कर दिए थे। इनके यत्नों से ही ़गदर लहर मूलभूत रूप में सामने आई थी। इन संगठनों की देश की आज़ादी के लिए की गई कुर्बानियों को आज भी याद किया जाता है। देश को मिली आज़ादी के बाद भी कनाडा के साथ भारत के अच्छे संबंध बने रहे। इसी कारण आज़ादी के बाद भी भारतीयों ने कनाडा की ओर रुख करना जारी रखा। कनाडा आज भी एक विशाल क्षेत्रफल वाला देश है, जिसकी जनसंख्या कुछ करोड़ों तक सीमित है। पिछले कुछ दशकों में भारतीयों का यहां आवास बड़ी तेज़ी से हुआ। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और संयम से यहां के समाज में अपना अच्छा और प्रभाव स्थान बना लिया। यहां भारत से आकर बसने वालों में पंजाबियों की अधिक संख्या थी। पंजाब में पिछले कुछ दशकों में जो गड़बड़ वाला माहौल बना रहा था, उस समय भी पंजाब से कनाडा को प्रवास में और वृद्धि हो गई थी। कनाडा के कानून अभी तक भी बड़े उदार हैं, जिनका लाभ उठा कर पंजाब से आए बड़ी संख्या में खालिस्तान समर्थकों ने भी यहां आकर कुछ क्षेत्रों में अपना आधार बना लिया है। वह भारत के विरुद्ध लगातार अपनी गतिविधियों को अंजाम देने में लगे रहते हैं। भारत सरकार के लिए लगातार यह मामला सिरदर्द वाला बना रहा है। पंजाब में से ही किसी न किसी तरह प्रवास करके कनाडा जाकर बसे इन संगठनों और व्यक्तियों ने एक तरह से भारत और प्रदेश सरकार के लिए बड़ी चुनौती पैदा कर रखी है। भारत सरकार लगातार कनाडा सरकार के पास इन व्यक्तियों और संगठनों की देश-विरोधी गतिविधियों की शिकायतें करती रही है परन्तु कनाडा की किसी भी सरकार ने इस बात की ओर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, जिससे इन ताकतों को लगातार उत्साह मिलता रहा। जून, 2023 में पंजाब से गये ़खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की यहां हत्या कर दी गई। उस समय जस्टिन ट्रूडो कनाडा के प्रधानमंत्री थे। उन्हें खालिस्तानियों के प्रति उदार माना जाता था। हरदीप सिंह निज्जर की इस हत्या को लेकर जिस तरह ट्रूडो ने सरेआम भारत सरकार को आरोपी ठहराया और उसकी निंदा की, उससे दोनों देशों के संबंध बिगड़ गए और फिर लगातार खराब ही होते गए। यहां तक दोनों देशों ने एक दूसरे देश में अपने दूतावास तक के स्टाफ को भी कम कर दिया था। आपसी आदान-प्रदान और व्यापार को भी सीमित ही कर दिया था। आज भी लाखों ही पंजाबी कनाडा में बसे हुए हैं। उनमें से ज्यादातर भारत की प्रभुसत्ता का सम्मान करते हैं और हमेशा इसके साथ प्रत्येक स्थिति में खड़े रहने को प्राथमिकता देते रहे हैं। तब जस्टिन ट्रूडो की और अनेक कारणों के दृष्टिगत कनाडा में व्यापक स्तर पर आलोचना होनी शुरू हो गई थी, जिस कारण उन्हें अपने प्रधानमंत्री पद से त्याग-पत्र देना पड़ा था। उनके स्थान पर आए नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अपने देश की नीतियों में व्यापक स्तर पर बदलाव किए हैं। इसी क्रम में भारत के साथ पुन: अच्छे संबंध स्थापित करने की पहल भी उनकी ओर से की गई है, जिसका भारत सरकार ने स्वागत किया है। विगत वर्ष भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जी-7 देशों के कनाडा में हुए सम्मेलन में भाग लिया था। यहां मार्क कार्नी के साथ हुई भव्य भेंट में दोनों देश एक दूसरे के निकट आने शुरू हो गए थे।
इसी ही समय कनाडा के पड़ोसी देश अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की टैरिफ संबंधी कड़ी नीतियां लागू करने की घोषणा ने विश्व भर में एक बार फिर हड़कम्प मचा दिया था। उनका पड़ोसी और पुराना आज़माया हुआ दोस्त कनाडा भी इन नीतियों के कारण उससे दूर हो गया। आज दोनों देशों में यह दूरी दुश्मनी में बदलती दिखाई दे रही है, क्योंकि डोनाल्ड ट्रम्प ने कई बार यह घोषणा भी की है कि वह अपने पड़ोसी देश कनाडा को अमरीका का 51वां राज्य बनाने का इच्छुक है। ऐसे बयानों से दोनों देशों में आपसी तनाव और भी बढ़ गया है और इनके बीच होते आपसी व्यापार पर भी बड़ा प्रभाव पड़ा है। कनाडा ने इसी समय विश्व के अन्य बड़े देशों के साथ अपनी निकटता बढ़ाने का यत्न किया है। इसी क्रम में मार्क कार्नी 26 फरवरी को भारत के दौरे पर आ रहे हैं, यहां वह पुन: भारत के साथ कनाडा के पहले जैसे रिश्ते को फिर से बहाल करने के लिए भारत के नेताओं के साथ चर्चा करेंगे। दोनों देश आपसी व्यापार को भी पुन: पटरी पर लाने की योजनाबंदी करेंगे। विगत अवधि में पंजाब से कनाडा को प्रवास करने वाले भारी संख्या में युवा विद्यार्थियों और अन्य लोगों पर, जो कनाडा द्वारा वीज़ा पर वर्क परमिट पर प्रतिबन्ध लगाए गए थे, उनके संबंध में भी विचार करके कोई हल निकालने की उम्मीद की जाती है, देश और विशेष रूप से पंजाब के लिए नि:संदेह मार्क कार्नी का भारत दौरा एक अच्छा संदेश हो सकता है।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

