निराशाजनक घटनाक्रम

पंजाब विधानसभा के बजट अधिवेशन के पहले दिन जो भी घटनाक्रम घटित हुआ है, उसे पंजाब के हित में नहीं माना जा सकता। सत्तारूढ़ पार्टी ने इसकी शुरुआत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह बाजवा के कैबिनेट मंत्री स. हरिभजन सिंह ई.टी.ओ. के विरुद्ध कुछ समय पहले दिए एक विवादास्पद बयान के विरुद्ध बैंड बाजा लेकर प्रदर्शन करने से की। पंजाब कांग्रेस द्वारा भी कांग्रेस भवन से विधानसभा की ओर अमन-कानून की स्थिति को लेकर प्रदर्शन किया गया, जिसे प्रशासन द्वारा पनी की बौछारों से रोका गया। इससे आगे कांग्रेस द्वारा राज्यपाल के भाषण का बहिष्कार कर दिया गया।
ज़रूरत इस बात की थी कि सत्ता पक्ष और मुख्य विपक्षी पार्टी के नेता अपनी-अपनी बात विधानसभा में ही रखते। दोनों पक्ष इस विधानसभा के आखिरी बजट अधिवेशन को सफल बनाने के लिए अपनी-अपनी भूमिका निभाते। विपक्ष राज्यपाल का भाषण अच्छी तरह सुनता और अगले दिनों में भिन्न-भिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखता। राज्यपाल श्री गुलाब चन्द कटारिया द्वारा भी अपनी प्रतिक्रिया में यह कहा गया था कि विपक्ष को उनका भाषण सुनने के बाद अगले दिनों में अपनी बात रखनी चाहिए थी।
बेशक देश की संसद के निचले सदन लोकसभा से लेकर राज्यों की विधानसभाओं तक जैसे यह एक प्रथा जैसी बन चुकी है, कि सरकार किसी भी राजनीतिक दल की हो, सदन में मौजूद विपक्षी दल सदन की कार्रवाई चलने ही नहीं देते। सदन की कार्रवाई सूची में शुमार मुद्दों पर विचार-चर्चा करने की अपेक्षा विपक्षी सांसद अथवा विधायक व्यर्थ के किसी मामले को लेकर सदन की कार्रवाई में व्यवधान डाल कर सदन को दिन भर के लिए स्थगित करा देते हैं। इस प्रकार एक ओर जहां लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होती है, वहीं देश के राजस्व को प्रतिदिन लाखों रुपये की हानि भी वहन करनी पड़ती है।
राज्यपाल के अभिभाषण में प्राय: सरकार की उपलब्धियों, उसकी भावी योजनाओं और आगामी वर्ष के आय-व्यय हेतु प्रस्तुत होने वाले बजट संबंधी कुछ आवश्यक संकेत भी होते हैं। पंजाब आज अनेक समस्याओं और चिन्ताओं से ग्रस्त प्रांत है। सरकारी नौकरियां देने के बावजूद प्रदेश में रोजगार के अवसरों की भारी कमी है। बेरोज़गार युवा विदेशों की ओर पलायन करने को विवश हैं। किसानों के खेत कट रहे हैं, अथवा बट रहे हैं। नशे और नशीले पदार्थों की तस्करी ने प्रदेश की आर्थिकता को आघात पहुंचाया है। गैंगस्टरों ने भी रंगले पंजाब की तस्वीर को द़ागदार कर रखा है। नित्य-प्रति हत्याएं और गोलीबारी की घटनाएं होती रहती हैं। सीमा-पार से ड्रोनों के माध्यम से अवैध हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी ने प्रदेश की सुरक्षा को बड़ी चुनौती दे रखी है। जन-साधारण में निराशा का माहौल घर करता जा रहा है। किसान, व्यापारी सभी वर्गों के लोग परेशान हैं। किसान और प्रदेश सरकार दोनों के सिर पर कज़र् की गठरी निरन्तर भारी होती जा रही है। सरकार पर कज़र् का बोझ 33 लाख करोड़ से ऊपर हो चुका है। स्थिति बेहद गम्भीर है। विपक्ष चाहता तो  इनमें किसी भी गम्भीर मुद्दे को लेकर सरकार को बहस के दायरे में ले सकता था, किन्तु विपक्ष ने राज्यपाल के परम्परागत अभिभाषण का बहिष्कार करके जहां एक लोकतांत्रिक प्रथा को खण्डित किया, वहीं अभिभाषण के कई अहम मुद्दों को जान-बूझ कर दृष्टिविगत होने दिया।
सदन की कार्रवाई के बहिष्कार के साथ, इसी दिन एक और अभूतपूर्व घटना यह भी हुई कि सरकार के अपने एक मंत्री की ओर से न केवल विपक्ष के बहिष्कार के मुकाबले बाकायदा बैंड-बाजा बजा कर रोष-प्रदर्शन किया गया, अपितु राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान सदन में मौजूद रहने की बजाय मंत्री पत्रकार सम्मेलन का आयोजन करते रहे। 
हम समझते हैं कि विपक्ष द्वारा सदन के बहिष्कार की बजाय राज्यपाल के अभिभाषण की गरिमा को कायम रखते हुए सत्ता पक्ष और विपक्षी सदस्यों को सदन की कार्रवाई को विधिपूर्वक चलने देना चाहिए था। हम यह भी समझते हैं कि सदनों की कार्रवाई का चलना समय और धन के लिहाज से बहुत खर्चीला और महंगा हो गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष की ओर से एक-एक पल का व्यवहारिकता एवं संकोच से उपयोग करने से जहां धन की पर्याप्त बचत होगी, वहीं लोकतांत्रिक मूल्यों का भी संचार भी होगा। नि:संदेह इस हेतु दोनों  पक्षों अर्थात सत्ता पक्ष और विपक्ष को आपस में मिल-बैठ कर सार्वजनिक हित के मुद्दों पर यथा-संभव सहमति बना कर विधानसभा को सुचारू रूप से चलने देना चाहिए।

#निराशाजनक घटनाक्रम