रक्षा क्षेत्र में चुनौती पेश कर रहा चीन
विश्व में चल रहे युद्धों या यूं कहिए कि तीसरे विश्व युद्ध की आहट के बीच चीन ने एक बार फिर अपने राष्ट्रीय रक्षा बजट में भारी वृद्धि करते हुए इसे 275 अरब डॉलर तक पहुंचा दिया है। विदित हो कि चीन हर वर्ष मार्च माह में अपने रक्षा बजट की घोषणा करता है। उसके रक्षा बजट की यह वृद्धि पिछले वर्ष की तुलना में 25 अरब डॉलर अधिक है। चीन का यह कदम उसकी सशस्त्र सेनाओं के आधुनिकीकरण के जोश की गति को दर्शाता है। दरअसल चीन का इरादा विश्व की सैन्य दौड़ में आगे बने रहने का है। चीनी प्रीमियर ली कियांग ने राष्ट्रीय जन कांग्रेस (एनपीसी) में प्रस्तुत अपनी कार्य रिपोर्ट में रक्षा बजट के इस आवंटन की घोषणा की जिसके अनुसार चीन का रक्षा खर्च अभी भी अनेक महत्वपूर्ण मानकों की तुलना में अत्यन्त सीमित माना गया है।
एनपीसी में प्रस्तुत रिपोर्ट में सकल घरेलू उत्पाद में रक्षा बजट की हिस्सेदारी, प्रति व्यक्ति रक्षा खर्च तथा प्रति सैनिक होने वाला रक्षा खर्च जैसे अहम् संकेतक शामिल हैं जिनके आधार पर चीन अपना रक्षा खर्च अन्य देशों की तुलना में अपेक्षाकृत कम दिखाता है जबकि स्थिति यह है कि चीन अपना रक्षा व्यय लगातार बढ़ा रहा है। पिछले वर्ष 2025 में चीन ने बीते वर्ष की तुलना में 17 अरब अमरीकी डॉलर की वृद्धि करके अपना राष्ट्रीय रक्षा बजट 249 अरब अमरीकी डॉलर कर दिया था। इस तरह यह वृद्धि 7.2 प्रतिशत की गई थी। लगभग इतने ही प्रतिशत की वृद्धि 2024 के रक्षा बजट में की गई थी जिससे चीन का रक्षा बजट 232 अरब अमरीकी डॉलर पहुंच गया था। चीन का यह रक्षा बजट भारत के रक्षा बजट का तकरीबन तीन गुना था। पिछले वर्षों की तुलना इस वर्ष चीन के रक्षा बजट में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की गई है।
बीते सालों पर दृष्टिपात करें तो वर्ष 2023 में भी अपना रक्षा बजट 7.2 फीसदी बढ़ाया था। इससे चीन का रक्षा बजट बढ़कर 1550 अरब युआन अर्थात 225 अरब डॉलर तक हो गया था। वर्ष 2022 में चीन ने अपना रक्षा बजट 7.1 फीसदी बढाया था। तब यह 1450 अरब युआन था। वर्ष 2020 में चीन का रक्षा बजट 6.6 प्रतिषत बढ़ाया गया था जबकि वर्ष 2021 में 6.8 फीसदी की बढ़ोत्तरी की गई थी। चीन अपने रक्षा बजट में पिछले कई वर्षों से लगातार इजाफा कर रहा है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कार्यकाल में रक्षा बजट में भारी बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। वर्ष 2013 में चीन का रक्षा बजट 8.45 लाख करोड़ था जो अब बढ़कर 275 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। शी जिनपिंग ने चीन की सेना को वर्ष 2027 तक विश्व स्तरीय सेना बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उनका यह भी इरादा है कि चीनी सेना को वर्ष 2035 तक पूरी तरह से अत्याधुनिक बना दिया जाए। इसी वजह से चीन अपना रक्षा बजट लगातार बढ़ा रहा है। शी जिनपिंग अपनी चीनी सेना को इतना आधुनिक बनाना चाहते हैं कि उनकी सेना संसार के किसी छोर पर या किसी भी देश के खिलाफ युद्ध में विजय हासिल कर सके।
चीन अपना रक्षा बजट बढ़ाकर अपने पड़ोसी एवं दुश्मन देशों पर ताकतवर होने का दबाव बना रहा है जिससे कोई उससे टकराने की कोशिश न करे। चीन का यह कदम भारत एवं अन्य पड़ोसी देशों पर आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अपने रक्षा बजट को बढ़ाए जाने का भारी दबाव डाल रहा है। चीन की सैन्य क्षेत्र की तीव्र आधुनिकीकरण की स्थिति जैसे नौसेना के लिए उन्नत किस्म के विमानवाहक पोतों का निर्माण, अत्याधुनिक नौसैनिक जहाज़ों का निर्माण तथा वायु सेना के लिए राडार की पकड़ में न आने वाले स्टील्थ विमानों का निर्माण उसके पड़ोसी एवं दुश्मन देशों में चिन्ता पैदा करके विश्व के समक्ष नई चुनौतियां प्रस्तुत कर रहा है। बात चाहे दक्षिण चीन सागर की हो या हिन्द महासागर की हो, चाहे ताइवान का मसला हो, या भारत व अमरीका से लगातार चल रहे तनाव के मामले में चीन किसी की नहीं सुन रहा है और लगातार अपनी रक्षा ताकत को बढ़ाने में लगा हुआ है।
राष्ट्रपति शी जिनपिंग यह नहीं चाहते हैं कि उनके सैनिकों को युद्ध लड़ने में अघिक मेहनत करनी पड़े। इसीलिए चीन अत्याधुनिक हथियार, मजबूत थियेटर कमांड, स्टील्थ तकनीक व लड़ाकू तकनीक के क्षेत्र में अधिक पैसा लगा रहा है। (एजेंसी)

