पंजाब में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की सड़कों का निर्माण

पंजाब की सरकार द्वारा प्रदेश में अन्तर्राष्ट्रीय मानकों के तहत सड़कों का निर्माण करने और इसी आधार पर पुरानी सड़कों का विस्तार किये जाने की घोषणा से बेशक प्रदेश की सड़कों की दशा हेतु एक अच्छी तस्वीर उभरते दिखाई देती है। सरकार ने ऐसी सड़कों के निर्माण हेतु प्राथमिक स्तर पर चार ज़िलों जालन्धर, लुधियाना, अमृतसर और मोहाली का चुनाव किया है। इस परियोजना के तहत प्रदेश के सड़क ढांचे को भविष्य में न केवल अन्तर्राष्ट्रीय मानक धरातल पर निर्मित एवं विकसित किया जाएगा, अपितु मौजूदा सड़कों का विस्तार भी इसी स्तर के अनुरूप किया जाएगा। इस परियोजना के अनुसार सड़कों के दोनों ओर जन-साधारण की सहूलियत और खास तौर पर पैदल चलने वाले लोगों की सलामती हेतु विस्तृत और बेहतर किस्म के फुटपाथ निर्मित किये जाएंगे। इसके अतिरिक्त नई सड़कों के दोनों ओर साइकिल चलाने वालों के लिए अलग फुटपाथ बनाये जाएंगे। इन नई सड़कों की एक बेहतर व्यवस्था यह होगी कि इन्हें शहरों और देहात क्षेत्रों की सम्पर्क सड़कों के साथ इस तरह से जोड़ा जाएगा कि इनके निकासी और प्रवेश केन्द्र वैज्ञानिक तरीके से और तकनीकी ढंग से विकसित होंगे। इन सड़कों का निर्माण करते समय ब्लैक स्पाटों की पहचान, पार्किंग व्यवस्था और यातायात प्रबन्धन का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
नि:संदेह यह एक बड़ी अच्छी परियोजना है किन्तु इस पर मानवीय सोच पर आधारित पहल के अनुसार काम किये जाने की भी बड़ी आवश्यकता है। प्रदेश की मौजूदा सड़कों की दुर्दशा की स्थिति यह है कि दुर्घटनाओं का कारण बनने वाले ब्लैक स्पॉटों की संख्या विगत कुछ वर्षों में और बढ़ी है। सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ने का एक बड़ा कारण सड़कों के दोनों ओर पैदल अथवा साइकिलों पर चलने वाले लोगों के लिए बने फुटपाथों पर अवैध कब्ज़े हो जाना भी है। इस कारण पैदल चलने वाले लोगों के साथ होने वाली वाहन दुर्घटनाओं और इनमें हताहत होने वालों की संख्या में निरन्तर वृद्धि हुई है। यह तस्वीर स्वयं सरकार के एक विभाग सड़क परिवहन और राज मार्ग मंत्रालय की एक रिपोर्ट से सामने आई है। इस रिपोर्ट के अनुसार पिछले तीन वर्ष में पैदल चलने वाले लोगों के साथ होने वाली वाहन दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या में 22 प्रतिशत वृद्धि हुई है। इसका एक अभिप्राय यह भी निकलता है कि पैदल चलने वाले लोगों में से फुटपाथों के अभाव में प्रतिदिन दो लोग मारे जाते हैं। इसी रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022 में पैदल चलने वाले लोगों में से सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या 608 थी जो 2024 में बढ़ कर 746 हो गई।
बेशक यह आंकड़ा यह सिद्ध करने के लिए काफी है कि अभी तक बनी सड़क-परियोजनाओं में बड़ी खामियां रही होंगी। इसके अतिरिक्त सड़कों के रख-रखाव और इन पर यातायात नियंत्रण हेतु पुख्ता व्यवस्था न होना भी दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। सड़कों पर हादसात के लिए ब्लैक स्पॉट का ज़िक्र तो होता है, किन्तु इनको हटाने की कभी कोई योजना नहीं बनती। फुटपाथों पर कब्ज़े हटाने हेतु आंसू पोंछने जैसी घोषणाएं तो होती हैं किन्तु ये कब्ज़े कभी पूरी तरह से हटाये नहीं जा सके। विशेषज्ञों के अनुसार सड़कों का निर्माण किये जाते समय दोनों ओर फुटपाथों का निर्मित होना बहुत ज़रूरी है। ऐसा न होने पर पैदल चलने वाले लोग सड़कों के बीच गुज़रने को विवश होते हैं, और यह स्थिति कई बार दुर्घटनाओं का कारण बनती है। हरियाणा में भी ऐसी सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति कमो-बेश ऐसी ही है, अथवा पंजाब से बदतर है हालांकि हिमाचल में स्थिति कुछ-कुछ बेहतर है। हिमाचल में राजमार्ग सड़कों पर कम कब्ज़े हुए हैं जबकि ग्रामीण क्षेत्रीय सड़कों पर कब्ज़े स्थिति को गम्भीर बनाते हैं। लोगों को जागरूक करने हेतु गठित संस्था अराइव सेफ के अनुसार सरकार एवं प्रशासन को सबसे पहले सड़कों के किनारे फुटपाथों पर हुए कब्ज़ों को हटाने हेतु यत्न करने होंगे, और तत्पश्चात सड़कों की चौड़ाई को निर्धारित करके उनका नव-निर्माण करना होगा। इस दौरान पैदल चलने और साइकिल आदि चलाने हेतु अलग फुटपाथ बना कर ही परियोजना को आगे बढ़ाना चाहिए।
हम समझते हैं कि बेशक पंजाब सरकार द्वारा प्रदेश की मुख्य राजमार्गी सड़कों के अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर निर्माण की घोषणा स्वागत योग्य है किन्तु इनके निर्माण से पूर्व सड़कों और फुटपाथों को कब्ज़ा-मुक्त कराये जाने की महती आवश्यकता है। सड़कों पर अवैध कब्ज़ों के लिए मुख्यतया स्थानीय निकाय प्रशासन ही उत्तरदायी होता है। सरकार यदि प्रशासन की कुछ काली भेड़ों पर अंकुश लगा सके, तो मंज़िल-ए-मकसूद को शीघ्र हासिल किया जा सकता है।

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