बिहार की नई गतिविधि
बिहार में नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शपथ ग्रहण कर ली है। इस तरह से 20 वर्ष तक प्रदेश के मुख्यमंत्री चले आ रहे नितीश कुमार की लम्बी पारी खत्म हो गई है। वर्ष 2025 में प्रदेश के हुए चुनावों में नितीश कुमार के नेतृत्व वाली पार्टी जनता दल (यू) और भाजपा ने साथ मिलकर चुनाव लड़े थे। इस तरह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने सत्ता सम्भाल ली थी। ये चुनाव भी नितीश कुमार को मुख्यमंत्री का चेहरा बना कर लड़े गए थे, जिनमें भारतीय जनता पार्टी का पलड़ा भारी रहा था। उस समय नितीश कुमार ने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की थी और कुछ महीने बाद ही उनके राज्यसभा में जाने के कारण भाजपा के लिए नया मुख्यमंत्री बनाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। वैसे इस तरह से 10वीं बार प्रदेश का उच्च पद ग्रहण करने का उन्होंने नया रिकार्ड स्थापित कर दिया था।
नितीश कुमार पर अपने समय में गठबंधन बदलने का आरोप भी लगता रहा था और यह भी कि वह उच्च पद प्राप्त करने के लिए अपने मूलभूत सिद्धांतों को भी तिलांजलि देते रहे हैं, परन्तु उससे पहले 15 व र्ष तक लालू प्रसाद यादव ने अलग-अलग ढंग-तरीकों से सत्ता सम्भाले रखी थी, परन्तु उन पर अक्सर परिवारवाद का पक्ष-पोषण करने के आरोप भी लगते रहे थे। उनके शासन के दौरान भ्रष्टाचार का भी बोलबाला रहा था और अमन-कानून की स्थिति भी बड़ी सीमा तक बिगड़ी रही थी। बिहार गरीबी और बेरोज़गारी में फंसा रहा था। इसका मूलभूत ढांचा भी कमज़ोर बना रहा था और प्रदेश से लोग देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी संख्या में कामकाज़ की तलाश के लिए विवश थे। इन पक्षों से नितीश ने दो दशकों में इसकी तुलना में अच्छे ढंग से काम किया है। इस समय में जहां अपराधों की संख्या कम हुई, वहीं नितीश कुमार ने स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी अच्छी उपलब्धियां प्राप्त कीं। प्रदेश भर में सड़कों की हालात को बेहतर बनाया गया और लगातार बनी रही बिजली की कमी को भी पूरा करने का यत्न किया गया। ऐसी स्थिति में उद्योग और रोज़गार को भी प्रोत्साहन मिला। चाहे अभी तक भी रोज़ी-रोटी की तलाश के लिए बिहारियों का अन्य राज्यों में जाना जारी है।
नि:संदेह पहले मंडल की राजनीति का बोलबाला था और अब यहां कमंडल अभिप्राय हिन्दुत्व की राजनीति मज़बूत होनी शुरू हो गई है। अब भाजपा का मुख्यमंत्री बनने से प्रदेश का माहौल किस तरह की अंगड़ाई लेता है, यह देखना होगा, परन्तु यहां पहले से ही जातिवाद ने समाज को पूरी तरह से घुन लगाए रखा है, जिससे छुटकारा मिलना मौजूदा समय में बेहद कठिन प्रतीत होता है। चुनावों के दौरान भाजपा ने प्रदेश के विकास के लिए अनेक वायदे और दावे किए थे। अब इन्हें पूरा करने के लिए पार्टी को कड़ी परीक्षा से गुज़रना होगा और अपनी छवि को मज़बूत करने के लिए नई सरकार को प्रत्येक पक्ष से तेज़ी के साथ विकास की नीतियों को सफल बनाने की ज़रूरत होगी। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बार-बार डबल इंजन सरकार के किए गए दावों को यह नई सरकार कितना पूरा करने में सफल होती है, यह भी उसके लिए परीक्षा की बात होगी।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

