गेहूं के मंडीकरण की समस्या
विगत दिवस पंजाब में खराब रहे मौसम के कारण गेहूं के मंडीकरण संबंधी बड़ी समस्या पैदा हो गई है। इस समय व्यापक स्तर पर गेहूं मंडियों में पहुंच रही है, परन्तु खरीद एजेंसियां इसके लिए गेहूं की बोली नहीं लगा रहीं, क्योंकि बेमौसमी वर्षा के कारण गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। गेहूं के दाने का रंग भी बदला है और दाना सिकुड़ भी गया है। इस समय ज़रूरत यह है कि राजस्थान की तरह ही केन्द्र सरकार का खाद्य और आपूर्ति मंत्रालय शीघ्र से शीघ्र गेहूं की खरीद के मापदंडों में ढील दे, ताकि खरीद एजेंसियों के कर्मचारी बिना किसी चिंता से गेहूं की खरीद शुरू कर सकें। खरीद एजेंसियों के कर्मचारी इस कारण भी उलझन में पड़े हैं, क्योंकि केन्द्रीय टीमों ने पंजाब की मंडियों का दौरा करके गेहूं की गुणवत्ता में आई कमी संबंधी सैम्पल तो लिए हैं, परन्तु यह स्पष्ट नहीं हो सका कि केन्द्र को उन्होंने अपनी रिपोर्ट दे दी है या नहीं? परन्तु स्थिति अभी तक यही चली आ रही है कि केन्द्र सरकार ने पंजाब में गेहूं की खरीद संबंधी कोई ढील नहीं दी और किसान मंडियों में अपनी फसल ढेरी करके बोली का इंतज़ार करते हुए परेशान हो रहे हैं। वैसाखी का त्यौहार भी ज्यादातर किसानों का मंडियों में ही गुज़रा।
यहां यह वर्णनीय है कि इस वर्ष पंजाब सरकार ने राज्य में 122 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है। 13 अप्रैल तक मंडियों में 2.33 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई थी, जिसमें से सिर्फ 33,930 मीट्रिक टन गेहूं की ही खरीद हो सकी है। एक जानकारी के अनुसार व्यापक स्तर पर मंडियों में खुले में गेहूं पड़ी है, इसके अतिरिक्त जो गेहूं की खरीद हुई है, उसकी भी 40 लाख बोरियां खुले आसमान के नीचे पड़ी हैं। यदि मंडियों में तेज़ी से खरीद करके गेहूं नहीं उठाई जाती और वहीं यदि मौसम फिर से खराब हो गया तो खरीद के लिए आई गेहूं और मंडियों में खरीद कर रखी हुई गेहूं दोनों का व्यापक स्तर पर नुकसान हो सकता है। इस तरह किसानों और खरीद एजेंसियों के कर्मचारियों को भारी परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है।
इस संबंध में हमारी केन्द्र सरकार और राज्य सरकार को यह अपील है कि पंजाब के किसानों के हितों के दृष्टिगत और केन्द्रीय अनाज भण्डारण की ज़रूरतों को मुख्य रखते हुए जितना शीघ्र संभव हो सके, राज्य में से गेहूं की खरीद शुरू की जाए और साथ-साथ ही इसका उठान भी होना चाहिए। यदि गेहूं के मंडीकरण का मामला इस तरह लटका रहता है तो किसानों में व्यापक स्तर पर बेचैनी पैदा होगी, जिसका सामना केन्द्र सरकार के साथ-साथ पंजाब सरकार को भी करना पड़ेगा।

